लेटलतीफी-टेंडर की पेचीदगी में अटकी सोना-सोबरन योजना, एक साल पुराना बैकलॉग बरकरार; 11 लाख लाभुक अब भी वंचित

सोना-सोबरन धोती-साड़ी योजना प्रशासनिक सुस्ती और टेंडर की जटिलताओं के कारण पिछड़ रही है. पिछले साल का बैकलॉग अब तक पूरा नहीं हुआ है, जिससे लाखों परिवार वंचित हैं. जानें योजना की वर्तमान स्थिति और कब तक हो सकता है वितरण.

रांची. झारखंड सरकार की सोना-सोबरन धोती-साड़ी योजना प्रशासनिक लेटलतीफी और टेंडर प्रक्रियाओं की जटिलता के कारण बैकलॉग में चल रही है. राज्य के गरीब और खाद्य सुरक्षा योजना से आच्छादित परिवारों को साल में दो बार मात्र 10 रुपये में धोती, साड़ी या लुंगी उपलब्ध कराने की योजना का धरातल पर सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हो रहा है.

हालात यह हैं कि पिछले वर्ष 2025 के पहले छामाही (हाफ) का वितरण ही अब तक पूरा नहीं हो सका है. अभी तक पिछले वर्ष के दूसरे हॉफ व इस बार के पहले हॉफ तक की धोती-साड़ी का वितरण हो जाना चाहिए था.

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल 67,57,528 पंजीकृत लाभुकों में से अब तक 56,41,792 परिवारों को ही पहले हाफ का लाभ मिल पाया है. राज्य के 11,15,736 लाभुक परिवार अब भी पिछले साल की अपनी पहली साड़ी या धोती मिलने का इंतजार कर रहे हैं.

सरकार ने पहले हाफ के वितरण को शत-प्रतिशत पूरा करने के लिए 31 अगस्त की अंतिम तिथि तय की है, लेकिन जिस गति से वितरण कार्य चल रहा है, उससे इस समय सीमा में लक्ष्य हासिल होना बेहद मुश्किल प्रतीत हो रहा है. इसके अलावा, पिछले वित्तीय वर्ष के दूसरे छामाही (हाफ) का वस्त्र वितरण तो अभी शुरू ही नहीं हो सका है.

चालू वित्तीय वर्ष की खरीद प्रक्रिया अंतिम चरण में

खाद्य आपूर्ति विभाग के सचिव राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए धोती-साड़ी-लुंगी की खरीद प्रक्रिया चल रही है. जेएसएफसी की ओर से जेम पोर्टल पर निविदा निकाली गयी है. खरीद प्रक्रिया अंतिम चरण में है और टेंडर फाइनल होते ही संबंधित एजेंसी को आपूर्ति का आदेश जारी कर दिया जायेगा.


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पूर्वी सिंहभूम व धनबाद की स्थिति सबसे खराब

जिलों के आंकड़ों के अनुसार बड़े और घनी आबादी वाले जिलों में योजना का क्रियान्वयन सबसे अधिक प्रभावित हुआ है. वितरण न हो पाने के मामले में पूर्वी सिंहभूम शीर्ष पर है, जहां 1,18,134 गरीब परिवारों को अब तक कपड़ा नहीं मिला है.

इसके बाद धनबाद में 1,05,596 और राजधानी रांची में 1,04,791 लाभुक योजना के लाभ से वंचित हैं. इसके अलावा पश्चिमी सिंहभूम (98,729) और गिरिडीह (70,614) में भी बड़ी संख्या में स्टॉक आपूर्ति का इंतजार किया जा रहा है.

खूंटी (12,240) और लोहरदगा (10,743) की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है.

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पिछले साल की छामाही के वितरण की स्थिति

जिलालाभुककितनों को मिलीनहीं बंटी
बोकारो3,79,2283,13,63465,594
चतरा2,25,5841,94,11931,465
देवघर2,72,7802,40,39632,384
धनबाद4,94,5603,88,9641,05,596
दुमका2,92,3682,61,76730,601
पूर्वी सिंहभूम4,57,6713,39,5371,18,134
गढ़वा2,95,0862,35,07360,013
गिरिडीह4,56,8683,86,25470,614
गोड्डा2,71,8582,24,35147,507
गुमला1,96,9221,68,62028,302
हजारीबाग3,55,0363,09,00546,031
जामताड़ा1,75,3051,54,46520,840
खूंटी1,18,4561,06,21612,240
कोडरमा1,31,6551,17,83713,818
लातेहार1,53,8331,37,74416,089
लोहरदगा1,09,41198,66810,743
पाकुड़2,05,9521,84,23821,714
पलामू4,45,9143,85,64960,265
रामगढ़1,47,6831,30,52117,162
रांची5,95,6234,90,8321,04,791
साहिबगंज2,37,4962,00,36737,129
सरायकेला-खरसावां2,38,2891,87,73950,550
सिमडेगा1,27,8531,12,42815,425
पश्चिमी सिंहभूम3,72,0972,73,36898,729
कुल67,57,52856,41,79211,15,736


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By Satish kumar

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