चना, गेहूं, धान से लेकर अरहर तक, करम पर्व के लिए जावा जगाने की विधि शुरू

करम पर्व नजदीक आते ही रांची में तैयारियां शुरू हो गई हैं। सिविल कोर्ट परिसर और सरना समिति हरमू में जावा जगाने की विधि के तहत सात तरह के अनाजों के बीज बोए गए हैं।

रांची. आदिवासी-मूलवासियों का करम पर्व नजदीक आते ही इसकी तैयारियां शुरू हो गयी हैं. सिविल कोर्ट परिसर में महिला अधिवक्ताओं ने जावा जगाने के लिए नयी टोकरियों में नदी से लायी गयी बालू में नौ तरह के अनाजों के बीज बोये. सोमवार को सरना समिति हरमू में भी जावा जगाने की प्रक्रिया के तहत बीज बोये गये.

चना, गेहूं, मकई समेत सात अनाजों के बीज बोये

जावा के लिए चना, गेहूं, मकई, धान, उड़द, बाजरा और अरहर समेत विभिन्न अनाजों के बीज बोये गये हैं. केंद्रीय सरना समिति (फूलचंद तिर्की ग्रुप) के अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने बताया कि समिति परिसर में मंगलवार से जावा जगाने की विधि शुरू होगी.

करम पूजा में जावा का विशेष महत्व

करम पूजा के दौरान अंकुरित जावा का विशेष महत्व माना जाता है. पूजा के बाद जावा को कानों में खोंसने की परंपरा है. पूजा के दिन तक हल्दी मिले पानी का छिड़काव और करम गीतों के माध्यम से जावा जगाने की विधि पूजा में बैठने वाली युवतियां निभायेंगी.

फूलचंद तिर्की ने बताया कि करम पूजा स्थलों के आसपास साफ-सफाई का काम भी किया जा रहा है.

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By Praveen Kumar Munda

प्रवीण कुमार मुंडा प्रभात खबर में डिप्टी चीफ रिपोर्टर के तौर पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता में उनका करीब 23 सालों का अनुभव है. वे 2003 में प्रभात खबर से जुड़े थे. वे झारखंड के आदिवासी समुदाय के भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति सहित जीवन के अन्य पहलुओं की खबरों पर काम करते हैं. इसके अलावा झारखंड के मिशनरी संस्थाओं की रिपोर्टिंग का भी सालों का अनुभव है. कई मंचों पर वह प्रभात खबर का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.साल 2021 में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (मुख्यमंत्री कार्यालय) में एक साल तक काम कर चुके हैं.

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