सतबरवा हत्याकांड : सीआइडी करेगी जांच, पुलिस की छापेमारी के दौरान हो गयी थी बच्ची की मौत

पलामू के सतबरवा प्रखंड के बकोरिया वंशी टोली में 30 अगस्त 2019 की देर रात सीआरपीएफ की छापेमारी के दौरान चार वर्षीय बच्ची की मौत हो गयी थी. इस मामले की जांच अब सीआइडी करेगी.

रांची : पलामू के सतबरवा प्रखंड के बकोरिया वंशी टोली में 30 अगस्त 2019 की देर रात सीआरपीएफ की छापेमारी के दौरान चार वर्षीय बच्ची की मौत हो गयी थी. इस मामले की जांच अब सीआइडी करेगी. सीआइडी जल्दी ही यह केस पुलिस से टेक ओवर कर अनुसंधान शुरू करेगी. मृत बच्ची के पिता विनोद सिंह पर जेजेएमपी उग्रवादी होने का आरोप लगाकर सीआरपीएफ के जवान उनकी तलाश में उनके घर पहुंची थी.

जब दरवाजा नहीं खुला, तो सीआरपीएफ के जवान खिड़की के जरिये अंदर घुस गये. विनोद सिंह की पत्नी से उनके पति के बारे पूछताछ की. आरोप है कि जब उसने अपने पति के बारे जानकारी होने से इनकार किया, तो पत्नी की गोद में खेल रही चार साल की बच्ची को सीआरपीएफ के जवानों ने पटक दिया. जिससे उसकी मौत हो गयी थी.

इस घटना के बाद परिवार के सदस्यों ने बच्ची की हत्या को लेकर सीआरपीएफ जवानों पर केस दर्ज कराया था, जिसकी जांच पुलिस कर रही थी. मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया था. इसके बाद आयोग को पलामू पुलिस की ओर से रिपोर्ट भेजी गयी थी, लेकिन रिपोर्ट में सीआरपीएफ के किसी जवान पर बच्ची की हत्या को लेकर संदेह जाहिर नहीं किया गया था. पुलिस भी केस की जांच के दौरान कोई ठोस साक्ष्य एकत्र नहीं कर पा रही थी.

सीआरपीएफ जवानों पर लगा था बच्ची की हत्या का आरोप

मानवाधिकार आयोग ने भी लिया था संज्ञान

सीआइडी जांच करेगी सरायकेला को-ऑपरेटिव

बैंक में 2.50 करोड़ रुपये के गबन का मामला

सरायकेला को-ऑपरेटिव बैंक से 2.50 करोड़ रुपये गबन के केस की जांच अब सीआइडी करेगी. सीआइडी अनुसंधान के लिए जल्द ही यह केस सरायकेला पुलिस से टेकओवर करेगी. केस टेकओवर करने की मंजूरी सीआइडी एडीजी अनिल पालटा ने दे दी है. उल्लेखनीय है कि इस मामले में बैंक की ओर से एक प्राथमिकी स्थानीय थाना में दर्ज करायी गयी है. इसमें सुशील कुमार, प्रदीप कुमार और विजय कुमार सिंह को आरोपी बनाया गया है. बिल परचेज मद में विजय कुमार सिंह को दिये गये 2.50 करोड़ का कर्ज एनपीए हो गया था.

मामले में यह बात भी सामने आयी थी कि बैंक में बिल परचेज मद में ऋण का प्रावधान नहीं है. इसके बावजूद नियम के खिलाफ ऋण की स्वीकृति की गयी थी. मामले में यह भी तथ्य सामने आ चुका है कि 8 मार्च 2019 को मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी से भुगतान संबंधित निर्देश की मांग की गयी थी. इसके बाद 11 मार्च को बिना अनुमति के ही भुगतान कर दिया गया था.

Post by : Pritish Sahay

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