सहारा में फंसे 32,600 करोड़ की वापसी को लेकर रांची में सत्याग्रह शुरू, लोकभवन के सामने डटे निवेशक

रांची में सहारा समूह की विभिन्न कंपनियों में निवेश कर फंसे निवेशकों ने रविवार से लोकभवन के समीप सत्याग्रह शुरू किया है. उनकी जीवनभर की गाढ़ी कमाई की वापसी के लिए यह आंदोलन भूख हड़ताल में बदलने की चेतावनी दी गई है.

रांची: सहारा समूह की विभिन्न कंपनियों में निवेश कर फंसे निवेशकों ने जीवनभर की गाढ़ी कमाई की वापसी को लेकर रविवार से रांची के लोकभवन के समीप सत्याग्रह शुरू किया. विश्व भारती जनसेवा संस्थान के बैनर तले धरना पर बैठे निवेशकों ने कहा कि सहारा की योजनाओं में करीब 32,600 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं. कई निवेशकों की जमा राशि की अवधि पूरी हो चुकी है, लेकिन रकम वापस नहीं मिली है. इससे इलाज, वच्चों की पढ़ाई और घरेलू जरूरतों में कठिनाई हो रही है.

आर्थिक संकट के कारण कई लोगों ने की आत्महत्या

निवेशकों ने दावा किया कि सहारा में पैसा फंसने और आर्थिक संकट के कारण झारखंड में अब तक 74 निवेशकों की मौत हो चुकी है, जिनमें कुछ ने आत्महत्या भी की. उन्होंने मृत निवेशकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की. निवेशकों का आरोप है कि आम लोगों ने अपनी बचत सहारा योजनाओं में जमा की, लेकिन लंबे आर्थिक संकट के कारण 74 पीड़ितों की मौत हो गई. निवेशक अपनी मांगों को लेकर कल से सत्याग्रह आंदोलन कर रहे हैं. निवेशक सहारा के खिलाफ लोक भवन के समीप धरना पर बैठे हुए हैं. लोगों का कहना है कि समय पर भुगतान नहीं होने से उनकी आर्थिक स्थिति खराब हो गई है. उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन आमरण अनशन में बदलेगा.

सीएम हेमंत ने पीडितों को न्याय दिलाने का दिया था भरोशा

निवेशकों ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री ने सहारा पीड़ितों को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया था. संस्था का दावा है कि जांच आयोग गठन और अन्य मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है. संस्था के राष्ट्रीय सचिव नागेंद्र कुमार कुशवाहा की और से 147/2024 में हस्तक्षेप याचिका दायर किये जाने का भी उल्लेख किया. संस्था के अनुसार, सहारा इंडिया अधिकारियों के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने का आश्वासन भी पूरा नहीं हुआ.

निवेशकों की प्रमुख मांगें

  1. सीआइडी कांड संख्या 51/2024 में मई 2025 से वारंट जारी आरोपियों की अविलंब गिरफ्तारी
  2. सीआइडी कांड संख्या 22/2025 में बेची गयी जमीन जब्त कर नीलामी से भुगतान
  3. सहारा पीड़ितों के लिए जांच आयोग का गठन
  4. मृत 74 निवेशकों के परिजनों को 10 लाख रुपये मुआवजा
  5. झारखंड हाइकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में लीगल खर्च सरकार द्वारा वहन विधानसभा में घोषणा के वावजूद कार्रवाई नहीं हुई.

अपराध अनुसंधान विभाग में दर्ज कांड संख्या 51/2024 के तहत मई 2025 में गैरजमानती वारंट जारी हुए, लेकिन कई आरोपियों की गिरफ्तारी अब तक नहीं हुई है.

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By प्रतीक्षा कुमारी

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