डकरा. बीसीसीएल में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये ठगी मामले कांग्रेस नेत्री इंदिरा देवी द्वारा खलारी थाना में दर्ज करायी गयी शिकायत के आलोक में आरोपी सीसीएल कर्मी अजय कुमार सिन्हा रविवार को अपना पक्ष रखने थाना पहुंचा और इंदिरा देवी से लिये गये पांच लाख रुपए लौटाने की पेशकश की. पुलिस ने इसकी सूचना इंदिरा देवी को दी और उन्हें भी देर शाम को थाना बुलाया गया. अजय ने दस जून की तारीख का चेक और नकद मिला कर पांच लाख रुपए दे दिये हैं. रुपए देने के बाद पुलिस ने अजय को कुछ शर्त पर छोड़ दिया है. इंदिरा ने बताया कि उसने अजय के अकाउंट में पांच लाख, दो लाख पवन कुमार विश्वकर्मा और 17 लाख शानवी इंटरप्राइजेज के अकाउंट में दिये हैं. शानवी इंटरप्राइजेज सागर चक्रवर्ती द्वारा संचालित बैंक अकाउंट है. पैसे मिलने के बाद इंदिरा देवी ने कहा कि यह प्रभात खबर में गंभीरता से छप रही खबर और खलारी पुलिस की सक्रियता से संभव हो पाया है. सैकड़ों लोग इस ठगी का शिकार बने हैं और सभी को इससे उम्मीद जगी है कि उनकी भी गाढ़ी कमाई का हिस्सा जो ठग लिया गया था, वह उन्हें वापस मिल सकता है.
जमीन के बदले नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी करने का गिरोह सक्रिय
सीसीएल, बीसीसीएल में जमीन के बदले नौकरी दिलाने वाले गिरोह भी कोयलांचल में सक्रिय हैं. सीसीएल में मगध-संघमित्रा आम्रपाली-चन्द्रगुप्त और अन्य प्राइवेट कंपनी जिसे कोल ब्लॉक आवंटित हुआ है, उस क्षेत्र की जमीन को लेकर हेरफेर करने वाला एक बड़ा गिरोह तेजी से सक्रिय है. इस काम में विभिन्न राजनीतिक दल और ट्रेड यूनियन के नेता भी सक्रिय हैं. ऐसे लोग सीसीएल के लैंड-रेवेन्यू डिपार्टमेंट के अधिकारी-कर्मचारी और अंचल कार्यालय को जेब में रखने का दावा करके भोले-भाले लोगों को फंसा रहे हैं. इंदिरा देवी मामले से जुड़े अजय कुमार सिन्हा का नाम जमीन मामले में भी सामने आ रहा है.सामूहिक तबादले से लग सकता है लगाम
सीसीएल के लैंड-रेवेन्यू डिपार्टमेंट में काम करने वाले कर्मचारियों का सामूहिक तबादला से इस गिरोह का कमर टूट सकता है, क्योंकि सीसीएल कार्यालय में बैठ कर ऐसे लोग गिरोह को वैसी सभी जमीन का डिटेल जानकारी उपलब्ध कराते हैं, जो कंपनी द्वारा अधिग्रहित की जाती है या करने की प्रक्रिया चल रही होती है. वर्षों से एक ही जगह पदस्थापित ऐसे कुछ कर्मचारी संबंधित अंचल कार्यालय को भी अपने अनुसार संचालित करने लगे हैं. ऐसे कर्मचारियों की ठसक का आलम यह है कि यूनियन की गतिविधियों को कुछ लोग फंडिंग करने लगे हैं. तबादला होने पर जो यूनियन नेता पैरवी में सामने आयेंगे वे भी बेनकाब होंगे.
