रांचीः असम में आयी विनाशकारी बाढ़ से कई क्षेत्रों में भारी तबाही हुई है. बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में लोगों के घर बर्बाद हो गए हैं और उनके सामने खाने-पीने के साथ रहने का भी संकट खड़ा हो गया है. संकट की इस घड़ी में जीइएल चर्च रांची असम के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आया है. चर्च की ओर से पीड़ितों के लिए चंदे के माध्यम से राशि एकत्र कर असम भेजी जा रही है.
कुछ दिन पहले चर्च के सदस्य धीरज लकड़ा को असम भेजा गया था. उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर वहां की स्थिति का जायजा लिया और चर्च की ओर से चलाए जा रहे राहत कार्यों की जानकारी ली. जिन लोगों के घर बाढ़ में पूरी तरह तबाह हो गए हैं, उन्हें जीइएल चर्च की ओर से असम में शरण दी गई है.
17 और 18 अगस्त को जीइएल चर्च के प्रमुख मॉडरेटर बिशप मार्शल केरकेट्टा और महासचिव ईश्वर दत्त कंडुलना असम के दौरे पर रहेंगे. इस दौरान दोनों अधिकारी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और पुनर्वास कार्यों का जायजा लेंगे तथा राहत सामग्री का वितरण करेंगे. महासचिव ईश्वर दत्त कंडुलना ने बताया कि दौरे के दौरान प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए आगे की योजना पर भी विचार किया जाएगा.
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असम के बिशप ने मांगी थी मदद
जीइएल चर्च के नार्थ ईस्ट डायसिस के बिशप दीपक केरकेट्टा ने सात अगस्त को पत्र लिखकर रांची स्थित चर्च के हेडक्वार्टर से राहत कार्यों में सहयोग का अनुरोध किया था. उन्होंने पत्र में बताया था कि जीइएल चर्च की ओर से राहत कार्यों के लिए सहयोग राशि मिल रही है. उन्होंने कहा था कि चर्च की कोशिश है कि बाढ़ से प्रभावित हर परिवार तक मदद पहुंचायी जाए. प्राप्त राशि का उपयोग पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है.
सभी वर्गों को दी जा रही मदद
महासचिव ईश्वर दत्त कंडुलना ने कहा कि असम में झारखंड से गये बड़ी संख्या में लोग रहते हैं और इनमें कई लोग इस समय संकट में हैं. उन्होंने कहा कि बाढ़ से केवल ईसाई समुदाय ही नहीं, बल्कि सरना और अन्य समुदायों के लोग भी प्रभावित हुए हैं. बिहूवार मंडली सहित कई क्षेत्रों में बाढ़ का असर काफी विनाशकारी रहा है. चर्च की ओर से सभी प्रभावित लोगों को समान रूप से मदद पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि राहत कार्यों के लिए चर्च के सभी डायसियों से विश्वासियों के माध्यम से आर्थिक सहयोग जुटाया जा रहा है. इसी राशि को असम के बाढ़ प्रभावित लोगों की राहत और पुनर्वास के लिए भेजा जा रहा है.
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