कोरोना से जंग में देश का रोल मॉडल बनेगी रांची, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कही यह बात

वैश्विक महामारी बन चुके कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में झारखंड की राजधानी रांची ने एक मिसाल पेश की है. तबलीगी जमात की वजह से राजधानी समेत राज्य के दो जिलों में पैर पसारने वाले कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में रांची ने बेहतरीन काम किया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का मानना है कि रांची देश के समक्ष कोरोना से जंग में रोल मॉडल बन कर उभरा है.

रांची : वैश्विक महामारी बन चुके कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में झारखंड की राजधानी रांची ने एक मिसाल पेश की है. तबलीगी जमात की वजह से राजधानी समेत राज्य के दो जिलों में पैर पसारने वाले कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में रांची ने बेहतरीन काम किया है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का मानना है कि रांची देश के समक्ष कोरोना से जंग में रोल मॉडल बन कर उभरा है.

मुख्यमंत्री श्री सोरेन ने इसका पूरा श्रेय रांची जिला प्रशासन, डॉक्टरों, स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिसकर्मियों, सफाईकर्मियों एवं नि:स्वार्थ भाव से जनता की सेवा कर रही समाजसेवी संस्थाओं को दिया. उन्होंने कहा कि न सिर्फ रांची ने कोरोना से जंग जीती है, बल्कि सामाजिक सौहार्द की अनूठी मिसाल भी कायम की है.

श्री सोरेन ने कहा है कि सब साथ मिलकर ही इस महामारी को हरा सकते हैं. इसलिए वह लोगों से आग्रह करते हैं कि आपस में दूरी बनायें. यानी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें. हालांकि, इस दौरान दिलों को जरूर जोड़े रखें.

मुख्यमंत्री ने कहा है कि उन्हें जानकारी मिली है कि देश के विभिन्न शहरों की तुलना में रांची का रिकवरी रेट (कोरोना संक्रमण के मामले में) सबसे अधिक है. रांची में कोरोना संक्रमण के 103 मामले मिले, जिसमें 83 मरीज स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुके हैं. अब कोरोना संक्रमण के 18 सक्रिय मामले ही शेष हैं. उन्होंने कहा कि कोरोना से जंग जीतने की यह गति कायम रही, तो आनेवाले कुछ दिनों में रांची रेड जोन से बाहर आ जायेगी.

राष्ट्रीय स्तर पर कोरोना वायरस के संक्रमण से रिकवरी की बात करें, तो 35.10 फीसदी लोग स्वस्थ हो रहे हैं. वहीं झारखंड में 52 फीसदी से अधिक लोग अब तक स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं. कोविड19 के संक्रमण से मृत्यु के मामले में झारखंड का रिकॉर्ड राष्ट्रीय औसत से बहुत बढ़िया है. देश में कोविड19 से संक्रमित 3.20 फीसदी लोगों की मृत्यु हो जाती है, तो झारकंड में अब तक 1.38 फीसदी लोगों की ही मौत हुई है.

कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने के मामले में भी झारखंड की स्थिति राष्ट्रीय दर से बेहतर है. देश में पिछले 7 दिनों में 5.35 फीसदी की रफ्तार से कोरोना संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ी है, तो झारखंड में 4.83 फीसदी की दर से. इसी तरह देश में 13.30 दिन में कोरोना के मामलों में 100 फीसदी की वृद्धि हो रही है, जबकि झारखंड में 14.7 दिन में.

उल्लेखनीय है कि झारखंड में अब तक 217 लोग कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं. इनमें से 113 लोग स्वस्थ होकर अपने घर जा चुके हैं, जबकि 3 लोगों की मौत हो चुकी है. राज्य में 17 मई, 2020 की सुबह 8:00 बजे तक कोरोना के 101 एक्टिव केस थे. इसमें सबसे ज्यादा 25 मामले गढ़वा में, तो हजारीबाग में 21 मामले थे. रांची, जहां सबसे ज्यादा 103 मामले सामने आये थे, उनमें 83 ठीक हो गये.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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