संजीव सिंह की रिपोर्ट
रांची. रांची विश्वविद्यालय के मानवशास्त्र विभाग में चल रहा एमए इन रूरल डेवलपमेंट (ग्रामीण विकास) कोर्स अब स्नातकोत्तर (PG) समाजशास्त्र विभाग में संचालित होगा. विश्वविद्यालय प्रशासन ने वर्ष 2024 में इस कोर्स को इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (आईएमएस) में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था, लेकिन दो साल बाद भी इसे आईएमएस में स्थानांतरित नहीं किया जा सका.
दो साल बाद बदला गया विभाग
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार, आईएमएस में पहले से सेल्फ फाइनांस के कोर्स चल रहे हैं. ऐसे में वहां एक और सेल्फ फाइनांस कोर्स शुरू करना संभव नहीं है. इसी वजह से अब एमए ग्रामीण विकास को स्नातकोत्तर समाजशास्त्र विभाग में स्थानांतरित करने का फैसला लिया गया है. इसके लिए विवि काउंसिल फॉर वोकेशनल स्टडीज की स्वीकृति का इंतजार है. समाजशास्त्र विभाग में इस कोर्स के निदेशक विभागाध्यक्ष विनोद नारायण होंगे, जबकि डॉ. दीपाली डुंगडुंग को कोर्स को-ऑर्डिनेटर बनाया गया है.
13 विद्यार्थी कक्षा शुरू होने का कर रहे इंतजार
एमए ग्रामीण विकास कोर्स में इस सत्र में 13 विद्यार्थियों ने नामांकन लिया है. नामांकन के बावजूद अब तक कक्षाएं शुरू नहीं हो पाई हैं. विद्यार्थी कक्षा शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं. वहीं, इस कोर्स में विश्वविद्यालय द्वारा नियुक्त तीन शिक्षकों और करीब दो कर्मचारियों को जनवरी 2026 से मानदेय नहीं मिला है. इससे कर्मचारियों के सामने भी परेशानी की स्थिति बनी हुई है.
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एक विभाग में पहले से चल रहा ह्यूमन राइट्स कोर्स
स्नातकोत्तर समाजशास्त्र विभाग में पहले से एमए इन ह्यूमन राइट्स कोर्स संचालित हो रहा है. हालांकि पिछले दो वर्षों से इस कोर्स में एक भी विद्यार्थी का नामांकन नहीं हुआ है. एमए ग्रामीण विकास कोर्स के समाजशास्त्र विभाग में आने के बाद ह्यूमन राइट्स कोर्स के भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. विश्वविद्यालय को एमए ह्यूमन राइट्स कोर्स बंद करना पड़ सकता है, लेकिन इस संबंध में अभी तक प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट फैसला नहीं लिया गया है. ऐसे में एक ही विभाग में दोनों कोर्स के संचालन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है.
एक सत्र में 20 विद्यार्थी जरूरी करने की तैयारी
विश्वविद्यालय प्रशासन सेल्फ फाइनांस कोर्स के संचालन के लिए एक सत्र में कम से कम 20 विद्यार्थियों का नामांकन अनिवार्य करने पर भी विचार कर रहा है. इसके अलावा विश्वविद्यालय के एमबीए, एमसीए जैसे सेल्फ फाइनांस कोर्स की फीस में पांच प्रतिशत तक बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव भी है. शिक्षकों को सम्मानजनक मानदेय देने के लिए जल्द ही कोर कमेटी की बैठक में फैसला लिए जाने की संभावना है. विश्वविद्यालय में सेल्फ फाइनांस कोर्स के शिक्षकों का मानदेय दो साल तक नहीं बढ़ाने का पूर्व निर्णय भी वर्ष 2026 में समाप्त होने वाला है.
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