Ranchi Missing Girl: रांची के डोरंडा थाना क्षेत्र के डिबडीह गिरिजाटोली की 11 वर्षीय नेहा कुमारी टोप्पो आखिरकार सात दिन बाद मिल गई. 4 फरवरी 2026 से लापता नेहा टोप्पा 10 फरवरी को चुटिया थाना क्षेत्र स्थित प्रेमाश्रय संस्थान में मिली. वह चाइल्ड वेलफेयर कमेटी (सीडब्ल्यूसी) रांची के अधीन वहां रह रही थी, लेकिन इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को नहीं दी गई थी.
सात दिन तक पुलिस को नहीं मिली सूचना
चौंकाने वाली बात यह रही कि 4 फरवरी को ही नेहा टोप्पो सुरक्षित मिल चुकी थी. बावजूद इसके रांची पुलिस या डोरंडा थाना को इसकी जानकारी नहीं दी गई. डोरंडा पुलिस लगातार सात दिनों तक बच्ची की तलाश में जुटी रही. सोमवार को प्रभात खबर में प्रकाशित खबर देखने के बाद प्रेमाश्रय संस्थान ने सिटी एसपी पारस राणा को नेहा के बारे में सूचना दी.
कोर्ट में बयान की प्रक्रिया अधूरी
सिटी एसपी के निर्देश पर डोरंडा पुलिस प्रेमाश्रय पहुंची और नेहा को रांची सिविल कोर्ट बयान दर्ज कराने ले जाया गया. हालांकि समयाभाव के कारण उस दिन बयान दर्ज नहीं हो सका. इसके बाद बच्ची को दोबारा प्रेमाश्रय संस्थान पहुंचा दिया गया. बुधवार को फिर से कोर्ट में उसका बयान दर्ज कराया जाएगा.
रेलवे स्टेशन से मुरी आरपीएफ ने उतारा
जानकारी के अनुसार 4 फरवरी की सुबह करीब 11 बजे नेहा अपने मौसा-मौसी के घर से निकल गई थी और किसी तरह रांची रेलवे स्टेशन पहुंच गई. वहां से वह दुमका की ओर जा रही ट्रेन में सवार हो गई. मुरी रेलवे स्टेशन पर चेकिंग के दौरान आरपीएफ की नजर उस पर पड़ी. अकेले यात्रा करते देख आरपीएफ ने उसे ट्रेन से उतारकर पूछताछ की.
चाइल्ड हेल्पलाइन को सौंपा गया मामला
उसी दिन नेहा को रांची रेलवे स्टेशन लाकर चाइल्ड हेल्पलाइन की सदस्य प्रमिला कुमारी को सौंप दिया गया. प्रमिला कुमारी ने 4 फरवरी को ही बच्ची को चाइल्ड वेलफेयर कमेटी, रांची के समक्ष प्रस्तुत कर दिया था. लेकिन इस पूरी प्रक्रिया की सूचना पुलिस को नहीं दी गई, जिससे खोजबीन लंबी खिंचती रही.
परिवार को दी गई सूचना, पिता आएंगे रांची
नेहा मूल रूप से गोड्डा जिले के हनवारा थाना अंतर्गत जेटहरीडीह की निवासी है. उसके पिता सीताराम टोप्पो हरियाणा के रोहतासगढ़ में मजदूरी करते हैं. फिलहाल, नेहा अपने मौसा-मौसी के साथ डोरंडा में रह रही थी और डिबडीह राजकीय मध्य विद्यालय में कक्षा दो की छात्रा है. डोरंडा पुलिस ने उसके पिता को सूचना दे दी है. वह बुधवार को पत्नी के साथ रांची पहुंचेंगे.
समन्वय की कमी पर उठे सवाल
इस घटना ने चाइल्ड वेलफेयर कमेटी और पुलिस के बीच समन्वय की कमी पर सवाल खड़े कर दिए हैं. यदि समय पर सूचना साझा की जाती, तो सात दिन की खोजबीन और परिजनों की चिंता से बचा जा सकता था. फिलहाल नेहा सुरक्षित है और आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है.
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सीडब्ल्यूसी ने गलत ई-मेल पर भेजी जानकारी
सीडब्ल्यूसी रांची की प्रभारी अध्यक्षा कुंती देवी ने बताया कि नेहा कुमारी टोप्पो ने प्रारंभिक पूछताछ में अपना घर गोड्डा बताया था. इसके बाद छह जनवरी को गोड्डा स्थित चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट को सत्यापन के लिए ई-मेल भेजा गया. लेकिन 10 जनवरी को पता चला कि जिस ई-मेल पते पर जानकारी भेजी गई थी, वह पहले ही बंद हो चुका है. इसके बाद नए ई-मेल पते पर दोबारा गोड्डा चाइल्ड प्रोटेक्शन यूनिट को सूचना भेजी गई. वहां से रिपोर्ट आने के बाद बच्ची को उसके माता-पिता को सौंप दिया जाता. एक सवाल के जवाब में कुंती देवी ने बताया कि नेहा कुमारी टोप्पो के बारे में रांची या किसी दूसरे जिले की पुलिस को कोई सूचना साझा नहीं की गई थी.
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