Booty More Meat House: झारखंड की राजधानी रांची में प्रवेश द्वार माने जाने वाले बुटी मोड़ पर रांची नगर निगम ने लोगों को स्वच्छ और व्यवस्थित तरीके से मांस उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आधुनिक मीट हाउस का निर्माण कराया था. इस परियोजना पर लाखों रुपये खर्च किए गए थे. निगम की योजना थी कि यहां आने वाले यात्रियों और आसपास के लोगों को एक ही स्थान पर साफ-सुथरे वातावरण में बकरे का ताजा मीट उपलब्ध कराया जाएगा. इससे खुले में मांस बिक्री पर रोक लगेगी और स्वच्छता व्यवस्था भी बेहतर होगी. लेकिन निर्माण के कुछ ही समय बाद यह मीट हाउस बंद हो गया और आज तक दोबारा शुरू नहीं हो सका.
चार-पांच दिन चला मीट हाउस, फिर हो गया बंद
बूटी मोड़ दुकानदार संघ के अध्यक्ष मनोज महतो ने बताया कि नगर निगम ने करीब वर्ष 2018 में इस मीट हाउस का निर्माण कराया था. शुरुआत में यह केवल चार-पांच दिन तक ही संचालित हो सका. इसके बाद यहां लोगों को मीट मिलना बंद हो गया और तब से यह भवन बंद पड़ा है. उन्होंने कहा कि नगर निगम के इस मीट हाउस से आज तक किसी को नियमित रूप से ताजा मीट नहीं मिल सका. वर्तमान में इस भवन का उपयोग मीट हाउस के बजाय नगर निगम के सफाई कर्मचारियों के सामान रखने के लिए स्टोर रूम के रूप में किया जा रहा है. उनका कहना है कि जिस उद्देश्य से लाखों रुपये खर्च कर इस भवन का निर्माण किया गया था, वह पूरी तरह विफल साबित हुआ.
वार्ड पार्षद ने बताया बड़ी प्रशासनिक चूक
वार्ड संख्या पांच के निगम पार्षद अवधेश बैठा ने इस पूरे मामले को बड़ा घोटाला बताया. उन्होंने कहा कि नगर निगम अधिकारियों ने बिना समुचित योजना और व्यवहारिक अध्ययन के आनन-फानन में मीट हाउस का निर्माण करा दिया. यदि योजना पर गंभीरता से काम किया जाता और स्थानीय जरूरतों का सही आकलन किया जाता, तो यह परियोजना सफल हो सकती थी. उन्होंने कहा कि मीट हाउस के आसपास चार से पांच गांव और सात से आठ मोहल्ले हैं, जहां बड़ी संख्या में मांसाहारी परिवार रहते हैं. ऐसे क्षेत्र में आधुनिक मीट हाउस सफल हो सकता था, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण यह योजना शुरू होने के साथ ही दम तोड़ गई.
पुराने मीट की शिकायत से लोगों ने बनाई दूरी
पार्षद अवधेश बैठा ने आरोप लगाया कि इस मीट हाउस में लोगों को ताजा बकरे का मीट उपलब्ध कराने के बजाय तीन-चार दिन पुराना मीट बेचा जा रहा था. इससे लोगों का भरोसा टूट गया और उन्होंने यहां से खरीदारी बंद कर दी. धीरे-धीरे ग्राहक आने बंद हो गए और कुछ ही दिनों में मीट हाउस पूरी तरह बंद हो गया. उन्होंने कहा कि यदि शुरुआत से गुणवत्ता और स्वच्छता पर ध्यान दिया जाता तो यह परियोजना सफल हो सकती थी. लेकिन खराब प्रबंधन और निगरानी के अभाव में जनता की सुविधा के लिए बनाई गई यह योजना विफल हो गई.
स्टोर रूम बनकर रह गया लाखों रुपये का भवन
स्थानीय लोगों कहा है कि वर्तमान में इस भवन का इस्तेमाल मीट हाउस के रूप में नहीं किया जा रहा है. नगर निगम के सफाई कर्मचारी यहां अपने उपकरण, मशीनें और अन्य सामग्री रखते हैं. इससे स्पष्ट होता है कि जिस भवन का निर्माण जनता की सुविधा के लिए किया गया था, वह अब अपने मूल उद्देश्य से पूरी तरह भटक चुका है. उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं पर खर्च होने वाला पैसा जनता का होता है. इसलिए ऐसी परियोजनाओं की योजना, क्रियान्वयन और निगरानी पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ होनी चाहिए.
खुले में बिक रहा मीट, व्यवस्थित बाजार की जरूरत
रांची के अधिकांश इलाकों में आज भी खुले में मांस, मछली और मुर्गे की बिक्री हो रही है. अवधेश बैठा ने कहा कि जब तक नगर निगम इन दुकानों के लिए व्यवस्थित और आधुनिक बाजार विकसित नहीं करेगा, तब तक स्वच्छता संबंधी समस्याएं बनी रहेंगी. उनका सुझाव है कि निगम को पहले व्यापक योजना बनानी चाहिए और उसके बाद ही ऐसी परियोजनाओं को लागू करना चाहिए.
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भविष्य की योजनाओं में सबक लेने की जरूरत
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि नगर निगम को इस विफल परियोजना से सबक लेना चाहिए. जनता के पैसे से बनने वाली योजनाएं केवल निर्माण तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका सफल संचालन भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए. यदि योजना बनाने से पहले स्थानीय जरूरत, संचालन व्यवस्था, गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी पर गंभीरता से काम किया जाए, तो भविष्य में ऐसी परियोजनाएं जनता के लिए वास्तव में उपयोगी साबित हो सकती हैं. फिलहाल बुटी मोड़ का यह मीट हाउस सरकारी लापरवाही और असफल योजना का प्रतीक बनकर खड़ा है.
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