क्लीन एंड ग्रीन स्कूलों में राहे का आवासीय बालिका विद्यालय देश में नंबर वन

Ranchi News: स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग 2025-26 में रांची के राहे स्थित झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय ने देश में पहला स्थान हासिल किया है. लातेहार और हजारीबाग के दो अन्य स्कूलों को भी उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए चुना गया है. चयनित विद्यालयों को एक लाख रुपये का अतिरिक्त अनुदान मिलेगा. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Ranchi News: केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा संचालित स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग (एसएचवीआर) 2025-26 के तहत झारखंड के तीन विद्यालयों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया है. इनमें रांची जिले के राहे स्थित झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय ने ग्रामीण कैटेगरी-टू में पूरे देश में पहला स्थान हासिल कर राज्य का गौरव बढ़ाया है. इस उपलब्धि पर केंद्रीय शिक्षा सचिव संजय कुमार ने राज्य सरकार और संबंधित विद्यालयों को बधाई दी है.

ग्रामीण कैटेगरी-टू में देश में प्रथम

स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग (एसएचवीआर) 2025-26 के तहत रांची जिले के राहे स्थित झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय ने ग्रामीण कैटेगरी-टू में देशभर में पहला स्थान प्राप्त किया है. विद्यालय को 99.20 प्रतिशत अंक मिले हैं, जो इस श्रेणी में सर्वोच्च स्कोर है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से भेजे गए पत्र में इस उपलब्धि को विद्यालय प्रबंधन, शिक्षकों, छात्राओं और स्थानीय समुदाय के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया गया है.

लातेहार और हजारीबाग के स्कूलों ने भी बनाई पहचान

इस रेटिंग में झारखंड के दो अन्य विद्यालयों ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है. लातेहार जिले के उत्क्रमित मध्य विद्यालय तुरीसोत का चयन ग्रामीण कैटेगरी-वन में हुआ है. इस विद्यालय को 90.40 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए हैं और पूरे देश में इसका स्थान 64वां रहा है. वहीं हजारीबाग के बिहारी बालिका हाईस्कूल ने अर्बन कैटेगरी-टू में 93.30 प्रतिशत अंक हासिल करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर 21वां स्थान प्राप्त किया है. इस प्रकार राज्य के दो ग्रामीण और एक शहरी विद्यालय ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है. कभी-कभी अच्छी खबरें यह भी याद दिलाती हैं कि सरकारी स्कूलों की चर्चा सिर्फ समस्याओं के लिए ही नहीं होती.

स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण में मिला सम्मान

शिक्षा मंत्रालय के अनुसार चयनित विद्यालयों ने स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, जल संरक्षण, ऊर्जा दक्षता और परिसर में हरियाली बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य किया है. इन विद्यालयों ने व्यक्तिगत स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और जिम्मेदार नागरिकता की भावना को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है. मंत्रालय का मानना है कि इन स्कूलों का मॉडल देश के अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणास्रोत साबित होगा.

प्रत्येक विद्यालय को मिलेगा एक लाख रुपये का अनुदान

एसएचवीआर 2025-26 के तहत चयनित प्रत्येक विद्यालय को प्रशस्ति प्रमाण-पत्र के साथ एक लाख रुपये की अतिरिक्त राशि प्रदान की जाएगी. यह अनुदान विद्यालयों में स्वच्छता और हरित गतिविधियों को और मजबूत करने के उद्देश्य से दिया जाएगा. इसके अलावा सम्मानित विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को शैक्षणिक अध्ययन भ्रमण (एजुकेशनल एक्सपोजर विजिट) का अवसर भी मिलेगा. पुरस्कार वितरण समारोह और अध्ययन भ्रमण से संबंधित विस्तृत जानकारी बाद में साझा की जाएगी.

सफलता की कहानियों को प्रचारित करने का आग्रह

केंद्रीय शिक्षा सचिव संजय कुमार ने राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि चयनित विद्यालयों को उनकी ओर से बधाई और सराहना पहुंचाई जाए. साथ ही इन विद्यालयों की सफलता की कहानियों का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए, ताकि अन्य शिक्षण संस्थान भी इसी प्रकार उत्कृष्ट कार्य के लिए प्रेरित हो सकें. उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य सरकार के सहयोग से आने वाले वर्षों में स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग पहल को और मजबूत बनाया जाएगा और स्वच्छ एवं हरित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा.

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झारखंड के चयनित विद्यालयों का प्रदर्शन

जिलाश्रेणीविद्यालय का नामस्कोरराष्ट्रीय रैंक
लातेहारग्रामीण कैटेगरी-वनउत्क्रमित मध्य विद्यालय तुरीसोत90.40 प्रतिशत64
रांचीग्रामीण कैटेगरी-टूझारखंड बालिका आवासीय विद्यालय, राहे99.20 प्रतिशत1
हजारीबागअर्बन कैटेगरी-टूबिहारी बालिका हाईस्कूल93.30 प्रतिशत21
इन उपलब्धियों ने एक बार फिर साबित किया है कि संसाधनों के साथ प्रतिबद्धता और सामूहिक प्रयास जुड़ जाएं, तो छोटे कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालय भी राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्टता की नई मिसाल कायम कर सकते हैं.

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Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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