40 साल की सेवा के बाद भी प्रोफेसर को नहीं मिली पूरी लीव इनकैशमेंट, हाईकोर्ट ने दिया 180 दिनों का लाभ

झारखंड हाईकोर्ट ने गॉस्नर कॉलेज के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. नवीन कुमार के अर्जित अवकाश भुगतान मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. अदालत ने रांची यूनिवर्सिटी और कॉलेज प्रबंधन द्वारा दावा खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया है.


Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने सेवानिवृत्त प्रोफेसर की अर्जित अवकाश के भुगतान से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने गॉस्नर कॉलेज, रांची के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. नवीन कुमार के मामले में रांची यूनिवर्सिटी और कॉलेज प्रबंधन द्वारा उनके अर्जित अवकाश को शून्य मानकर दावा खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया है. अदालत ने संबंधित पक्षों को कानून के अनुसार उनके पूरे अर्जित अवकाश की दोबारा गणना कर भुगतान करने का निर्देश दिया है. इसके लिए 10 सप्ताह की समयसीमा तय की गयी है. निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर प्रोफेसर को 7 प्रतिशत ब्याज भी देना होगा.

करीब 40 साल की सेवा के बाद 2018 में हुए सेवानिवृत्त

डॉ. नवीन कुमार गॉस्नर कॉलेज, रांची में प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे. उन्होंने कॉलेज में करीब 40 वर्षों तक विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन किया और 30 नवंबर 2018 को सेवानिवृत्त हुए. सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अर्जित अवकाश के बदले मिलने वाली राशि और छठे से सातवें वेतनमान के बीच ग्रेच्युटी के अंतर के भुगतान की मांग की थी. इस मामले में उन्होंने पहले भी हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. बाद में ग्रेच्युटी की अंतर राशि का भुगतान कर दिया गया, लेकिन अर्जित अवकाश के भुगतान का दावा कॉलेज प्रबंधन की रिपोर्ट के आधार पर खारिज कर दिया गया. सात मई 2025 के रांची यूनिवर्सिटी के आदेश में कहा गया कि प्रोफेसर के खाते में कोई अर्जित अवकाश शेष नहीं है. इसके खिलाफ डॉ. नवीन कुमार ने वर्तमान याचिका दायर की.

कॉलेज ने मेडिकल लीव को आधार पर दावा खारिज किया

सुनवाई के दौरान कॉलेज प्रबंधन की ओर से कहा गया कि प्रोफेसर ने लंबी बीमारी के दौरान अपने अर्जित अवकाश समेत उपलब्ध छुट्टियां इस्तेमाल कर ली थीं. कॉलेज ने यह भी दावा किया कि उन्होंने कई बार मेडिकल उपचार के लिए जाने से पहले कॉलेज से छुट्टी की अनुमति नहीं ली थी. हालांकि, अदालत के समक्ष पेश दस्तावेजों में सामने आया कि प्रोफेसर को 140 दिनों की मेडिकल लीव स्वीकृत की गयी थी. रिकॉर्ड में इसके अतिरिक्त 66 दिनों तक अनुपस्थित रहने की बात भी दर्ज थी. कॉलेज की ओर से प्रस्तुत गणना में 119 दिनों का अर्जित अवकाश बताया गया, जिसमें 66 दिन की कथित अनधिकृत अनुपस्थिति घटाने के बाद 53 दिनों का अवकाश भुगतान योग्य बताया गया.

बिना कार्रवाई के अनुपस्थिति अनधिकृत नहीं

हाईकोर्ट ने कहा कि कॉलेज ने सेवा अवधि के दौरान कभी औपचारिक रूप से यह घोषित नहीं किया कि उक्त अनुपस्थिति अनधिकृत है. न ही इस आधार पर कोई विभागीय जांच या कार्रवाई शुरू की गयी. अदालत ने यह भी पाया कि बीमारी के दौरान प्रोफेसर को लगातार वेतन मिलता रहा और उन्हें कोई कारण बताओ नोटिस नहीं दिया गया. अदालत के अनुसार, ऐसे हालात में बाद में उस अवधि को अनधिकृत अनुपस्थिति बताकर अर्जित अवकाश के भुगतान से वंचित नहीं किया जा सकता. कॉलेज स्वयं UGC के 14 जनवरी 2005 के अवकाश संबंधी दिशा-निर्देशों पर निर्भर था. इन नियमों के तहत प्रोफेसर के लिए मेडिकल लीव की अतिरिक्त गुंजाइश भी उपलब्ध थी.

अवकाश की गणना में भी मिली गंभीर विसंगति

हाईकोर्ट ने अर्जित अवकाश की गणना में भी गंभीर विसंगतियां पायीं. कॉलेज के जवाबी हलफनामे में अर्जित अवकाश 105 दिन बताया गया था, जबकि बाद में अदालत के समक्ष पेश दस्तावेजों में यह संख्या 119 दिन हो गयी. अदालत ने यह भी पाया कि कॉलेज ने सेवा अवधि के दौरान छुट्टियों में किये गये कार्य का रिकॉर्ड ही नहीं रखा, जबकि UGC के दिशा-निर्देशों के अनुसार यह अर्जित अवकाश की गणना का महत्वपूर्ण हिस्सा था. अदालत ने कहा कि 40 वर्षों की सेवा के आधार पर UGC के दिशा-निर्देशों के अनुसार अर्जित अवकाश 480 दिनों तक बनता है, जबकि पुराने नियम के आधार पर भी गणना अलग परिणाम देती है. हालांकि, रांची यूनिवर्सिटी 6 अगस्त 2021 से पहले सेवानिवृत्त शिक्षकों को अधिकतम 180 दिनों का अर्जित अवकाश भुगतान कर रही है. इसलिए डॉ. नवीन कुमार किसी भी स्थिति में 180 दिनों के लाभ के पात्र हैं.

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10 सप्ताह में भुगतान, देरी पर 7 प्रतिशत ब्याज

हाईकोर्ट ने रांची यूनिवर्सिटी के सात मई 2025 के आदेश और गॉस्नर कॉलेज के 11 अप्रैल 2025 के पत्र को रद्द कर दिया. अदालत ने निर्देश दिया कि डॉ. नवीन कुमार के अर्जित अवकाश खाते की कानून के अनुसार दोबारा गणना की जाए और पूरी देय राशि का भुगतान 10 सप्ताह के भीतर किया जाए. निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर उन्हें पात्रता की तारीख से वास्तविक भुगतान तक 7 प्रतिशत ब्याज देना होगा.

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By Rana pratap

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