इस खबर को रोम से फादर सुशील टोप्पो ने प्रभात खबर के लिए भेजा है.
कस्तेल गंदोल्फो, इटली. सृष्टि की देख-रेख के लिए विश्व प्रार्थना दिवस के अवसर पर संत पापा लियो ने विश्वासियों से पृथ्वी और पूरी सृष्टि की सुंदरता पर चिंतन करने और उसकी रक्षा की जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि अग्नि, वायु, जल, आकाश, पक्षियों और फूलों सहित पूरी सृष्टि सृष्टिकर्ता की महानता और प्रेम का संदेश देती है.
सृष्टि की मधुर आवाज को सुनें
संत पापा ने विश्वासियों से कहा कि वे रोजमर्रा की व्यस्त जिंदगी से कुछ समय निकालकर सृष्टि की मधुर आवाज को सुनें. इससे ईश्वर के साथ अपने संबंध को और गहरा करने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि सृष्टि पर चिंतन करना वास्तविक पारिस्थितिक परिवर्तन की दिशा में पहला कदम है.
पांच सप्ताह तक चलेगा सृष्टि का मौसम
संत पापा ने सृष्टि के मौसम की शुरुआत का उल्लेख करते हुए बताया कि यह पांच सप्ताह की अवधि है. इस दौरान साझा घर यानी पृथ्वी की देखभाल के लिए प्रार्थना और जागरूकता पर विशेष जोर दिया जाता है. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मानवता को सृष्टि के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझने की जरूरत है. प्रकृति के विनाश के बजाय उसके संरक्षण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए.
विनाश के साधनों को जीवन बचाने के साधन में बदलें
संत पापा लियो ने विनाश के साधनों को जीवन की रक्षा, गरीबों की देखभाल, भूखों को भोजन उपलब्ध कराने और पर्यावरण संरक्षण के साधनों में बदलने की अपील की. उन्होंने कहा कि पृथ्वी सभी का साझा घर है और इसकी रक्षा करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है. प्रकृति के प्रति संवेदनशील होकर ही आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और बेहतर दुनिया तैयार की जा सकती है.
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संत फ्रांसिस की आध्यात्मिकता अपनाने का आह्वान
सृष्टि के मौसम की यह अवधि चार अक्टूबर को असीसी के संत फ्रांसिस की 800वीं वर्षगांठ के अवसर पर समाप्त होगी. संत पापा ने विश्वासियों से संत फ्रांसिस की आध्यात्मिकता को अपनाने की अपील की.
उन्होंने वैश्विक भाईचारे और सृष्टि की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का आह्वान करते हुए कहा कि प्रकृति की देखभाल और मानवता की सेवा एक-दूसरे से जुड़ी हुई जिम्मेदारियां हैं.
