National Cancer Awareness Day: रांची के कई लोगों ने मजबूत इरादे और दृढ़ इच्छाशक्ति से दी कैंसर को मात

National Cancer Awareness Day: हर साल 7 नवंबर को राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस मनाया जाता है. कैंसर ऐसी बीमारी है जो मरीज के साथ पूरे परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ देती है. तो रांची में ऐसे ही कुछ लोग है, जो अपने मजबूत इरादे और दृृढ इच्छाशक्ति से कैंसर को भी मात दिया है.

National Cancer Awareness Day: कैंसर ऐसी बीमारी है जो मरीज के साथ पूरे परिवार को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ देती है. शुरू में पता चल जाये, तो उम्मीद रहती है, देर हो जाये तो डॉक्टर भी कुछ नहीं कर पाते. यह बात इसलिए हो रही है, क्योंकि आज राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस है. डॉक्टरों की सलाह है कि समय पर बीमारी पकड़ में आ जाये, तो इसका इलाज संभव हैं. राजधानी रांची में भी कई ऐसे लोग हैं, जिन्होंने अपने मजबूत इरादे और दृृढ इच्छाशक्ति से कैंसर को भी मात दे दिया है. कुछ ऐसे भी हैं, जो मजबूत इरादे के दम पर इस बीमारी के साथ जीना सीख चुके हैं. इन्हीं जज्बेवाले लोगों पर पेश है रिपोर्ट.

बीमारी नहीं, डर से चली जाती है जान : अजातशत्रु

हेहल, रातू रोड के ऋषि अजातशत्रु 19 सालों से ब्लड कैंसर के साथ जी रहे हैं. ऋषि ने कहा : लोग कैंसर के डर और चिंता से पहले ही जान गंवा देते हैं. धैर्य, हिम्मत और अनुशासित होकर इलाज करायें, तो लोग ठीक हो सकेंगे. ऋषि ने बताया कि 2003 में उन्हें अक्सर गैस की समस्या होती थी, शुरुआत में इसे अनदेखा किया. मुंबई में डॉक्टर को दिखाने पर पता चला कि शरीर में व्हाइट ब्लड सेल्स की संख्या पांच लाख के करीब पहुंच चुकी थी. आज नियमित प्राणायाम करता हूं. इस बीमारी के साथ जी रहा हूं.

मरने के डर को मन से हटाना होगा : रवि प्रकाश

पत्रकार रवि प्रकाश को जनवरी 2021 में लंग्स कैंसर होने की जानकारी मिली. कैंसर फोर्थ स्टेज पर पहुंच चुका था. उन्होंने कहा कि इस स्टेज पर व्यक्ति के पास दो विकल्प बचते हैं. बीमारी का इलाज कराते रहें, जिसमें खर्च ज्यादा है या फिर बीमारी के साथ जीना सीख जायें. वे कहते हैं : मुझे डॉक्टरों ने 18 माह का समय दिया था, पर अब पौने दो साल बीत चुके हैं. 30 कीमोथेरेपी ले चुका हूं. 18 नवंबर को एक और कीमोथेरेपी है. कोई भी शारीरिक समस्या तीन सप्ताह से अधिक रहे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.

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एक साल में ही खत्म हुआ कैंसर : सुशांत

कांके रोड के सुशांत कुमार ने कहा कि पिछले वर्ष नवंबर में जीभ पर छोटा-सा दाना हुआ था. शुरुआत इसे छाला समझ कर अनदेखा करता रहा. छह माह गुजर गये, लेकिन ठीक नहीं हुआ. मुंबई गया, तो कैंसर की जानकारी मिली. मेरे मामा जो डॉक्टर हैं, उनकी सलाह पर रांची में रहकर इलाज शुरू कराया. डॉक्टर ने शुरू में ही कह दिया था कि हिम्मत और सकारात्मक सोच के दम पर ही कैंसर से जीत सकेंगे. इसके बाद लगातार इलाज कराता रहा. अभी पूरी तरह स्वस्थ हूं.

ब्रेस्ट कैंसर को मात देकर जी रही हूं खुशहाल जिंदगी

हिंदपीढ़ी की रहनेवाली 62 वर्षीय रूकसाना खातून ब्रेस्ट कैंसर को मात देकर खुशहाल जीवन जी रही हैं. वह कहती हैं : वर्ष 2013 में पता चला कि ब्रेस्ट कैंसर है. कैंसर का नाम सुनते ही तनाव में आ गयी. फिर पूरे परिवार ने मेरा आत्मविश्वास बढ़ाया. उन्हीं के दम पर कैंसर से पांच साल तक लड़ी. सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन थेरेपी से गुजरना पड़ा. आज बिल्कुल ठीक हूं. मेरा मानना है कि यदि परिवार साथ रहे और खुद में जीने की इच्छा हो, तो किसी भी बीमारी को मात दिया जा सकता है.

कैंसर की चपेट में

  • देश में 2.67 करोड़ लोग कैंसर की चपेट में, 2025 तक यह आंकड़ा 2.98 करोड़ पहुंच सकता है

  • वर्ष 2021-22 में झारखंड की 1.21 लाख महिलाओं की स्क्रीनिंग की गई थी, जिसमें 195 संदिग्ध मिली थीं

  • राज्य की 0.5 प्रतिशत महिलाओं (30-49 साल ) को सर्वाइकल कैंसर की जांच से गुजरना पड़ा

मुंह और लंग्स कैंसर अधिक

अपने झारखंड की गिनती ऐसे राज्यों में होती है, जहां तंबाकू उत्पाद का सेवन ज्यादा होता है. तंबाकू उत्पाद खैनी,सिगरेट और बीड़ी के सेवन से लोग कैंसर जैसी बीमारी की चपेट में आ रहे हैं. एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट के अनुसार : राज्य में 0.2% फीसदी (30-49 साल ) लोगों को मुंह के कैंसर की स्क्रीनिंग करानी पड़ी है. इसमें ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के लोग समान हैं. राज्य में महिलाएं सबसे ज्यादा सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित हैं. एनएफएचएस-5 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य की 0.5 % महिलाओं (30-49 साल ) को सर्वाइकल कैंसर की जांच से गुजरना पड़ा. वहीं, ग्रामीण में 0.4% और शहरी क्षेत्र की 0.5% महिलाओं की जांच की गयी. 0.1 % महिलाओं को स्तन कैंसर की जांच करानी पड़ी.

अभी भी जाना पड़ता है महानगर

रिम्स में कैंसर विंग स्थापित है, लेकिन यहां मरीजों को बेहतर सुविधा नहीं मिल रही. कैंसर सर्जरी और रेडिएशन थेरेपी से इलाज की सुविधा है. मेडिकल ऑन्कोलॉजी विंग नहीं है. इसलिए राज्य के कैंसर रोगियों को इलाज के लिए महानगर जाना पड़ता है.

रांची कैंसर हॉस्पिटल से उम्मीद

कांके के सुकुरहुट्टू में राज्य सरकार और टाटा ट्रस्ट के अस्पताल रांची कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में ओपीडी सेवा शुरू हो गयी है. एक्सरे जांच और डे-केयर की सुविधा है.

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लेखक के बारे में

By Nutan kumari

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