रांची से सतीश सिंह की रिपोर्ट
झारखंड हाईकोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े एक मामले में आरोपी अमर मंडल को कोई राहत देने से इंकार कर दिया है. अदालत ने उनकी क्रिमिनल रिट याचिका और हस्तक्षेप याचिका को खारिज कर दिया है. इस मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने पहले ही अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे मंगलवार को सुनाया गया.
क्या था पूरा मामला?
अमर मंडल के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था. अमर मंडल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर ईडी द्वारा दर्ज किए गए ईसीआईआर और पूरी कार्यवाही को निरस्त करने की मांग की थी. याचिका में मुख्य तौर पर यह तर्क दिया गया था कि ईडी ने जिस मूल मामले को आधार बनाकर मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया है, उस मुख्य मामले में निचली अदालत से वह पहले ही बरी हो चुके हैं.
हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की
प्रार्थी के वकीलों ने पोरैयाहाट थाने में दर्ज उस मूल प्राथमिकी का हवाला दिया था, जिसके आधार पर ईडी ने जांच शुरू की थी. सुनवाई के दौरान प्रार्थी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के चर्चित 'विजय मदनलाल चौधरी' मामले के फैसले का हवाला दिया गया था.
दलील दी गयी थी कि जब मूल अपराध यानी प्रिडिकेट ऑफेंस में आरोपी को दोषमुक्त कर दिया गया है, तो उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में आगे कानूनी कार्रवाई जारी नहीं रखी जा सकती. हालांकि, झारखंड हाईकोर्ट ने प्रार्थी की इन दलीलों और तर्कों को स्वीकार नहीं किया और उनकी याचिका खारिज कर दी.
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