रांची: झारखंड पुलिस को माओवादी अभियान में अब तक की सबसे बड़ी सफलता मिली है. 2.20 करोड़ रुपए के ईनामी भाकपा (माओवादी) के इकलौते पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भास्कर को मंगलवार को धनबाद जिले के बरवड्डा थाना क्षेत्र के जंगल से गिरफ्तार कर लिया गया. उसके साथ रीजनल कमेटी सदस्य मेहनत उर्फ मोछू (15 लाख रुपये का ईनामी), एरिया कमेटी सदस्य गौरव उर्फ बीरेंद्र हांसदा और दो अन्य माओवादी भी पकड़े गए.
महीनों की रणनीति का नतीजा-डीजीपी
बुधवार (29 जुलाई) को पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में डीजीपी तदाशा मिश्र ने बताया कि 28 जुलाई को 'ऑपरेशन दौरा पहाड़' चलाया गया था.अभियान में धनबाद और गिरिडीह पुलिस के साथ कोबरा बटालियन के जवान शामिल थे. अभियान के दौरान माओवादियों के ठिकाने पर कार्रवाई कर पांचों को गिरफ्तार किया गया. उनके पास से तीन एके-47 राइफल, 8 मैगजीन और 288 जिंदा कारतूस बरामद किए गए. डीजीपी ने इसे झारखंड पुलिस की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह सफलता महीनों की योजनाबद्ध रणनीति और लगातार चलाए जा रहे अभियान का परिणाम है.
'बेसरा की गिरफ्तारी 'कमांड एंड कंट्रोल' तंत्र पर सीधा प्रहार'
उन्होंने बताया कि इससे पहले 21 मई को 27 नक्सलियों ने सामूहिक आत्मसमर्पण किया था. इसके बाद 13 जुलाई को 20 लाख रुपए का ईनामी रवींद्र गंझू और 17 जुलाई को 25 लाख रुपए का ईनामी अजय महतो उर्फ टाइगर गिरफ्तार किया गया. वहीं 28 जुलाई को ही 16 अन्य नक्सलियों ने हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया. पिछले दो महीनों में 43 नक्सलियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. आईजी अभियान नरेंद्र सिंह ने कहा कि मिसिर बेसरा की गिरफ्तारी माओवादी संगठन के 'कमांड एंड कंट्रोल' तंत्र पर सीधा प्रहार है. आईजी ने बताया कि मिसिर बेसरा पिछले तीन दशकों से झारखंड, बिहार और ओडिशा में माओवादी नेटवर्क को संचालित कर रहा था. वहीं, डीजीपी के अनुसार अब सिर्फ असीम ही पुलिस की पकड़ से बाहर है.
हाल की बड़ी कार्रवाई
-21 मईः 27 नक्सलियों का सामूहिक आत्मसमर्पण, 18 हथियार और 2,987 कारतूस बरामद.
-13 जुलाई: 20 लाख का इनामी रवींद्र गंझू गिरफ्तार.
-17 जुलाई: 25 लाख रुपये का ईनामी अजय महतो उर्फ टाइगर गिरफ्तार, एसीएम बबिता उर्फ अनिता किस्कू ने आत्मसमर्पण किया.
-28 जुलाईः 16 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, 115 हथियार और 1,562 कारतूस बरामद.
-29 जुलाई: 2.20 करोड़ का ईनामी पोलित ब्यूरो 1 सदस्य मिसिर गिरफ्तार.
विद्यार्थी जीवन से लेकर नक्सल बनने तक का सफर
गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखंड के मदनाडीह गांव निवासी दर्पण बेसरा और रसोमति देवी के पुत्र मिसिर बेसरा ने सामान्य ग्रामीण परिवेश से निकलकर उच्च शिक्षा हासिल की, लेकिन बाद में नक्सलवाद का रास्ता चुन लिया. पुलिस के अनुसार, धनबाद सीमा से सटे इस गांव के रहनेवाले मिसिर ने धनबाद के पीके रॉय मेमोरियल कॉलेज से एमए की पढ़ाई पूरी की, हालांकि डिग्री प्राप्त नहीं कर सका. इससे पहले उसने कतरास कॉलेज से वर्ष 1986 में स्नातक की पढ़ाई की.
प्रारंभिक शिक्षा हरलाडीह स्कूल में हुई, जबकि मैट्रिक और इंटरमीडिएट की पढ़ाई राजगंज हाइ स्कूल से पूरी की. पढ़ाई के दौरान ही वह तत्कालीन एमसीसी नेता प्रशांत बोस उर्फ किशन दा के संपर्क में आया और उनके विचारों से प्रभावित होकर संगठन की अग्रिम ईकाइयों की बैठकों में भाग लेने लगा. वर्ष 1985 में सिंदरी में आयोजित ऑल इंडिया लीग फॉर रिवोल्यूशनरी कल्चर के दूसरे राष्ट्रीय सम्मेलन में उसने वालंटियर के रूप में भी काम किया.
रांची से धनबाद ले जाए गए मिसिर समेत 5 नक्सली
ऑपरेशन 'दौरा पहाड़' के तहत धनबाद और गिरिडीह पुलिस और 209 कोबरा बटालियन की संयुक्त कार्रवाई में गिरफ्तार भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य एवं 2.20 करोड़ रुपये के नक्सली मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भास्कर उर्फ सुर्निमल समेत 5 नक्सलियों को बुधवार यानी 29 जुलाई को कड़ी सुरक्षा के बीच रांची से धनबाद ले जाया गया. जहां सभी को मेडिकल जांच के बाद जेल भेज दिया गया. बेसरा के साथ 15 लाख के इनामी नक्सली मेहनत उर्फ मोछू उर्फ विभीषण (आरसीएम), गौरव उर्फ बिरेंद्र हांसदा उर्फ सौरम (एसीएम) और उसके दो अन्य सहयोगी भी जेल भेजे गए.
