रांची से विपिन सिंह की रिपोर्ट
Pinarayi Vijayan, रांची: मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) पोलित ब्यूरो सदस्य एवं विपक्ष के नेता पिनराई विजयन के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को लेकर झारखंड में सियासी पारा चढ़ गया है. वामदलों ने संयुक्त रूप से आरोप लगाया है कि यह पूरी कार्रवाई पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से की गई है. इसके विरोध में वामदलों ने 29 मई से 1 जून के बीच राष्ट्रव्यापी विरोध अभियान चलाने का बड़ा ऐलान किया है.
विजयन के घर छापेमारी बदले की कार्रवाई : लेफ्ट
वामदलों ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पिनराई विजयन के आवास पर की गई छापेमारी पूरी तरह से राजनीतिक बदले की कार्रवाई का हिस्सा है. उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को यह भ्रम पालना छोड़ देना चाहिए कि वह ऐसी दमनकारी कार्रवाइयों के जरिए पिनराई विजयन, उनके जनआंदोलनों या वामपंथ की विचारधारा को कमजोर कर सकती है.
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विरोधियों को चौतरफा खत्म करना केंद्र की नीति: वामदल
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम और जारी प्रेस विज्ञप्ति में एक बेहद चौंकाने वाला और अजीबोगरीब वाकया सामने आया है. दरअसल, केंद्र सरकार और ईडी की इस कार्रवाई के खिलाफ माकपा के राज्य सचिव प्रकाश विप्लव और (दस्तावेजों के अनुसार) भाजपा के राज्य सचिव महेंद्र पाठक के नाम से संयुक्त बयान जारी हुआ है. इस संयुक्त बयान में कहा गया है कि पिछले कुछ वर्षों से राजनीतिक विरोधियों को चौतरफा खत्म करने और डराने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों को हथियार बनाना केंद्र सरकार की स्थायी नीतिगत प्रवृत्ति बन चुकी है.
वामदल ने जारी किया बीजेपी में जाने वाले नेताओं का विस्तृत लिस्ट
वामदलों ने इस दौरान देशभर के उन प्रमुख नेताओं की एक विस्तृत लिस्ट भी जारी की, जो कभी केंद्रीय एजेंसियों की रडार पर थे और बाद में भाजपा में शामिल हो गए. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि देश की जनता ने खुली आंखों से देखा है कि कैसे केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई का सामना कर रहे कई बड़े कांग्रेस के नेता अचानक भाजपा में शामिल होकर ‘राजनीतिक शरण’ लेते रहे हैं. विज्ञप्ति में उदाहरण देते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, पश्चिम बंगाल के शुभेंदु अधिकारी, महाराष्ट्र के पूर्व सीएम अशोक चव्हाण, उद्योगपति नवीन जिंदल, पंजाब के पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और गोवा के दिगंबर कामत का नाम लिया गया. वामदलों का दावा है कि केंद्रीय एजेंसियों के शिकंजे में आए लगभग सभी प्रमुख विपक्षी नेता अब भाजपा का दामन थाम चुके हैं.
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