उत्तराखंड में फंसे मंजदूरों को एयरलिफ्ट कर लाया जा रहा है रांची, जानें कब पहुंचेंगे झारखंड

इंडिगो की फ्लाइट से ये सभी लोग शाम 8 बजे रांची पहुंचेंगे. बता दें कि टनल हादसे के तुरंत बाद राज्य सरकार ने तत्परता दिखाते हुए एक टीम को अपने लोगों की सलामती का पता लगाने के लिए घटनास्थल पर भेजा था.

उत्तराखंड के सिल्कियारा टनल में जीवन और मौत से संघर्ष के बाद बाहर निकले झारखंड के सभी श्रमिकों के परिजनों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है. ये सभी लोग अपने घर लौट रहे हैं. जी हां. उत्तराखंड में मजदूरी करने गए जो लोग टनल में 17 दिनों तक फंसे रहे थे, उनकी सुरक्षित अपने घर वापसी हो रही है. हेमंत सोरेन सरकार इन सभी लोगों को एयरलिफ्ट कर रांची ला रही है. इसके लिए बाकायदा अधिकारियों की एक टीम की तैनाती कर दी गई है. बता दें कि उत्तराखंड के उत्तरकाशी स्थित सिल्कियारा टनल में 17 दिनों तक विपरीत परिस्थितयों में रहने के बाद सुरक्षित बाहर निकाले गए झारखंड के 15 मजदूरों को एयरलिफ्ट कर शुक्रवार (1 दिसंबर) को रांची लाया जाएगा. इनसे मिलने के लिए उत्तराखंड गए 12 परिजन भी इंडिगो एयरलाइंस के विमान से रांची लौटेंगे. मजदूरों की सकुशल वापसी के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर जैप आईटी सीईओ भुवनेश्वर प्रताप सिंह के नेतृत्व में श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के दो पदाधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है. ये लोग गुरुवार को ही उत्तराखंड से दिल्ली पहुंच जाएंगे. वहां से रांची के लिए रवाना होंगे. इंडिगो की फ्लाइट से ये सभी लोग शाम 8 बजे रांची पहुंचेंगे. बता दें कि टनल हादसे के तुरंत बाद राज्य सरकार ने तत्परता दिखाते हुए एक टीम को अपने लोगों की सलामती का पता लगाने के लिए घटनास्थल पर भेजा था.

सिल्कियारा टनल में 17 दिन तक फंसे थे 41 श्रमिक

ये मजदूर दीपावली के दिन से उत्तराखंड के निर्माणाधीन सिल्कियारा टनल में फंसे थे. काम के दौरान टनल धंस गया और उसमें काम कर रहे 41 कामगार दूसरी ओर फंस गए. इन्हें निकालने के लिए 17 दिन तक मशक्कत करनी पड़ी. अमेरिका से एक्सपर्ट बुलाए गए. अमेरिकी ऑगर मशीन वायुसेना के विमान से उत्तराखंड लाया गया. हालांकि, अमेरिकी मशीन के ब्लेड टूट गए. इसके बाद टनल के ऊपर से वर्टिकल होल करके मजदूरों को निकालने के बारे में विचार किया गया. होल करना शुरू भी कर दिया गया था, लेकिन इसी बीच किसी ने रैट माइनिंग तकनीक अपनाने की सलाह दी. इसके बाद कामगारों ने काम करना शुरू किया और बहुत जल्दी ही टनल में मलबे के उस पार फंसे सभी श्रमिकों को सुरक्षित निकाल लिया.

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श्रमिकों के लौटने का परिजनों को बेसब्री से है इंतजार

झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार ने पहले ही घोषणा कर रखी थी कि जैसे ही श्रमिकों को टनल से बाहर निकाला जाएगा, हम अपने राज्य के सभी 15 श्रमिकों को एयरलिफ्ट कर जल्द से जल्द रांची लाएंगे. टनल से श्रमिकों को निकालने जाने के बाद उनकी मेडिकल जांच की गई. फिर उन्हें ऋषिकेश के एम्स में भर्ती कराया गया. यहां जांच के बाद डॉक्टरों ने जब श्रमिकों को पूरी तरह फिट घोषित कर दिया गया, तो झारखंड सरकार के सीनियर अधिकारी उन्हें लेकर दिल्ली रवाना हो गए. अब कल ये सभी श्रमिक अपने गृह राज्य झारखंड लौट आएंगे. शाम को रांची पहुंचेंगे और उसके बाद सभी को उनके घर भेज दिया जाएगा. इन श्रमिकों के परिजन बेसब्री से उनके लौटने का इंतजार कर रहे हैं.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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