आखिरी सांस लेने से पहले माओवादी नेता किशन दा का आखिरी खत, मिसिर बेसरा को भेजा था संदेश

Kishan Da Last Letter: माओवादी नेता किशन दा उर्फ प्रशांत बोस की मौत से पहले लिखे कथित आखिरी खत ने संगठन के भीतर हलचल मचा दी है. खत में सशस्त्र संघर्ष की कठिनाइयों और बदलते हालात पर गंभीर मंथन की सलाह दी गई है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

Kishan Da Last Letter: झारखंड में प्रतिबंधित माओवादी संगठन सीपीआई (एम) के पोलित ब्यूरो के बड़े नेता और एक करोड़ के ईनामी प्रशांत बोस उर्फ किशन दा का 3 अप्रैल 2026 को रांची की होटवार जेल में निधन हो गया. आखिरी सांस लेने से पहले उन्होंने कथित तौर पर आखिरी खत अपने सबसे चहेते मिसिर बेसरा को लिखा था. इस खत में उन्होंने कहा था कि वर्तमान समय में सशस्त्र आंदोलन चलना अब संभव नहीं है. इसलिए संगठन को इस बारे में सोचना चाहिए. इसकी एक प्रति प्रभात खबर के पास भी है, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती है कि यह खत उन्होंने ही लिखी थी.

सशस्त्र क्रांति काफी कठिन

किशन दा ने अपने आखिरी खत में मिसिर बेसरा को संबोधित करते हुए लिखते हैं, ‘उम्मीद है कि आप तो बड़ी दिक्कतों में दिन गुजारते होंगे. ये बात सही है कि मौजूदा डोमेस्टिक सिचुएशन काफी जटिल हो गया है और स्थिति काफी गंभीर है.’ उन्होंने लिखा है, ‘आप देख ही रहे हैं कि सशस्त्र क्रांति को लगातार आगे बढ़ाकर ले जाना निकट भविष्य में काफी कठिन है.’

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सशस्त्र संघर्ष पर गंभीरता से सोचने की सलाह

उन्होंने अपने खत में आगे लिखा है, ‘सीआरबी, ईआरबी आदि स्थानों के पार्टी के गंभीर नुकसानों के बारे में भी आप वाकिफ होंगे. अभी ऐसी स्थिति में मैं आपके पास बतौर एक सलाह के तौर पर कह रहा हूं कि सशस्त्र संघर्ष को सही मायने में क्या आगे बढ़ाकर ले जाना संभव है? ये सोचने का आग्रह कर रहा हूं. मेरे विचार से आप लोगों को गंभीर रूप से इस मुद्दे पर सोचना चाहिए.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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