संजीव सिंह, रांची. नयी शिक्षा नीति के तहत डिजाइन किये गये नये कोर्स को लेकर झारखंड के उच्च शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों को दक्ष करने के लिए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय नयी दिल्ली ने एनआइटी पटना के सहयोग से झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (जेयूटी) को जिम्मेवारी दी है. इसके लिए केंद्र ने एनआइटी को झारखंड सहित ओडिशा, बंगाल और बिहार के लिए रीजनल सेंटर बनाया है. केंद्र के निर्देश पर एनआइटी पटना के सहयोग से झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (. इसके लिए पिछले दिनों जेयूटी व एनआइटी के बीच एमओयू भी किया गया. इसके तहत राज्य के इंजीनियरिंग कॉलेज, पॉलिटेक्निक कॉलेजों के शिक्षकों सहित जेयूटी तथा राज्य के अन्य विवि में चल रहे बीसीए, आइटी, एमसीए, इलेक्ट्रॉनिक्स कोर्स संचालित करनेवाले संस्थानों के शिक्षकों, स्नातकोत्तर के विद्यार्थियों तथा शोधार्थियों को हाइब्रिड मोड पर अलग-अलग प्रशिक्षण दिये जायेंगे तथा उन्हें जागरूक किया जायेगा. प्रशिक्षण की अवधि न्यूनतम 40-40 घंटे की होगी. जो पांच वर्ष तक चलेगा. इन शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिग डेटा साइंस, आइओटी (ऑटोमेशन), 5जी कम्युनिकेशन, वीएलएसआइ (वेरी लार्ज स्केल इंटीग्रेशन), ब्लॉक चेन आदि का प्रशिक्षण दिया जायेगा. जेयूटी के स्टेटिस्टिक लैब का होगा उपयोग इस एमओयू के तहत झारखंड यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (जेयूटी) द्वारा शिक्षकों को सांख्यिकी विषय का ज्ञान दिया जायेगा. इसके लिए जेयूटी के लैब का उपयोग होगा. जेयूटी के कुलपति प्रो डीके सिंह के अनुसार इस लैब में शिक्षकों को एडवांस स्केल, पैथन प्रोग्रामिंक, आर प्रोग्राम के तहत प्रशिक्षण दिया जायेगा. प्रशिक्षण हाइब्रीड मोड पर चलेगा. इंजीनियरिंग, पॉलिटेक्निक, एमसीए आदि कोर्स के शिक्षकों व शोधार्थियों के लिए अलग-अलग प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाये जायेंगे. सारा खर्च केंद्र उठायेगा फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम का सारा खर्च केंद्र उठायेगा. राशि सीधे एनआइटी को उपलब्ध करायी जायेगी. एनआइटी द्वारा देश-विदेश के एकेडमिक विशेषज्ञ व उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ उपलब्ध कराये जायेंगे. जेयूटी के प्रशिक्षण कार्यक्रम से संबंधित प्रस्ताव तैयार कर एनआइटी को भेजना होगा.
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