'हेमंत सोरेन बड़े भाई... निकालेंगे आभार यात्रा', जानें CM आवास घेराव पर छात्रों ने क्या कहा?

जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं में सुधार को लेकर रांची में छात्रों का आंदोलन 23वें दिन भी जारी है. छात्र मुख्यमंत्री आवास घेराव और इस्तीफे की मांग के बीच पारदर्शिता और ठोस समाधान पर जोर दे रहे हैं. जानें आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें क्या हैं.


रांची से अभिषेक आनंद की रिपोर्ट

JPSC Student Protest: झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी की परीक्षाओं में सुधार, कथित अनियमितताओं की जांच और लंबित मांगों को लेकर छात्रों का आंदोलन 23वें दिन भी जारी है. रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम में जुटे अभ्यर्थियों के बीच मुख्यमंत्री आवास के घेराव और मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर चर्चा तेज है. हालांकि, आंदोलन से जुड़े कई अभ्यर्थियों ने साफ कहा है कि वे सरकार गिराने या टकराव करने नहीं आए हैं. उनकी प्राथमिकता पढ़ाई और नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता है.

सीएम पर भरोसा, बातचीत ही समाधान: राजेश

जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच से जुड़े अभ्यर्थी राजेश ने कहा कि छात्रों को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर भरोसा है. उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील करते हुए कहा कि सरकार छात्रों के साथ संवाद करे और उनकी मांगों पर ठोस निर्णय ले. उनके अनुसार पिछले 23 दिनों से आंदोलन चल रहा है और जैसे-जैसे समय बीत रहा है, छात्रों में निराशा बढ़ रही है.

तिरंगा यात्रा निकाल छात्रों ने दिया एकजुटता का संदेश

राजेश ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर छात्रों ने तिरंगा यात्रा निकालकर सरकार के सामने अपनी एकजुटता का संदेश दिया था. उन्होंने कहा कि छात्र किसी तरह का गलत कदम नहीं उठाना चाहते. यदि मुख्यमंत्री छात्रों से बातचीत करते हैं और उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेते हैं, तो मुख्यमंत्री के सम्मान में छात्र विशाल मार्च निकाल सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले चुनाव में छात्र मुख्यमंत्री के साथ खड़े होने की बात भी कह सकते हैं.


जांच एजेंसियों ने खुद उजागर किए सीजीएल के तथ्य

जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को रद्द करने की मांग पर राजेश ने कहा कि छात्रों की मांग किसी पूर्वाग्रह पर आधारित नहीं है. उनके अनुसार परीक्षा से जुड़े नेपाल एंगल, अभय तिवारी प्रकरण और अन्य तथ्य जांच एजेंसियों की जांच में सामने आए हैं. उन्होंने कहा कि जब जांच एजेंसियों ने ही तथ्यों को उजागर किया है, तो परीक्षा रद्द करने की मांग को गलत नहीं कहा जा सकता. उन्होंने कहा कि यदि कोई तथ्य सामने ही नहीं आया होता और छात्र परीक्षा रद्द करने की मांग करते, तब उनकी मांग पर सवाल उठता. लेकिन जब जांच में तथ्य सामने आए हैं, तो सरकार को छात्रों के हित में निर्णय लेना चाहिए.

सीएम का इस्तीफा नहीं, ठोस समाधान चाहिए: प्रेम कुमार

11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा से जुड़े याचिकाकर्ता और जेपीएससी-जेएसएससी न्याय मंच के सदस्य प्रेम कुमार ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के स्वतंत्रता दिवस संबोधन का उल्लेख करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने छात्रों के मुद्दों पर संवेदनशीलता दिखाई है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के भाषण में छात्रों और परीक्षा सुधार को लेकर काफी समय दिया गया. प्रेम कुमार ने स्पष्ट कहा कि छात्र मुख्यमंत्री का इस्तीफा नहीं चाहते. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का इस्तीफा लेने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा. यदि व्यवस्था में अधिकारी स्तर पर गड़बड़ी है, तो सरकार बदलने के बावजूद वही समस्या दोबारा सामने आ सकती है. इसलिए छात्रों की मांग किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यवस्था में ठोस सुधार की है.

सीबीआई जांच या परीक्षा रद्द करने की मांग पर फैसला हो

प्रेम कुमार ने कहा कि जेपीएससी और जेएसएससी से जुड़े दो प्रमुख मुद्दों पर सरकार को ठोस पहल करनी चाहिए. इनमें जेएसएससी सीजीएल और अन्य विवादित परीक्षाओं को लेकर सीबीआई जांच या परीक्षा रद्द करने की मांग शामिल है. उन्होंने कहा कि यदि इन मुद्दों पर सरकार पहल करती है, तो मुख्यमंत्री आवास के घेराव जैसे प्रस्तावित कार्यक्रमों को टाला जा सकता है. उन्होंने सरकार से तत्काल कुछ छोटी लेकिन महत्वपूर्ण मांगें पूरी करने की अपील की. इनमें जेपीएससी की कॉपियां दिखाना, जेएसएससी का स्कोर कार्ड उपलब्ध कराना और कटऑफ जारी करना शामिल है. उन्होंने सरकार से एक श्वेत पत्र जारी कर यह स्पष्ट करने की भी मांग की कि छात्रों की कौन-कौन सी मांगें स्वीकार की गई हैं.

2000 और 300 पदों पर नई भर्ती की मांग

प्रेम कुमार ने कहा कि छात्रों का एक बड़ा नुकसान यह हुआ है कि कथित पेपर लीक की वजह से उन्हें एक अवसर गंवाना पड़ा. ऐसे में सरकार को कम से कम 2000 पदों के लिए जेएसएससी सीजीएल की नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए. इससे छात्रों को दोबारा तैयारी और परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलेगा. उन्होंने जेपीएससी में भी कम से कम 300 पदों पर अधियाचना निकालने और अभ्यर्थियों को उम्र सीमा में छूट देने की मांग की. उनका कहना है कि सरकार ऐसी पहल करती है तो छात्र आंदोलन छोड़कर दोबारा पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी में लौट सकते हैं.

मुख्यमंत्री बड़े भाई, इस्तीफा समाधान नहीं: रामवतार

अभ्यर्थी रामवतार ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग को समाधान नहीं माना. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री छात्रों के लिए बड़े भाई की तरह हैं और उन्हें पूरा विश्वास है कि छात्रों के साथ गलत नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से छात्रों के साथ तीन बैठकें हो चुकी हैं और कई मांगों पर सहमति भी बनी थी. कुछ मांगों को लेकर सरकार ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर होने की बात कही और विचार-विमर्श के लिए समय मांगा था. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कोचिंग माफिया के कारण बातचीत की प्रक्रिया प्रभावित हुई.

आंदोलन में बाहरी तत्वों के प्रवेश का आरोप

रामवतार ने कहा कि छात्रों का आंदोलन छात्रों को ही चलाने देना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ऐसे लोग आंदोलन में शामिल हो रहे हैं जो छात्रों को भड़काने या आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं. उनका कहना है कि आंदोलन खत्म होने के बाद ऐसे लोगों की भूमिका की भी जांच कराई जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि छात्र शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी मांग रख रहे हैं. छात्रों का उद्देश्य मारपीट करना या सरकार गिराना नहीं है.

छात्र तलवार नहीं, कलम उठाने वाले हैं: रवि

अभ्यर्थी रवि ने भी कहा कि छात्रों को भड़काने की कोशिश हो रही है, लेकिन छात्र किसी हिंसक गतिविधि के लिए आंदोलन नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि छात्र पढ़ाई करने वाले हैं और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने में विश्वास करते हैं. रवि ने मुख्यमंत्री से जेएसएससी सीजीएल और 11वीं से 13वीं जेपीएससी परीक्षा के मामले में या तो परीक्षा रद्द करने अथवा सीबीआई जांच कराने की मांग दोहराई. उन्होंने सरकार से दोबारा प्रतिनिधिमंडल बुलाकर बातचीत शुरू करने की अपील की. साथ ही टीजीटी, पीजीटी, आशुलिपिक और एलडीसी समेत अन्य मांगों पर भी स्पष्ट निर्णय लेने की बात कही.

23 दिन बाद छात्रों की अपील, संवाद का रास्ता फिर खुले

लगातार 23 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि बारिश, धूप और गर्मी के बीच आंदोलन जारी रखना उनके लिए मुश्किल होता जा रहा है. भोजन-पानी की परेशानी भी सामने आने लगी है और कई छात्र थकान तथा स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे हैं. छात्रों का कहना है कि उन्हें आंदोलन में समय गंवाने के बजाय पढ़ाई करनी चाहिए.

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छात्रों ने सरकार से की दोबारा बातचीत की अपील

अभ्यर्थियों ने सरकार से दोबारा बातचीत शुरू करने की अपील करते हुए कहा कि यदि उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस पहल होती है, तो मुख्यमंत्री आवास घेराव जैसे कार्यक्रमों को टाला जा सकता है. उनका कहना है कि सरकार यदि छात्रों के हित में निर्णय लेती है, तो वे आंदोलन समाप्त कर पढ़ाई में लौटेंगे और मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताने के लिए आभार यात्रा भी निकालेंगे. आखिरकार, छात्रों को सड़क पर स्थायी सदस्यता नहीं चाहिए, नौकरी की परीक्षा चाहिए.

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लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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