JPSC Student Protest: आईसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने छात्रों के आंदोलन को दिया समर्थन, CBI जांच की उठाई मांग

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने रांची में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर आंदोलन कर रहे छात्रों का समर्थन किया है. उन्होंने परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच के लिए CBI जांच की मांग की है.


रांची से अरविंद कुमार सिंह की रिपोर्ट

JPSC Student Protest: झारखंड की राजधानी रांची स्थित जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन को शुक्रवार को एक और बड़ा समर्थन मिला. आईसा (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचीं और आंदोलनरत छात्रों के प्रति एकजुटता जताई. उन्होंने कहा कि छात्र अपने भविष्य और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की लड़ाई लड़ रहे हैं और आईसा पूरी मजबूती के साथ उनके साथ खड़ी है.

छात्रों के संघर्ष को बताया न्याय की लड़ाई

नेहा बोरा ने कहा कि झारखंड के छात्र लंबे समय से निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था की मांग कर रहे हैं. यह केवल किसी एक परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य का सवाल है. उन्होंने कहा कि संघर्ष कर रहे सभी छात्रों को वह अपना समर्थन देती हैं और यह आंदोलन न्याय की लड़ाई है.

JPSC और JSSC मामलों की CBI जांच की मांग

आईसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा कि JPSC और JSSC से जुड़े विवादों की निष्पक्ष जांच के लिए मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जानी चाहिए. उनका कहना था कि जब तक पूरे मामले की स्वतंत्र जांच नहीं होगी, तब तक अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल नहीं हो सकेगा. उन्होंने आरोप लगाया कि भर्ती परीक्षाओं में लगातार उठ रहे सवालों ने युवाओं का विश्वास कमजोर किया है.

JPSC पीटी परीक्षा रद्द कर नई तिथि घोषित करने की मांग

नेहा बोरा ने मांग की कि विवादों में घिरी JPSC पीटी परीक्षा को रद्द किया जाए और नई परीक्षा तिथि जल्द घोषित की जाए. उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी है कि अभ्यर्थियों को पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो.

JSSC CGL परीक्षा भी रद्द कर जल्द कराई जाए

उन्होंने JSSC CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ियों का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि परीक्षा प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं तो उसे भी रद्द किया जाना चाहिए. साथ ही सरकार को जल्द नई परीक्षा आयोजित करनी चाहिए, ताकि युवाओं का समय और भविष्य दोनों सुरक्षित रह सके.

निजी एजेंसियों पर उठाए सवाल

नेहा बोरा ने परीक्षा आयोजन में निजी एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि जिन एजेंसियों को कई राज्यों में ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है, उनसे परीक्षाएं कराना बेहद चिंताजनक है. ऐसी एजेंसियां देश के युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही हैं. उन्होंने मांग की कि भर्ती परीक्षाओं का आयोजन पूरी तरह सरकारी व्यवस्था के माध्यम से कराया जाए.

भ्रष्टाचार पर सरकार की जवाबदेही तय हो

आईसा नेता ने कहा कि किसी भी परीक्षा में भ्रष्टाचार या अनियमितता सामने आती है तो उसकी सीधी जवाबदेही सरकार की होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि निजी एजेंसियों के पीछे छिपने के बजाय सरकार को स्वयं भर्ती प्रक्रिया की जिम्मेदारी लेनी होगी. उन्होंने आरोप लगाया कि निजी एजेंसियां बीच में आकर देश के भविष्य को बेचने का काम कर रही हैं, इसलिए ऐसी एजेंसियों को परीक्षा प्रक्रिया से बाहर किया जाना चाहिए.

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छात्रों के आंदोलन को जारी रखने की अपील

नेहा बोरा ने कहा कि आईसा इस महीने से छात्रों की इन सभी मांगों के समर्थन में अभियान चलाएगी. उन्होंने आंदोलनरत युवाओं की सराहना करते हुए कहा कि पूरे देश के छात्र झारखंड के इस आंदोलन से प्रेरणा ले रहे हैं. उन्होंने छात्रों से लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद रखने तथा झारखंड के युवाओं के अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का आह्वान किया.

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लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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