JPSC घोटाला: OMR में भरे सिर्फ 19 गोले, मिल गये 88 अंक और हो गया चयन

जेपीएससी की दूसरी सिविल सेवा परीक्षा में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ है. सीबीआई जांच में ओएमआर शीट में धांधली और तय संख्या से अधिक उम्मीदवारों को सफल घोषित करने जैसे चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. जानिए कैसे परीक्षार्थियों को अनुचित लाभ मिला.

रांची से पंकज त्रिपाठी की रिपोर्ट

अलग झारखंड राज्य बना तो हर ओर खुशी की लहर थी. लोगों को लगा कि अब अपनी सरकार होगी, रोजी, रोजगार मिलेगा, बिहार सरकार झारखंड से सौतेला व्यवहार करती थी, राज्य विकास के पथ पर सरपट दौड़ने लगेगा. पर जैसे संसाधनों में बिहार से राज्य को कई चीजें मिली, वैसे ही शायद उस समय होनेवाले बड़े भ्रष्टाचार का भी कुछ अंश राज्य को स्वत:स्फूर्त बन गया. तीन-चार साल में ही यह सब दिखने लगा. पर सबसे बड़ा नुकसान झारखंड के छात्रों को होना शुरू हुआ जो अब भी बदस्तूर जारी है. नौकरी मिल नहीं रही, जिन्हें मिली है वह कितनी सही है, इस पर सवाल है.

सीबीआइ जांच में सामने आईं चौंकाने वाली गड़बड़ियां

सीबीआइ ने दूसरी सिविल सेवा परीक्षा की कॉपियों की जांच कर जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें साफ है कि किस प्रकार ओएमआर शीट में गड़बड़ी की गयी. सीबीआइ ने बताया है कि शीट में जिन लोगों ने कम गोले भरे, उन्हें भी भरपूर अंक दिया गया. गोपला सिंह जो जेपीएससी के तत्कालीन सदस्य थे, उनके बेटे कुंदन कुमार सिंह ने ओएमआर में सिर्फ 19 गोले भरे थे, लेकिन रिजल्ट में उन्हें 88 अंक दे दिये गये. अंत में वह चयनित भी हुए. ऐसा ही कई कॉपियों में पाया गया. ऐसे में यह तय है कि जिन्हें नौकरी मिल गयी है, वह भी अब बचेगी या नहीं यह सवालों के घेरे में है.

सीआइडी की जांच के बाद अब अधिकांश भर्तियां सीबीआइ या सीआइडी की जांच की जद में आ गयी हैं. जेपीएससी चेयरमैन इस्तीफा दे चुके हैं पर जांच चल रही है, परीक्षा नियंत्रक को गड़बड़ी के आरोप में जेल भेजा जा चुका है. जेपीएससी दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा विवाद की जांच अब भी चल रही है. सीबीआइ ने जांच कर एक रिपोर्ट सौंपी है, दूसरी आनी बाकी है. रिपोर्ट में स्पष्ट गड़बड़ियां सामने आयी हैं. पर जांच अभी चल रही है, इसलिए चयनित बीडीओ, सीओ, डीएसपी, कमांडेट, वाणिज्यकर अधिकारी जैसे पदों पर आराम से काम कर रहे हैं.

अब जांच में गड़बड़ियां उजागर हो रही हैं. एक तथ्य यह भी है कि सीबीआइ ने नेताओं से जुड़े अभ्यर्थियों के नाम तो उजागर किये, जेपीएससी में कार्यरत लोगों के रिश्तेदारों को भी ढूंढ़ लिया, लेकिन किन बड़े अफसरों की पैरवी पर किन लोगों की नियुक्तियां हुई, इसकी कभी जांच ही नहीं हुई.

तय संख्या से ज्यादा सफल उम्मीदवार घोषित किये गये

सीबीआइ ने जांच कर बताया है कि प्रारंभिक, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में स्पष्ट अनियमितताएं मिली हैं. परीक्षा की कॉपियों में जो गड़बड़ी की वह अपनी जगह हैं, सबसे बड़ी बात नियमों का उल्लंघन कर तय संख्या से अधिक संख्या में उम्मीदवारों को सफल घोषित कर दिया गया. जेपीएससी की दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा (2004) में 172 पदों के लिए परीक्षा हुई. प्रारंभिक परीक्षा में नियमानुसार 1,720 अभ्यर्थी सफल होने चाहिए थे, लेकिन आयोग ने 16,314 को सफल घोषित कर दिया. मुख्य परीक्षा में भी नियमानुसार अधिकतम 516 सफल होने चाहिए थे, पर 804 घोषित किये गये.

ओएमआर में किसने कितने गोले भरे, कितना अंक मिला

कुंदन कुमार सिंह : गोपाल सिंह के बेटे, ओएमआर में सिर्फ 19 गोले भरे थे पर उन्हें 88 अंक दिये गये.

मौसमी नागेश : नागेश की बेटी, ओएमआर में 50 गोले भरे पर 69 अंक दर्ज, सामान्य अध्ययन में 55 अंक बढ़ाये गये.

कानू राम नाग : प्रकाश कुमार, संगीता कुमारी, रजनीश कुमार, शिवेंद्र, सभी ने ओएमआर में जितने गोले भरे, उससे काफी अधिक अंक उन्हें दे दिये गये.

मूल्यांकनकर्ता प्रोफेसर ने स्वीकारा, हां अभ्यर्थियों के नंबर बढ़ाये थे

एमजी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के प्रोफेसर/मूल्यांकनकर्ता ने Court में यह स्वीकार किया कि हां उन्होंने अभ्यर्थियों के नंबर बढ़ाये थे. परमानंद सिंह व अरविंद कुमार सिंह के दबाव में उन्होंने ऐसा किया था.

ओएमआर स्कैनिंग मशीन में मेमोरी ही नहीं थी

जांच में यह पता चला कि ओएमआर स्कैनिंग मशीन में स्वयं की मेमोरी नहीं थी, इसलिए इसे किसी कंप्यूटर के साथ जोड़कर इसमें छेड़छाड़ करना आसान था. यही हुआ, साजिशकर्ताओं ने जेपीएससी के स्ट्रॉन्ग रूम में गुपचुप तरीके से मनचाहा काम किया. वहां एक निजी व्यक्ति अपने निजी कंप्यूटर का इस्तेमाल करता था. आरोप है कि उसने ही सारी गड़बड़ी की. जब वह हटा, तो वह अपना कंप्यूटर भी ले गया, जो अब तक सीबीआइ को नहीं मिला है.

नेताओं के रिश्तेदारों के नाम आये, पर अफसरों के चहेतों की जांच ही नहीं हुई मुकेश कुमार महतो - पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश महतो के भाई कानू राम नाग - पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के निजी सहायक हरिहर सिंह मुंडा - पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा के दूर के रिश्तेदार रोहित सिन्हा - तत्कालीन महाधिवक्ता अनिल सिन्हा के भतीजे प्रशांत लायक - तत्कालीन विधायक प्रदीप यादव के रिश्तेदार रामकृष्ण कुमार - तत्कालीन विधायक व वर्तमान केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी के रिश्तेदार


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लेखक के बारे में

By भूमि शर्मा

भूमि शर्मा पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के साथ बतौर कंटेंट राइटर जुड़ी हुई हैं. वर्तमान में वह मुख्य रूप से जमशेदपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों की खबरों को कवर करती हैं. इससे पहले वह एजुकेशन बीट और झारखंड बीट पर भी काम कर चुकी हैं, जहां उन्होंने शैक्षणिक बदलावों और राज्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर लेखन किया है।

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