रांची : JPSC-JSSC की परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की जांच कर रही CID को टीडीपीएल कंपनी के जेएसएससी में इंपैनलमेंट को लेकर अहम जानकारी मिली है. जांच में सामने आया है कि आरोपी एजेंसी टीडीपीएल ने कथित तौर पर रिश्वत देकर पहले जेएसएससी में अपना इंपैनलमेंट कराया. इसके बाद टेंडर हासिल कर झारखंड में परीक्षा संचालन के काम में प्रवेश किया. वर्ष 2025 में जेएसएससी ने टीडीपीएल को प्रतिबंधित कर दिया था.
अभय ने किया बड़ा खुलासा
CID के सामने टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय ने बड़ा खुलासा किया है. अभय ने CID को बताया कि टीडीपीएल ने जेएसएससी में काम पाने के बदले एक एसओ को 5 लाख रुपये की रिश्वत दी थी. इसी के बाद कंपनी का इंपैनलमेंट हुआ और उसे परीक्षा संचालन का टेंडर मिला.
एसओ को 5 लाख दी थी रिश्वत
पूछताछ में अभय ने बताया कि जेएसएससी में उसका करीबी एसओ प्रेम कुमार था. प्रेम कुमार की मदद से ही टीडीपीएल का जेएसएससी में इंपैनलमेंट कराया गया. इसके एवज में जेएसएससी कार्यालय के सामने स्थित मैदान में प्रेम कुमार को 5 लाख रुपये नकद दिए गए. अभय के अनुसार टीडीपीएल ने उसे इस काम के लिए कुल 10 लाख रुपये दिए थे. 5 लाख रुपये उसके पास रहे और 5 लाख प्रेम कुमार को दिए गए .
जेएसआर एजेंसी के जरिए मिली थी स्वास्थ्य विभाग में एंट्री
अभय ने सीआईडी को बताया कि वर्ष 2023 में उसने जेएसआर एजेंसी में काम शुरू किया था. इस एजेंसी को स्वास्थ्य विभाग में इंपैनल कराकर भर्तियों का काम दिलाया गया था और इसके एवज में उसे 9 लाख मिले थे.
दिल्ली के शेंटी के माध्यम से टीडीपीएल से जुड़ा
बाद में दिल्ली के शेंटी के माध्यम से अभय टीडीपीएल के संपर्क में आया और जेएसएससी में कंपनी का इंपैनलमेंट करने में मदद की. टीडीपीएल के निर्देशक रामवीर सिंह ने भी सीआईडी को दिए बयान में कहा है कि अभय ने जेएसएससी में कंपनी को काम दिलाने में मदद की थी. सीआईडी ने अभय और रामवीर सिंह को गिरफ्तार कर लिया दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं.
