JPSC News: 'कोई दबाव नहीं, निष्पक्ष जांच हो, इसलिए दिया इस्तीफा', बोले पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते ने अपने इस्तीफे को लेकर बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उन पर कोई दबाव नहीं था, बल्कि वह आयोग से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना चाहते थे.

संजीव सिंह

रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते ने कहा कि उन्होंने किसी दबाव में नहीं, बल्कि आयोग से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अपने पद से इस्तीफा दिया है. उन्होंने कहा कि सीआईडी जांच शुरू होने के बाद उन्हें लगा कि जांच एजेंसी को पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए, इसलिए उन्होंने स्वयं पद छोड़ने का फैसला किया. सोमवार को मीडिया से बातचीत में एल खियांग्ते ने कहा कि इस्तीफा देने के लिए उन पर किसी तरह का दबाव नहीं था. उन्होंने कहा, 'किसी दबाव में काम करना मेरी कार्यशैली नहीं है. अब मैं जांच एजेंसी को पूरा सहयोग करूंगा.'

ब्लैकलिस्टेड एजेंसी के साथ नहीं करना चाहते थे काम

पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि उन पर ब्लैकलिस्टेड एजेंसी के साथ मिलकर परीक्षा कराने का आरोप लगाया जा रहा है, जबकि कोई भी व्यक्ति ऐसी एजेंसी के साथ काम नहीं करना चाहता. उन्होंने कहा कि संबंधित एजेंसी को काम देने से पहले उसके ब्लैकलिस्टेड होने या नहीं होने की पूरी जांच की गई थी. उसकी क्षमता और संसाधनों का आकलन करने के बाद ही उसे कार्य सौंपा गया.

ओएमआर शीट विवाद पर एजेंसी बताएगी सच्चाई

14वीं सिविल सेवा परीक्षा की ओएमआर शीट को लेकर उठ रहे सवालों पर एल खियांग्ते ने कहा कि आयोग के नियम के अनुसार प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) के बाद अभ्यर्थियों को ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी दी जाती है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही ओएमआर शीट के बारे में संबंधित एजेंसी ही जांच के बाद सही जानकारी दे सकती है. आयोग ने भी इस संबंध में एजेंसी को आवश्यक सूचना उपलब्ध करा दी है.

स्क्रूटनी में सदस्यों के हस्ताक्षर अनिवार्य नहीं

पीटी परिणाम में आयोग के सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं होने के विवाद पर उन्होंने कहा कि जेपीएससी के नियमों में स्क्रूटनी के दौरान सदस्यों के हस्ताक्षर अनिवार्य नहीं हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि आयोग के सदस्यों की भूमिका अंतिम मेरिट सूची, स्क्रूटनी और साक्षात्कार के चरण में होती है.

पीटी में कटऑफ जारी करने का नियम नहीं

एल खियांग्ते ने कहा कि प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम के साथ कटऑफ अंक जारी करने का कोई अनिवार्य प्रावधान नहीं है. उन्होंने बताया कि पहले भी कभी कटऑफ जारी किया गया और कभी नहीं. नियम के अनुसार अंतिम परिणाम के समय कटऑफ और आरक्षण संबंधी विवरण जारी किया जाता है.

आयोग की छवि सुधारने के लिए किए प्रयास

पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि उन्होंने पद संभालने के बाद आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार और पारदर्शिता लाने का लक्ष्य तय किया था. इसके लिए नियमों में बदलाव और सुधार की दिशा में भी पहल की गई थी. उनका मानना है कि परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारियों को छोड़कर अधिकतम सूचनाएं सार्वजनिक होनी चाहिए.

सोशल मीडिया पर पद बेचने जैसे आरोपों पर उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है. हालांकि, यदि ऐसे आरोप लगाए जा रहे हैं तो जांच एजेंसी को इसकी निष्पक्ष जांच करनी चाहिए और जो भी दोषी हो, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए.

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By Amleshnandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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