रांची से सुनील चौधरी की रिपोर्ट
JMM letter, रांची : झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के दौरान सामने आ रही व्यावहारिक दिक्कतों को लेकर निर्वाचन आयोग का ध्यान खींचा है. पार्टी ने मांग की है कि जांच के दौरान जिन मतदाताओं के विवरण में कोई गड़बड़ी (विसंगति) पाई गई है या जो ‘अनमैप्ड’ (बिना पते या अधूरी जानकारी वाले) श्रेणी में चिन्हित हैं, उनसे घर-घर जाकर की जाने वाली गणना (गृह-गणना) के चरण में ही जरूरी दस्तावेज ले लिए जाएं. इस सिलसिले में झामुमो के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) को एक आधिकारिक पत्र भेजा है. पत्र के माध्यम से उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग से वर्तमान व्यवस्था पर पुनर्विचार करने का पुरजोर आग्रह किया है, ताकि इस पूरी प्रक्रिया को आम जनता के लिए अधिक सुलभ और पारदर्शी बनाया जा सके.
बाद में नोटिस मिलने से जनता में फैलता है डर
झामुमो महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने पत्र में वर्तमान चुनावी व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा है कि मौजूदा नियमों के तहत गृह-गणना चरण के दौरान सामान्य मतदाताओं से कोई दस्तावेज नहीं लिया जा रहा है. अधिकारियों द्वारा बाद में नोटिस जारी होने और सत्यापन (वेरिफिकेशन) प्रक्रिया शुरू होने पर ही दस्तावेज मांगे जाने का प्रावधान है. झामुमो का तर्क है कि जिन मतदाताओं के नाम या विवरण में पहले से ही गड़बड़ी चिन्हित है, उनसे गणना के वक्त ही कागजात ले लेना अधिक व्यावहारिक और जनहित में होगा. इससे आम जनता को बाद में होने वाली अनावश्यक परेशानी, मानसिक तनाव और प्रशासनिक भय से बड़ी राहत मिलेगी. विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों और कम साक्षरता वाले इलाकों में लोगों के बीच यह अफवाह या आशंका नहीं फैलेगी कि उनका नाम मतदाता सूची से काटा जा रहा है.
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अधिकारियों का घटेगा प्रशासनिक बोझ
पार्टी ने इस मांग के पीछे प्रशासनिक और आर्थिक तर्क भी दिए हैं. पत्र में कहा गया है कि प्रारंभिक स्तर पर ही दस्तावेज मिल जाने से जिला निर्वाचन प्रशासन, निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी (ERO) और बूथ स्तर के अधिकारियों (BLO) पर बार-बार काम करने का अतिरिक्त प्रशासनिक बोझ काफी कम हो जाएगा. इससे अलग से नोटिस जारी करने और दोबारा सत्यापन करने की भाग-दौड़ से मुक्ति मिलेगी. इसके अलावा, झामुमो ने राज्य के प्रवासी श्रमिकों, पढ़ाई के लिए बाहर गए विद्यार्थियों और रोजगार के सिलसिले में दूसरे राज्यों में रह रहे मतदाताओं का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया है. पार्टी का कहना है कि बाद में नोटिस मिलने पर इन लोगों को दस्तावेज जमा करने या सुनवाई में शामिल होने के लिए मजबूरन झारखंड वापस आना पड़ेगा, जिससे उन पर बेवजह का आर्थिक बोझ बढ़ेगा और उनका रोजगार व पढ़ाई भी प्रभावित होगी.
वैकल्पिक व्यवस्था सार्वजनिक करने की मांग
झारखंड मुक्ति मोर्चा का मानना है कि यदि शुरुआत में ही अधिकांश गड़बड़ियों का समाधान कर लिया जाए, तो पूरी पुनरीक्षण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, सुगम और समयबद्ध तरीके से पूरी हो सकेगी. इससे कोई भी पात्र नागरिक अपने मताधिकार से वंचित नहीं होगा और लोकतंत्र की बुनियाद मजबूत होगी. पत्र के अंत में झामुमो ने निर्वाचन आयोग से विशेष आग्रह किया है कि चिन्हित मामलों में गृह-गणना के दौरान ही दस्तावेज संग्रह की अनुमति दी जाए. साथ ही पार्टी ने यह भी कहा है कि यदि चुनाव आयोग इस संबंध में कोई दूसरी वैकल्पिक व्यवस्था लागू कर रहा है, तो उसे सार्वजनिक रूप से पूरी तरह स्पष्ट किया जाना चाहिए. इससे मतदाताओं, सभी राजनीतिक दलों और ऑन-ड्यूटी निर्वाचन अधिकारियों के बीच किसी भी प्रकार का असमंजस या भ्रम नहीं रहेगा.
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