झारखंड की राजकीय मछली मांगूर के संरक्षण की बनेगी कार्ययोजना, केंद्र से सहयोग लेगी सरकार

झारखंड सरकार ने मांगूर को राजकीय मछली घोषित कर इसके संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यह मछली पोषण और आजीविका दोनों के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन आर्द्रभूमियों के कम होने से विलुप्त होने के कगार पर है।

Jharkhand State Fish : राज्य सरकार ने मांगूर को राजकीय मछली घोषित किया है. राजकीय मछली घोषित किये छह माह से ज्यादा समय हो गया है. अब इसके विकास और संवर्द्धन की योजना तैयार होगी. इसके लिए राज्य सरकार केंद्र सरकार की मदद लेगी. राज्य सरकार के मत्स्य विभाग के अधिकारियों की बैठक 21 जुलाई को होगी. इसमें मत्स्य विभाग के अधिकारी झारखंड में मांगूर मछली के विकास में केंद्र से अपेक्षित सहयोग की रिपोर्ट पेश करेंगे. 2025 में राज्य सरकार ने इसे राजकीय मछली का दर्जा दिया है.

विलुप्त होने के कगार पर मांगूर

बारिश के मौसम में झारखंड के गांवों में एक समय ऐसा था, जब धान के खेतों में पानी भरते ही बच्चे और किसान हाथों से देसी मांगूर पकड़ लेते थे. खेत, आहर, पोखर और छोटी नदियां इस मछली से भरी रहती थीं. लेकिन आज वही देसी मांगूर गांवों से लगभग गायब हो चुकी है. ग्रामीण बताते हैं कि वर्षों से उन्होंने प्राकृतिक जलाशयों में मांगूर नहीं देखी. यही वजह है कि झारखंड सरकार ने इसे राज्य की राजकीय मछली घोषित कर संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा, पश्चिम सिंहभूम, दुमका और संताल परगना यह ज्यादा पाया जाता है.

संवेदनशील प्रजाति है मांगूर

मत्स्य विशेषज्ञों के अनुसार देसी मांगूर एक संवेदनशील प्रजाति है, जिसे उथले, साफ और जैविक रूप से समृद्ध जलाशयों की जरूरत होती है. लेकिन पिछले दो दशकों में झारखंड के ग्रामीण परिदृश्य में बड़े बदलाव हुए हैं. सबसे बड़ा कारण आर्द्रभूमियों (वेटलैंड) का तेजी से कम होना है.

पोषण और आजीविका दोनों के लिए महत्वपूर्ण 

देसी मांगूर केवल एक मछली नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पोषण सुरक्षा का भी हिस्सा रही है. इसमें प्रोटीन, आयरन और आवश्यक अमीनो एसिड की मात्रा अधिक होती है. चिकित्सक कई बार बीमारी से उबर रहे मरीजों को भी मांगूर का सेवन करने की सलाह देते हैं.

क्या कहते हैं अधिकारी

मत्स्य निदेशक अमरेंद्र कुमार कहते हैं मांगूर विलुप्त होने के कगार पर है. इसके संरक्षण की योजना बन रही है. भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से सहयोग लेने पर बात हो रही है. झारखंड में मांगूर का बेस लाइन सर्वे चल रहा है. यहां क्लस्टर बनाकर विकास करने की योजना है.

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लेखक के बारे में

Published by: Priya Gupta

प्रिया गुप्ता पिछले एक साल से प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. फिलहाल वह झारखंड से जुड़ी खबरों पर काम करती हैं, जिनमें सरकारी योजनाएं, प्रमुख घटनाएं, सामाजिक मुद्दे और अन्य महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं. इससे पहले वह लाइफस्टाइल डेस्क पर फैशन, हेल्थ, रिलेशनशिप, पैरेंटिंग और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर लेख लिख चुकी हैं. प्रिया ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय से स्नातक और अमिटी यूनिवर्सिटी से मास्टर डिग्री हासिल की है.

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