झारखंड में बढ़ा मलेरिया का खतरा, सिंहभूम में सबसे ज्यादा 76 फीसद मरीज, रांची में डेंगू ने पसारा पैर

झारखंड में मॉनसून के दौरान मलेरिया और डेंगू जैसे वेक्टर जनित रोगों के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार ने रोकथाम के उपाय तेज करने का फैसला किया है. राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में नियंत्रण अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए.

रांची : मॉनसून के दौरान मलेरिया, डेंगू और अन्य वेक्टर जनित रोगों के बढ़ते खतरे को देखते हुए झारखंड सरकार ने रोकथाम के उपाय तेज करने का फैसला किया है. गुरुवार को नेपाल हाउस, डोरंडा स्थित योजना एवं विकास विभाग के सभागार में मलेरिया, लिम्फेटिक फाइलेरिया एवं अन्य वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम और नियंत्रण को लेकर राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गई. बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने की.

बैठक में सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ काम करने और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में तत्काल प्रभाव से नियंत्रण अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए.

जून 2026 तक 16,728 मलेरिया मरीज, सिंहभूम सबसे अधिक प्रभावित

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार जून 2026 तक राज्य में 16,728 मलेरिया के मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें सबसे अधिक पूर्वी सिंहभूम में 6,527 और पश्चिमी सिंहभूम में 6,172 मरीज मिले हैं. यानी राज्य के कुल मलेरिया मामलों का करीब 76 प्रतिशत केवल इन दो जिलों में दर्ज हुआ है. वहीं, जून 2026 तक राज्य में डेंगू के 77 मामले सामने आए हैं, जिनमें रांची में सबसे अधिक 27 मरीज मिले हैं. इन आंकड़ों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित जिलों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं.

समय पर जांच और इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश

अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि उच्च मलेरिया प्रभावित क्षेत्रों में समय पर जांच, त्वरित एवं पूर्ण उपचार, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, नियमित निगरानी और मच्छर नियंत्रण की गतिविधियों में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जन-जागरूकता अभियान को भी और प्रभावी बनाया जाए, ताकि लोग मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं और बीमारी के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं.

संवेदनशील इलाकों में फॉगिंग और एंटी-लार्वा अभियान तेज होगा

राज्य स्तरीय टास्क फोर्स ने डेंगू, चिकनगुनिया, कालाजार और जापानी इंसेफेलाइटिस से प्रभावित तथा उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में एंटी-लार्वा छिड़काव और फॉगिंग समय पर पूरा करने के निर्देश दिए. इसके अलावा सभी स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में पर्याप्त जांच किट, आवश्यक दवाइयों और मरीजों के लिए पर्याप्त बेड उपलब्ध रखने को कहा गया. अधिकारियों ने लोगों से घरों और आसपास पानी जमा नहीं होने देने तथा साफ-सफाई बनाए रखने के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया.

कई विभाग मिलकर चलाएंगे अभियान

वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग के साथ ग्रामीण विकास, पंचायती राज, नगर विकास एवं आवास, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास तथा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाएंगे.

बैठक में ये अधिकारी रहे मौजूद

बैठक में स्वास्थ्य विभाग के क्षेत्रीय निदेशक रविशंकर, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के मिशन निदेशक शशि प्रकाश झा, उप सचिव अश्विनी कुमार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा पीरामल और सिनी संस्था के प्रतिनिधि उपस्थित रहे.

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By Bipin kumar singh

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