Jharkhand SIR: विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए दूसरे के खतियान से बनायी गयी फर्जी वंशावली या प्रमाण पत्र का इस्तेमाल करनेवालों पर अब कानूनी कार्रवाई हो सकती है. चुनाव आयोग फर्जी वंशावली को ‘महज सामान्य दस्तावेजी गड़बड़ी’ नहीं मान रहा है. वंशावली का इस्तेमाल किसी व्यक्ति की पहचान, पारिवारिक संबंध और पुराने रिकॉर्ड से उसका संबंध साबित करने के लिए किया जाता है. यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत वंशावली तैयार कराकर उसके आधार पर मतदाता सूची में अपना नाम शामिल कराने या किसी अपात्र व्यक्ति का नाम शामिल कराने का प्रयास करता है, तो यह ‘चुनावी रिकॉर्ड में गलत सूचना देने’ की श्रेणी में आ सकता है. राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने स्पष्ट किया है कि दूसरे व्यक्ति के वंशज के साथ गैर पारिवारिक व्यक्ति को अपनी वंशावली या खतियान के वंशज के रूप में शामिल नहीं करें. ऐसा करना दंडनीय अपराध है.
फर्जी वंशावली बनाने की मिल रहीं शिकायतें: रवि कुमार
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने बताया कि आयोग को फर्जी वंशावली बनाने से संबंधित शिकायतें मिली हैं. सूचना है कि कुछ मामलों में दूसरे लोगों की वंशावली में नाम जोड़ कर फर्जी वंशावली तैयार कराने और उसके आधार पर जाति प्रमाण-पत्र, निवास प्रमाण-पत्र आदि बनवाने का प्रयास किया जा रहा है. एसआईआर में वंशावली और पुराने दस्तावेजों के आधार पर मतदाता के पारिवारिक संबंधों की जानकारी का इस्तेमाल सत्यापन में किया जा रहा है. ऐसे में फर्जी दस्तावेज के जरिये किसी व्यक्ति को परिवार का सदस्य या वंशज साबित करने की कोशिश चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है.
दूसरे परिवार की वंशावली में नाम जोड़ना अपराध क्यों
मतदाता सूची में केवल पात्र व्यक्ति का ही नाम दर्ज होना चाहिए. ‘लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम-1950 की धारा-16’ के अनुसार, भारत का नागरिक नहीं होनेवाला व्यक्ति मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए अयोग्य है. इसके अलावा, मतदाता सूची तैयार करने या उसमें नाम जोड़ने के लिए गलत घोषणा अथवा गलत जानकारी देने पर इसी अधिनियम की धारा-31 लागू हो सकती है.
यह है सजा का प्रावधान
लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम-1950 की धारा-31 में गलत घोषणा को अपराध बनाया गया है. इसके तहत ऐसे मामले में एक वर्ष तक के कारावास या जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है. निर्वाचन से जुड़े निर्धारित प्रपत्रों में भी आवेदक को यह घोषणा करनी होती है कि उसके द्वारा दी गयी जानकारी गलत पाये जाने पर धारा-31 के तहत कार्रवाई हो सकती है.
इसे उदाहरण के जरिये समझें
मान लीजिए, किसी परिवार की जमीन के खतियान के आधार पर तैयार की गयी वास्तविक वंशावली में दादा, पिता और पुत्र के नाम दर्ज हैं. परिवार से कोई संबंध नहीं रखने वाला व्यक्ति उस खतियान या उसके आधार पर तैयार की गयी वंशावली में अपना नाम जोड़कर खुद को उसी परिवार का वंशज बताता है. इसके बाद वह इस रिकॉर्ड के आधार पर जाति या निवास प्रमाण-पत्र बनवाता है और एसआईआर के दौरान उसी दस्तावेज को अपनी पारिवारिक पहचान के प्रमाण के तौर पर पेश करता है. ऐसी स्थिति में फर्जी वंशावली तैयार कराने, उसमें गलत नाम जोड़ने और उसका इस्तेमाल करनेवाले व्यक्ति की भूमिका की जांच हो सकती है. यदि जानबूझकर गलत घोषणा के जरिये मतदाता सूची में नाम शामिल कराने का प्रयास साबित होता है, तो लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम-1950 की धारा-31 के तहत कार्रवाई हो सकती है.
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विदेशी नागरिक के मामले में सख्ती
चुनाव आयोग ने विशेष रूप से अपील की है कि यदि किसी विदेशी व्यक्ति द्वारा किसी भारतीय नागरिक की वंशावली का दुरुपयोग कर मतदाता सूची में शामिल होने का प्रयास किया जा रहा हो, तो इसकी सूचना संबंधित निर्वाचन अधिकारियों को दी जाये. क्योंकि लोकप्रतिनिधित्व अधिनियम-1950 की धारा-16 के तहत गैर-भारतीय नागरिक मतदाता सूची में पंजीकरण के लिए अयोग्य है. इसलिए एसआईआर में वंशावली से जुड़ा कोई भी दस्तावेज वास्तविक और पारिवारिक रिकॉर्ड के अनुरूप ही दिया जाना चाहिए. किसी दूसरे परिवार की वंशावली में अपना या किसी गैर-पारिवारिक व्यक्ति का नाम जोड़ना न केवल गलत दस्तावेज तैयार करने का मामला बन सकता है, बल्कि मतदाता सूची की शुचिता प्रभावित करने पर कानूनी कार्रवाई का आधार भी बन सकता है.
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