झारखंड की ड्रीम रोड प्रोजेक्ट्स पर केंद्र का बुलडोजर: हजारीबाग-बगोदर समेत कई बड़ी सड़कें रिजेक्ट

केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने झारखंड की कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को हरी झंडी देने से इनकार कर दिया है. हजारीबाग-बगोदर सड़क परियोजना सहित कई बड़ी लागत वाली योजनाओं के प्रस्तावों को अस्वीकृत कर दिया गया है. केंद्र सरकार ने जमीन की अनुपलब्धता और देरी को मुख्य कारण बताया है.

रांची से मनोज लाल की रिपोर्ट

Jharkhand Road Projects, रांची : केंद्रीय सड़क, परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने झारखंड की कई महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं को हरी झंडी देने से इनकार कर दिया है. मंत्रालय ने हजारीबाग-बगोदर सड़क परियोजना, हाटगम्हरिया-नोवामुंडी-बराईबुरू सड़क, और एनएच-6 पर स्थित चाईबासा-हाटगम्हरिया सड़क पर प्रस्तावित आरओबी (ROB) जैसी बड़ी लागत वाली योजनाओं के प्रस्तावों को अस्वीकृत (Reject) कर दिया है. केंद्र सरकार का कहना है कि इन भारी-भरकम परियोजनाओं के लिए समय पर जमीन की उपलब्धता न होना, फॉरेस्ट क्लियरेंस न मिलना और तकनीकी स्वीकृतियों में हुई देरी इनके खारिज होने की मुख्य वजह बनी है.

पेनल्टी और कंटीजेंसी फंड को लेकर केंद्र और राज्य में ठनी

परियोजनाओं में देरी और तय शर्तों का पालन न करने के आधार पर केंद्रीय मंत्रालय ने राज्य के पथ निर्माण विभाग पर दंड (Penalty) भी लगाया है, जिसको लेकर अब केंद्र और राज्य सरकार आमने-सामने आ गए हैं. पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों ने केंद्रीय कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा है कि मंत्रालय को राज्य पर दंड लगाने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. इसके साथ ही विभाग ने आरोप लगाया है कि केंद्र की ओर से कंटीजेंसी (आपातकालीन) फंड का भुगतान रोका जा रहा है, जिसको लेकर राज्य सरकार ने राशि जल्द जारी करने के लिए मंत्रालय को आधिकारिक पत्र भी लिखा है.

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पूर्व में मिली थी मंजूरी, पर अब राज्य की राशि भुगतान का मामला अटका

मंत्रालय ने जहां पहले कई अन्य सड़क परियोजनाओं को स्वीकृति दी थी, वहीं इन महत्वपूर्ण प्रस्तावों को तकनीकी और प्रक्रियात्मक कमियों के कारण पूरी तरह खारिज कर दिया. अब स्थिति यह है कि एक तरफ महत्वपूर्ण सड़कों का निर्माण रुक गया है, तो दूसरी तरफ कंटीजेंसी राशि का भुगतान न होने से राज्य के पथ निर्माण विभाग का गणित भी गड़बड़ा रहा है. राज्य सरकार लगातार पत्र लिखकर अपनी बकाया राशि और परियोजनाओं की स्थिति स्पष्ट करने में जुटी है.

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By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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