Jharkhand Rajya Sabha Election, रांची: झारखंड में राज्यसभा चुनाव की तारीखें नजदीक आते ही सियासी पारा हाई हो चुका है. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या झामुमो-कांग्रेस के बीच सब ठीक है या नहीं. क्योंकि, चुनाव के ऐलान के बाद से ही दोनों दलों के बीच खींचतान चल रहा था. हालांकि, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दोनों दलों के बीच सहमति बन चुकी है. दोनों दलों में हुई डील के तहत झामुमो और कांग्रेस ने आपस में एक-एक सीट बांट ली है. झामुमो ने पूर्व मंत्री बैद्यनाथ राम को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के कम्युनिकेशन इंचार्ज प्रणव झा को मैदान में उतारा है. हालांकि यह समझौता इतना आसान नहीं था. इस समझौते को कराने में बड़ी भूमिका छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और अजय शर्मा ने निभाई है. राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस द्वारा इन्हें विशेष पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया था. दोनों कद्दावर नेताओं ने रविवार को भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की. सीएम आवास में इन तीनों नेताओं के बीच लगभग एक घंटे तक बेहद गोपनीय बातचीत हुई. इसके बाद इंडिया गठबंधन की हुई एक और बैठक में मामला पूरी तरह सुलझ गया. हालांकि बंद कमरे में क्या गोपनीय बात हुई यह बाहर नहीं आ सकी.
बैठक के बाद कांग्रेस के नेताओं ने नहीं किया कोई खुलासा
शनिवार की शाम को भी भूपेश बघेल और अजय शर्मा ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी और ठीक अगले ही दिन रविवार को दोबारा एक घंटे की लंबी बैठक होना इस बात का साफ संकेत है कि गठबंधन के भीतर पर्दे के पीछे जरूर कोई बड़ी रणनीति बनी है. हालांकि, बैठक खत्म होने के बाद बाहर आए नेताओं ने इस बातचीत का कोई भी खुलासा नहीं किया. राजनीतिक गलियारों में यह सवाल तैरता रहा कि आखिर इस एक घंटे की सीक्रेट मीटिंग क्या बातचीत हुई?
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JMM का बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’
एक तरफ जहां इस सीक्रेट मीटिंग पर सस्पेंस बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने पूर्व विधायक और राज्य के बड़े दलित चेहरे बैजनाथ राम को अपना उम्मीदवार घोषित कर एक बड़ा दांव चल दिया है. राजनीतिक जानकार इसे पलामू प्रमंडल में पार्टी की पैठ मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम मान रहे हैं. क्योंकि, आजतक किसी भी राजनीतिक दल ने पलामू जोन से किसी भी दलित चेहरे को राज्यसभा में जगह नहीं दी है. जहां तक जीतने के चांसेस की बात है तो इंडिया गठबंधन के विधायक अगर एकजुट रहे तो जीत लगभग तय है. क्योंकि गठबंधन के पास 56 विधायकों का मजबूत आंकड़ा है. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी खुद सोशल मीडिया पर इस फैसले को ‘सामाजिक न्याय’ की आवाज को मजबूत करने वाला कदम बताया है. JMM के इस अचानक लिए गए फैसले और बैजनाथ राम की उम्मीदवारी के बाद राजनीति के जानकार इस कदम को बेहद महत्वपूर्ण मान रहे हैं.
आज नामांकन का आखिरी दिन, थमने वाला है इंतजार
झारखंड की दो रिक्त राज्यसभा सीटों (दीपक प्रकाश और दिवंगत शिबू सोरेन का कार्यकाल) के लिए सोमवार, 8 जून को नामांकन का अंतिम दिन है. दिलचस्प पहलू यह है कि चुनाव के लिए कुल 6 प्रत्याशियों ने परचा खरीदा है, लेकिन रविवार शाम तक किसी ने भी अपना नामांकन दाखिल नहीं किया था. सोमवार को नामांकन के आखिरी दिन सभी उम्मीदवार अपने परचे दाखिल करेंगे, जिससे यह साफ हो जाएगा कि इस सियासी बिसात पर कौन-कौन से चेहरे आमने-सामने हैं. इसके बाद 18 जून को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक वोटिंग होगी और उसी दिन परिणाम भी घोषित कर दिए जाएंगे.
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