रांची से मनोज सिंह की रिपोर्ट
JSPCB Vacancy: झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) में कर्मचारियों की भारी कमी को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने चिंता जतायी है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और समितियों को मजबूत करने से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान एनजीटी की प्रधान पीठ, नई दिल्ली ने राज्यों की स्थिति की समीक्षा की. इस दौरान झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से पेश की गयी रिपोर्ट में बताया गया कि बोर्ड वर्तमान में अपने स्वीकृत पदों की तुलना में केवल 52 प्रतिशत कार्यबल के साथ काम कर रहा है.
केवल 52 प्रतिशत क्षमता पर काम कर रहा बोर्ड
सुनवाई के दौरान झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव ने वर्चुअल माध्यम से अधिकरण को जानकारी दी कि बोर्ड में स्वीकृत पदों की तुलना में बड़ी संख्या में पद खाली हैं. वर्तमान में संविदा कर्मचारियों को शामिल करने के बाद भी बोर्ड केवल 52 प्रतिशत क्षमता के साथ कार्य कर रहा है. एनजीटी ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए कहा कि प्रदूषण नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण विभाग में मानव संसाधन की कमी सीधे तौर पर निगरानी और कार्रवाई की क्षमता को प्रभावित कर सकती है. पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में प्रदूषण बोर्ड की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है, ऐसे में कर्मचारियों की कमी से इसकी कार्यक्षमता कमजोर होने की आशंका बनी रहती है.
भर्ती नियम अधिसूचना का है इंतजार
सुनवाई में झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से यह भी बताया गया कि राज्य गठन के करीब 26 वर्ष बाद भी बोर्ड के लिए भर्ती नियम अब तक अधिसूचित नहीं किए गए हैं. वर्ष 2025 में भर्ती नियम तैयार किए गए थे, लेकिन वे अभी तक राज्य सरकार के स्तर पर अंतिम स्वीकृति की प्रक्रिया में लंबित हैं. एनजीटी ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लंबे समय तक भर्ती नियमों का अधिसूचित नहीं होना और खाली पदों को नहीं भरना यह दर्शाता है कि इस मुद्दे को अपेक्षित गंभीरता से नहीं लिया गया है. नियम बनाने की प्रक्रिया वर्षों तक लंबित रहना प्रशासनिक सुस्ती को दिखाता है, जबकि पर्यावरण से जुड़े मामलों में तेजी से काम करने वाली व्यवस्था की जरूरत होती है.
प्रभावित हो सकता है प्रदूषण नियंत्रण का काम
अधिकरण ने टिप्पणी की कि स्वीकृत पदों को नहीं भरने और भर्ती प्रक्रिया में देरी से बोर्ड की प्रभावी कार्यप्रणाली पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को उद्योगों की निगरानी, पर्यावरणीय मानकों के पालन की जांच और प्रदूषण से जुड़े मामलों में कार्रवाई जैसे महत्वपूर्ण कार्य करने होते हैं. ऐसे में पर्याप्त संख्या में अधिकारी और कर्मचारी नहीं होने से निगरानी व्यवस्था कमजोर हो सकती है. एनजीटी ने स्पष्ट किया कि मजबूत संस्थागत ढांचे के बिना पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्यों को हासिल करना मुश्किल होगा.
सीपीसीबी ने भी राज्यों की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ओर से पेश अधिवक्ता ने अधिकरण को बताया कि पूर्व आदेशों के बावजूद कई राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और प्रदूषण नियंत्रण समितियों ने अपने जवाबों की प्रतियां सीपीसीबी के अधिवक्ता को उपलब्ध नहीं कराई हैं. हालांकि झारखंड इस मामले में शामिल नहीं है. झारखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने आवश्यक जानकारी उपलब्ध करायी है. एनजीटी ने सभी संबंधित संस्थाओं को प्रक्रिया में गंभीरता बरतने के निर्देश दिए.
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आठ अक्तूबर को होगी अगली सुनवाई
राष्ट्रीय हरित अधिकरण इस मामले में देशभर के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों और समितियों की स्थिति की समीक्षा कर रहा है. सुनवाई के दौरान राज्यों में कर्मचारियों की कमी, भर्ती प्रक्रिया और संस्थागत मजबूती जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. मामले की अगली सुनवाई आठ अक्तूबर को निर्धारित की गयी है. अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि झारखंड समेत अन्य राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों में खाली पदों को भरने और भर्ती नियमों को लागू करने की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं.
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