'हेमंत जी, तनिक भी संवेदना बची है या नहीं?': बाबूलाल ने गोल्ड मेडलिस्ट बेटी के वायरल वीडियो पर सरकार को घेरा, जानें पूरा मामला

झारखंड की गोल्ड मेडलिस्ट थ्रोबॉल खिलाड़ी सुनीता उरांव की गरीबी और झाड़ू-पोछा करने की मजबूरी का मामला सामने आया है. इस घटना पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है.

रांची : झारखंड में खेल और खिलाड़ियों की स्थिति और उनकी जिंदगी की बदहाली को लेकर एक बार फिर सियासत गर्मा गई है. दरअसल थ्रोबॉल और वॉलीबॉल में राज्य के लिए 2 गोल्ड समेत कुल 5 मेडल जीतने वाली आदिवासी खिलाड़ी सुनीता उरांव के झाड़ू-पोछा करने का मामला सामने आया है. इस घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जिसके बाद झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है.

पत्रकार सुतिब्रो गोस्वामी ने शेयर किया वीडियो

दरअसल, पत्रकार सुतिब्रो गोस्वामी (एक्स यूजर) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो शेयर करते हुए झारखंड सरकार की खेल नीति पर सवाल खड़े किए थे. पत्रकार ने अपनी पोस्ट में लिखा कि राज्य का मान बढ़ाने वाली गोल्ड मेडलिस्ट सुनीता उरांव आज बेहद गरीबी में रांची के खेल निदेशालय में ही झाड़ू-पोछा करने को मजबूर हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि जिस बेटी ने देश और राज्य के लिए 5-5 मेडल जीते, क्या सरकार उसे उसकी योग्यता के अनुसार एक सम्मानजनक रोजगार भी नहीं दे सकती?

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'प्रचार में करोड़ों खर्च, लेकिन खिलाड़ियों के लिए पैसे नहीं': बाबूलाल

पत्रकार की इसी पोस्ट को रिएक्ट करते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार को आड़े हाथों लिया. बाबूलाल मरांडी ने लिखा कि झारखंड की खेल प्रतिभाओं, विशेषकर आदिवासी बच्चे-बच्चियों के साथ हमेशा से सौतेला व्यवहार किया जाता रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि खेल आयोजनों के दौरान ई-रिक्शे में डीजल भरवाने से लेकर प्रोटोकॉल के खिलाफ जाकर मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी के प्रचार-प्रसार पर खेल विभाग करोड़ों रुपये पानी की तरह बहा देता है, लेकिन राज्य का नाम रोशन करने वाली सुनीता उरांव जैसी बेटियों को सम्मानजनक रोजगार देने के नाम पर खामोश बैठ जाता है.

सुनीता के हाथों से झाड़ू हटाकर सम्मानजनक रोजगार देने की मांग

बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सीधा सवाल पूछते हुए कहा कि पूरा खेल विभाग व्यवस्था सुधारने के बजाय सरकार की चरणभक्ति में व्यस्त है. उन्होंने सरकार से मांग की कि अगर तनिक भी संवेदना बची है, तो सुनीता उरांव के हाथों से तुरंत झाड़ू हटाया जाए और उन्हें उनकी खेल योग्यता के अनुसार सम्मानजनक नौकरी और हर संभव सरकारी सहायता दी जाए, ताकि वे अपनी प्रतिभा के साथ न्याय कर सकें.

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लेखक के बारे में

By समीर उरांव

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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