Jharkhand News: झारखंड में बेटियों को बचाने, लिंगानुपात में सुधार लाने और अवैध रूप से भ्रूण का लिंग निर्धारण करने वाले केंद्रों पर पूरी तरह नकेल कसने के उद्देश्य से सोमवार को नामकुम स्थित आरसीएच कॉन्फ्रेंस हॉल में पीसी एंड पीएनडीटी अधिनियम के को लेकर ताबड़तोड़ बैठकें हुईं. यह झारखंड सरकार के द्वारा लिंग निर्धारण करने वाले केंद्रों पर सख्ती के लिए किये गये संशोधन और प्रकाशित गजट के संदर्भ में की गयी. पहली बैठक पीसी एंड पीएनडीटी राज्य सलाहकार समिति एवं राज्य समुचित प्राधिकारी की आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा ने की. वहीं, दूसरी बैठक निदेशक प्रमुख स्वास्थ्य सेवाएं डॉ सिद्धार्थ सान्याल द्वारा की गई.
एक डॉक्टर दो ही जगह दे सकता है सेवाएं
इस दौरान बताया गया कि एक चिकित्सक अधिकतम दो ही अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर अपनी सेवाएं दे सकेंगे. ऐसा नहीं करने वाले डॉक्टरों को अविलंब चिह्नित कर उनके विरुद्ध कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी. बैठक में पीसीपीएनडीटी के स्टेट नोडल ऑफिसर डॉ प्रदीप कुमार सिंह, आईईसी के स्टेट नोडल ऑफिसर डॉ राहुल किशोर सिंह ने भी अपने महत्वपूर्ण विचार व तकनीकी सुझाव रखे.
राज्य भर में 30 क्लीनिकों के लाइसेंस निलंबित
मार्च 2026 तक राज्य में कुल 1161 अल्ट्रासाउंड क्लीनिक काम कर रहे हैं. कानून को कड़ाई से लागू करने के लिए अब तक जिला सलाहकार समिति की 108 बैठकें की जा चुकी हैं, जबकि विभिन्न जिलों में कुल 718 अल्ट्रासाउंड क्लीनिकों का सघन निरीक्षण किया गया है. नियमों के उल्लंघन और अनियमितता पर राज्य भर में 30 क्लीनिकों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं, जबकि 01 केंद्र को सील व जब्त किया गया है और 01 मामले में न्यायालय में शिकायत दर्ज कराई गई है.
लिंग जांच करने वाले की सूचना देने पर 1 लाख का ईनाम
मुखबीर-डिकॉय योजना के तहत लिंग जांच करने वाले गिरोह या डॉक्टरों को पकड़वाने के लिए कुल एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है. इसके अंतर्गत सही सूचना देने वाले मुखबिर को ₹40,000, डिकॉय ऑपरेशन में सहयोग करने वाली गर्भवती महिला को ₹40,000 तथा उनके सहयोगी को ₹20,000 की राशि दी जाती है. इसके लिए राज्य के निशुल्क हेल्पलाइन नंबर 104 पर इसकी गोपनीय सूचना दे सकते हैं. सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी.
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