झारखंड मूलवासी सदान मोर्चा ने विधानसभा सीटें 160 करने और विधान परिषद गठन की उठाई मांग

झारखंड में मूलवासी सदान मोर्चा ने परिसीमन की मांग को लेकर अपनी आवाज बुलंद की है. संगठन 160 विधानसभा सीटों और विधान परिषद के गठन की मांग कर रहा है. इसके साथ ही OBC वर्ग के लिए जातीय जनगणना में अलग कॉलम की भी मांग उठी है.


Jharkhand Mulwasi Sadan Meeting: झारखंड में परिसीमन को लेकर मूलवासी सदान मोर्चा ने अपनी मांग तेज कर दी है. संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष सह झारखंड आंदोलनकारी राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि राज्य गठन के बाद से ही परिसीमन की मांग उठती रही है, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद झारखंड को न्यायसंगत राजनीतिक प्रतिनिधित्व नहीं मिल सका. उन्होंने कहा कि अब परिसीमन को और टालना उचित नहीं होगा और राज्य की वर्तमान आबादी तथा सामाजिक-भौगोलिक स्थिति के अनुरूप लोकसभा और विधानसभा सीटों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए.

2005 में आयोग गठन के बावजूद झारखंड में परिसीमन नहीं

बैठक को संबोधित करते हुए राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि वर्ष 2005 में परिसीमन आयोग का गठन होने के बावजूद झारखंड में परिसीमन लागू नहीं हो पाया. इसका सबसे अधिक नुकसान मूलवासी सदानों को हुआ, जो लंबे समय तक अपनी आबादी के अनुरूप राजनीतिक प्रतिनिधित्व से वंचित रहे. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनसंख्या और क्षेत्रीय संतुलन के आधार पर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होना चाहिए.

लोकसभा की 28 और विधानसभा की 160 सीटों की मांग

राजेंद्र प्रसाद ने मांग की कि झारखंड में लोकसभा सीटों की संख्या 14 से बढ़ाकर 28 की जाए. इसी तरह विधानसभा की वर्तमान 81 सीटों को बढ़ाकर 160 किया जाए, ताकि राज्य के सभी क्षेत्रों और समुदायों को बेहतर प्रतिनिधित्व मिल सके. इसके साथ ही उन्होंने झारखंड में विधान परिषद के गठन की भी मांग उठाई और कहा कि इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी. उन्होंने कहा कि परिसीमन का उद्देश्य किसी समुदाय के अधिकारों को कम करना नहीं, बल्कि वास्तविक जनसंख्या और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करना होना चाहिए. मूलवासी सदानों को उनकी आबादी के हिसाब से न्यायसंगत प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए.

OBC के लिए अलग कॉलम की उठाई मांग

राजेंद्र प्रसाद ने आगामी जातीय जनगणना को लेकर भी महत्वपूर्ण मांग रखी. उन्होंने कहा कि OBC वर्ग के लिए अलग और स्पष्ट कॉलम होना चाहिए, ताकि उनकी वास्तविक जनसंख्या का सही आंकड़ा सामने आ सके. उनका कहना था कि भविष्य में आरक्षण, कल्याणकारी योजनाओं और अन्य सरकारी नीतियों का निर्धारण वास्तविक आंकड़ों के आधार पर होना चाहिए. बैठक में कुशवाहा विजय कुमार महतो ने भी अपने विचार रखते हुए आरोप लगाया कि सदानों के अधिकारों को व्यवस्थित तरीके से कमजोर करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि समाज को अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित होकर आवाज उठानी होगी.

इसे भी पढ़ें: आदिवासी एकता महाजुटान के मंच से बंधु तिर्की का हुंकार, बोले- यह सीटों की नहीं, संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई

गांव-गांव चलाया जाएगा जनजागरण अभियान

बैठक में बताया गया कि मूलवासी सदान मोर्चा परिसीमन के मुद्दे को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चला रहा है. संगठन का उद्देश्य लोगों को परिसीमन, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और जातीय जनगणना जैसे मुद्दों पर जागरूक करना है. बैठक की अध्यक्षता संदीप सुरेश महतो ने की, जबकि संचालन देवेंद्र महतो ने किया. बैठक में खुर्शीद अंसारी, सज्जाद अंसारी, कार्तिक महतो, संजय गोप, रईस मलिक, मोहन महतो, नंदलाल महतो, उमेरा खातून, बसंती देवी, पुष्पा देवी, कमला देवी, अनीता ठाकुर, प्रोफेसर अरविंद, धनंजय कुमार राय, विश्वनाथ गोप और नवदीप महतो समेत कई लोग मौजूद रहे.

इसे भी पढ़ें: Jharkhand SIR: फर्जी वंशावली के जरिये मतदाता सूची में नाम जोड़ने की कोशिश की, तो हो सकती है कार्रवाई


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By कुमार विश्वत सेन

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >