Jharkhand Militants, रांची : झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण नीति से प्रभावित होकर राज्य में सक्रिय एक कुख्यात संगठित आपराधिक गिरोह ने मुख्य धारा में लौटने का फैसला किया है. रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) को मिली गुप्त सूचना के आधार पर शनिवार, 30 मई 2026 को रांची और गुमला जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने एक बड़ी सफलता हासिल की. पुलिस को सूचना मिली थी कि कुख्यात ‘झांगुर ग्रुप’ का प्रमुख और 5 लाख रुपये का इनामी अपराधी रामदेव उरांव (47 वर्ष) अपने दो सक्रिय सदस्यों के साथ रांची और गुमला जिले की सीमा पर भ्रमणशील है और पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण करने की फिराक में है. इस सूचना के सत्यापन और त्वरित कार्रवाई के लिए रांची ग्रामीण एसपी के निर्देश और बेड़ो डीएसपी दीपक कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया, जो बेड़ो थाना क्षेत्र के लमकाना पहुंची.
रांची-गुमला पुलिस के संयुक्त जाल में घिरे अपराधी
इसी प्रकार की सटीक सूचना गुमला जिला पुलिस को भी प्राप्त हुई थी, जिसके बाद गुमला एसपी के निर्देश पर घाघरा थाना प्रभारी पुलिस अवर निरीक्षक मोहन कुमार सिंह और पुलिस अवर निरीक्षक विकास कुमार के नेतृत्व में सशस्त्र बल को रांची-गुमला सीमा पर भेजा गया. सीमावर्ती इलाके में जैसे ही दोनों जिलों की संयुक्त पुलिस टीमों का सामना इन संदिग्धों से हुआ, तीनों ने खुद को झांगुर ग्रुप का प्रमुख और सक्रिय सदस्य बताया. अपराधियों ने पुलिस अधिकारियों के समक्ष स्पष्ट किया कि वे झारखंड सरकार की पुनर्वास और आत्मसमर्पण नीति से बेहद प्रभावित हैं और अपराध का रास्ता छोड़ समाज की मुख्य धारा से जुड़ना चाहते हैं. इसके बाद तीनों कुख्यात अपराधियों ने बिना किसी प्रतिरोध के संयुक्त पुलिस टीम के सामने अपने हथियार डाल दिए और आत्मसमर्पण कर दिया.
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5 लाख का इनामी रामदेव उरांव है आत्मसमर्पण करने वाला
आत्मसमर्पण करने वाले मुख्य अपराधी की पहचान झांगुर ग्रुप के सरगना रामदेव उरांव के रूप में हुई है, जो गुमला जिले के बिशुनपुर थाना अंतर्गत देवरागानी (पो० सातो) का रहने वाला है. रामदेव उरांव पर सरकार ने 5 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. उसके साथ आत्मसमर्पण करने वाले गिरोह के दो अन्य सक्रिय सदस्यों में उसी के गांव का 24 वर्षीय प्रसाद उरांव (पिता बालदेव उरांव) और 23 वर्षीय सुबास उरांव (पिता मुन्ना उरांव) शामिल हैं. इन दोनों युवाओं को गिरोह के सक्रिय रणनीतिकारों के रूप में देखा जाता था, जो हाल के वर्षों में कई आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने में रामदेव के साथ शामिल रहे थे.
स्वचालित हथियार और भारी मात्रा में जिंदा कारतूस बरामद
आत्मसमर्पण के दौरान पुलिस टीम ने इन अपराधियों के पास से अत्याधुनिक और घातक हथियारों का जखीरा बरामद किया है. जब्त किए गए सामानों में एक स्वचालित हथियार शामिल है, जिसकी बॉडी पर A56-2 571072 अंकित है, साथ ही इसके साथ एक मैगजीन और 30 चक्र जिंदा कारतूस बरामद किए गए हैं. इसके अलावा गिरोह के पास से एक और स्वचालित एसएलआर (SLR) राइफल, उसकी एक मैगजीन तथा 15 चक्र जिंदा कारतूस भी जप्त किए गए हैं. इन हथियारों का इस्तेमाल यह गिरोह रंगदारी वसूलने और सीमावर्ती क्षेत्रों में अपनी दहशत कायम रखने के लिए करता था.
तीनों अपराधियों का लंबा और संगीन आपराधिक इतिहास
झांगुर ग्रुप के सरगना रामदेव उरांव का आपराधिक इतिहास बेहद खौफनाक रहा है, जिसके खिलाफ विभिन्न जिलों में हत्या, अपहरण, रंगदारी और आर्म्स एक्ट के करीब 29 गंभीर मामले दर्ज हैं. रामदेव के खिलाफ वर्ष 2000 में घाघरा थाने में हत्या और लूट का पहला मामला (काण्ड सं0-52/2000) दर्ज हुआ था, जिसके बाद उसने बिशुनपुर, घाघरा और डुमरी थानों में हत्या, लेवी (रंगदारी) और आर्म्स एक्ट के मुकदमों की झड़ी लगा दी. हाल ही में वर्ष 2024 में बिशुनपुर में हत्या (काण्ड सं0-07/24) और जनवरी 2025 में नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज कांड संख्या-03/25 में भी वह मुख्य आरोपी था. वहीं, उसके साथी प्रसाद उरांव पर वर्ष 2018 में हत्या व अपहरण और 2025 में बीएनएस की संगीन धाराओं के तहत दो मामले दर्ज हैं, जबकि सुबास उरांव भी वर्ष 2025 में दर्ज बिशुनपुर थाना के उसी काण्ड संख्या-03/25 में सह-आरोपी रहा है.
अभियान कौन कौन लोग रहे शामिल
इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण अभियान को सफलता पूर्वक अंजाम देने वाली संयुक्त टीम में रांची और गुमला जिले के कई जांबाज अधिकारी और सशस्त्र बल शामिल थे. रांची की ओर से बेड़ो के पुलिस उपाधीक्षक दीपक कुमार, अंचल पुलिस निरीक्षक उत्तम कुमार उपाध्याय, बेड़ो थाना प्रभारी मोहम्मद कफील अहमद, पुलिस अवर निरीक्षक उत्तम कुमार पासवान और पुलिस अवर निरीक्षक शौकत अली ने मुख्य भूमिका निभाई. वहीं, गुमला जिले की ओर से घाघरा थाना प्रभारी सह पुलिस अवर निरीक्षक मोहन कुमार सिंह और पुलिस अवर निरीक्षक विकास कुमार ने अपनी टीम और दोनों जिलों के सशस्त्र बल के जवानों के साथ मिलकर इस पूरे आत्मसमर्पण अभियान को बिना किसी चूक के सुरक्षित और सफल बनाया.
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