Jharkhand LPG Crisis 2026, रांची/सरायकेला (शचिंद्र दाश की रिपोर्ट): झारखंड के कई इलाकों में रसोई गैस की आपूर्ति अब तक सामान्य नहीं हो सकी है, जिसके कारण आम उपभोक्ताओं को भारी दिक्कतों और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है. विशेषकर रांची और सरायकेला जिलों में स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है, जहां बुकिंग के बावजूद उपभोक्ताओं को समय पर गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है. व्यवस्था की इस विफलता का सबसे बड़ा असर होम डिलीवरी सेवा पर पड़ा है, समय पर लोगों को गैस सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है. इस वजह से अब लोग गैस एजेंसियों और गोदामों के बाहर लंबी कतारें लगाने को मजबूर हैं.
रात एक बजे से ‘सिलेंडर’ की पहरेदारी
राजधानी रांची के धुमसाटोली (चुटिया) स्थित इंद्रप्रस्थ गैस एजेंसी के बाहर शनिवार को हृदय विदारक दृश्य देखने को मिला, जहां कड़ी धूप और थकान के बीच सैकड़ों उपभोक्ता घंटों अपनी बारी का इंतजार करते रहे. एजेंसी द्वारा नियमित होम डिलीवरी न किये जाने के कारण लोग रात एक बजे से ही कतारों में लग गए थे. थकान और भूख से बेहाल कई लोग अपने सिलेंडर सड़क पर ही छोड़कर आसपास की छांव में बैठने को मजबूर दिखे, जबकि अपनी पहचान बनाए रखने के लिए किसी ने सिलेंडर पर पत्थर रखा तो किसी ने कपड़ा बांध दिया. इससे पहले महादेव मंडप के पास आक्रोशित जनता ने गैस न मिलने के विरोध में लगभग छह घंटे तक सड़क जाम कर अपना विरोध दर्ज कराया था.
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सरायकेला: जनप्रतिनिधि पहुंचे गोदाम, कालाबाजारी पर सख्त रुख
सरायकेला जिला मुख्यालय में बढ़ते गैस संकट और जनता के आक्रोश को देखते हुए, नगर पंचायत अध्यक्ष मनोज कुमार चौधरी स्वयं गैस गोदाम पहुंचे. उन्होंने उपभोक्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से सुना और गैस अधिकारियों के साथ बैठक कर सोमवार तक आपूर्ति सुचारु करने का निर्देश दिया. अध्यक्ष ने इस संकट के लिए केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जमीनी हकीकत दावों से कोसों दूर है. उन्होंने प्रशासन को कालाबाजारी रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करने और नियमित छापेमारी करने का सुझाव दिया है, ताकि जरूरतमंदों को उनका हक मिल सके.
व्यवसाय पर भी संकट के बादल
गैस की इस कमी ने केवल रसोई का बजट ही नहीं बिगाड़ा, बल्कि होटल, ठेला और छोटे रेस्तरां संचालकों की आजीविका पर भी गहरा प्रहार किया है. कमर्शियल गैस सिलेंडरों की अनुपलब्धता के कारण कई छोटे व्यवसाय बंद होने की कगार पर हैं, जिससे स्वरोजगार करने वाले वर्ग के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है. फिलहाल, उपभोक्ताओं की नजरें अब सोमवार पर टिकी हैं, क्योंकि प्रशासन और एजेंसियों ने आपूर्ति सामान्य करने का आश्वासन दिया है, लेकिन पिछले एक महीने के कड़वे अनुभव ने जनता के विश्वास को झकझोर कर रख दिया है.
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