रांची : राजधानी रांची के बगईचा में रविवार को 'झारखंड जनाधिकार महासभा' और विभिन्न जनसंगठनों द्वारा परिसीमन (Delimitation) और एसआईआर (SIR) के मुद्दों पर एक राज्य स्तरीय चर्चा का आयोजन किया गया. बैठक में शामिल विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित करते हुए कहा कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में 100 फीसदी आदिवासी आरक्षण और राज्य में पर्याप्त दलित प्रतिनिधित्व के बिना झारखंडवासियों को परिसीमन किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं है. वक्ताओं ने चेतावनी दी कि वर्तमान आधार पर परिसीमन होने से राज्य में आदिवासियों और दलितों की राजनीतिक आवाज कमजोर हो जाएगी.
SIR से भारी परेशानी, खतियान न होने से दलित और गरीब बेहाल
बैठक के दौरान पश्चिमी सिंहभूम, खूंटी, लातेहार, गोड्डा, चतरा, पलामू और बोकारो समेत कई जिलों से आए प्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्र के एसआईआर (SIR) अनुभव साझा किए. प्रतिनिधियों ने बताया कि ASDD और 'लॉजिकल डिस्क्रिपेन्सी' (तार्किक विसंगति) के नाम पर बड़े पैमाने पर नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण और गरीब जनता में भारी अफरा-तफरी का माहौल है. खतियान और दस्तावेज न होने के कारण सबसे ज्यादा नाम आदिवासी, मूलवासी, दलित, अल्पसंख्यक और महिलाओं के कट रहे हैं. वक्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रक्रिया की जटिलता के कारण देश में 'दो दर्जे के नागरिक' बनाए जा रहे हैं.
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'आबादी के आधार पर परिसीमन से आदिवासियों को नुकसान'
चर्चा में वक्ताओं ने कहा कि झारखंड में लगातार हुए पलायन, उच्च मृत्यु दर और भारी संख्या में बाहरी आबादी के बसने के कारण यदि केवल जनसंख्या को आधार बनाकर परिसीमन किया गया, तो आदिवासी प्रतिनिधित्व में भारी कमी आएगी. अनारक्षित सीटों पर राजनीतिक दल आदिवासी या दलित उम्मीदवारों को टिकट नहीं देते, जिससे गैर-अनुसूचित क्षेत्रों में उनका प्रभाव न के बराबर हो जाता है. महासभा ने मांग रखी कि पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के सभी संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों को 100% आदिवासी आरक्षित घोषित किया जाए और पर्याप्त दलित आबादी वाले क्षेत्रों को एससी (SC) आरक्षित किया जाए.
ग्राम सभा सत्यापित वंशावली के आधार पर जुड़े नाम
बैठक के समापन सत्र में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. जनाधिकार महासभा ने मांग की है कि एसआईआर (SIR) की अंतिम समय सीमा तब तक बढ़ाई जाए जब तक सभी नोटिसों का निष्पादन न हो जाए. भूमिहीन दलितों व वंचित परिवारों के नाम स्वयं-सत्यापित या ग्राम सभा से सत्यापित वंशावली के आधार पर मतदाता सूची में जोड़े जाएं. इसके साथ ही परिसीमन, एसआईआर और हालिया MMDR संशोधन अधिनियम के खिलाफ जल्द ही राज्यभर में धरना-प्रदर्शन और जनांदोलन की घोषणा की जाएगी. कार्यक्रम में आदिवासी अधिकार मंच, हासा और भाषा बचाओ संगठन, आदिवासी विमेंस नेटवर्क, ऐपवा, वन अधिकार मंच और यूएमएफ समेत कई संगठनों के प्रतिनिधि और वक्ता मौजूद रहे.
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