Jharkhand High Court: झारखंड हाइकोर्ट ने गढ़वा जिले के श्री बंशीधरनगर स्थित ऐतिहासिक राजा पहाड़ी शिव मंदिर धाम के प्रशासनिक नियंत्रण से जुड़े मामले में कड़ा रुख अपनाया है. जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने सुनवाई के दौरान श्री बंशीधरनगर के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) से तीखे सवाल किए. अदालत ने पूछा कि एक वैधानिक और निबंधित ट्रस्ट को समाप्त कर अपनी कमेटी गठित करने का अधिकार उन्हें किस कानून ने दिया है. अदालत के इस सवाल का एसडीओ स्पष्ट जवाब नहीं दे सके.
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए गढ़वा के डीसी
मामले की गंभीरता को देखते हुए गढ़वा के उपायुक्त और श्री बंशीधरनगर के एसडीओ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत के समक्ष उपस्थित हुए. सुनवाई के दौरान अदालत के सवालों के बाद गढ़वा उपायुक्त ने अपनी गलती स्वीकार की. उन्होंने माना कि की गयी कार्रवाई उनके क्षेत्राधिकार से बाहर थी और इस मामले में गलती हुई है.
ट्रस्ट को दरकिनार कर बनायी गयी थी नयी कमेटी
मामला राजा पहाड़ी शिव मंदिर के प्रशासनिक नियंत्रण और मंदिर के पुजारी के सामान को बाहर निकालने तथा उसकी जब्ती से जुड़ा है. याचिका में एसडीओ की ओर से की गयी इस कार्रवाई को चुनौती दी गयी है. याचिका के अनुसार, राजा पहाड़ी शिव मंदिर के रखरखाव और संचालन के लिए एक निबंधित ट्रस्ट विधिवत रूप से कार्यरत है. इसके बावजूद स्थानीय लोगों की शिकायत के आधार पर एसडीओ ने कार्रवाई करते हुए ट्रस्ट को दरकिनार कर दिया.
एसडीओ पर नयी समिति गठित करने का आरोप
आरोप है कि एसडीओ ने न केवल एक नयी प्रशासनिक समिति का गठन किया, बल्कि स्वयं उस समिति में सचिव की भूमिका भी संभाल ली. इसी कार्रवाई को लेकर ट्रस्ट की ओर से हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया. याचिका में प्रशासनिक कार्रवाई को चुनौती देते हुए मंदिर के संचालन और प्रबंधन पर ट्रस्ट के अधिकार को लेकर सवाल उठाया गया है.
अदालत ने पूछा, किस कानून के तहत की कार्रवाई?
सुनवाई के दौरान जस्टिस आनंद सेन ने ऑनलाइन उपस्थित अधिकारियों से यह जानना चाहा कि आखिर किस कानून के तहत एक वैधानिक और निबंधित ट्रस्ट को समाप्त कर उसकी जगह नयी कमेटी बनायी जा सकती है. अदालत ने स्पष्ट रूप से पूछा कि एसडीओ को ऐसी कार्रवाई करने का अधिकार किस प्रावधान से प्राप्त हुआ. अदालत के सवाल पर एसडीओ जवाब नहीं दे सके. इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए गढ़वा उपायुक्त ने अदालत के समक्ष अपनी गलती स्वीकार की. उन्होंने कहा कि संबंधित कार्रवाई वास्तव में उनके क्षेत्राधिकार से बाहर थी.
गलत आदेश निरस्त करने का आश्वासन
सुनवाई के दौरान गढ़वा उपायुक्त ने अदालत को आश्वासन दिया कि गलत आदेश को निरस्त किया जायेगा और पहले की स्थिति बहाल की जायेगी. उपायुक्त के इस आश्वासन को देखते हुए अदालत ने फिलहाल मामले की सुनवाई स्थगित कर दी. अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए एक सप्ताह बाद की तारीख निर्धारित की है. अगली सुनवाई में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन की ओर से गलत आदेश को निरस्त करने और पूर्व स्थिति बहाल करने के संबंध में क्या कदम उठाये जाते हैं.
करीब 100 वर्षों से आस्था का केंद्र है मंदिर
राजा पहाड़ी शिव मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है. याचिका में मंदिर को स्थानीय श्रद्धालुओं की करीब 100 वर्षों की मेहनत और आस्था का प्रतीक बताया गया है. लंबे समय से मंदिर के रखरखाव और संचालन के लिए निबंधित ट्रस्ट के माध्यम से व्यवस्था संचालित होने की बात कही गयी है. ऐसे में ट्रस्ट को हटाकर नयी प्रशासनिक समिति गठित करने की कार्रवाई ने विवाद को जन्म दिया. खास तौर पर एसडीओ के स्वयं नयी समिति में सचिव बनने के आरोप ने मामले को और गंभीर बना दिया.
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अगली सुनवाई पर रहेगी नजर
हाइकोर्ट की कड़ी टिप्पणी और उपायुक्त की ओर से गलती स्वीकार किये जाने के बाद अब प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की नजर है. अदालत के समक्ष गलत आदेश निरस्त करने और स्थिति बहाल करने का आश्वासन दिया गया है. अब अगली सुनवाई में प्रशासन द्वारा उठाये गये कदमों की स्थिति स्पष्ट होगी. फिलहाल, हाइकोर्ट ने मामले को एक सप्ताह के लिए स्थगित किया है. इस पूरे प्रकरण में अदालत का मुख्य सवाल अधिकार क्षेत्र और कानूनी आधार को लेकर है. यानी सरकारी कुर्सी मिल जाना और उस कुर्सी से हर चीज करने का अधिकार मिल जाना, दोनों अलग-अलग बातें हैं. अदालत ने फिलहाल इसी अंतर की याद प्रशासन को काफी स्पष्ट तरीके से दिला दी है.
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