रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट
रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने चतरा के ईटखोरी स्थित ऐतिहासिक मां भद्रकाली मंदिर विकास समिति को भंग करने के हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर अपना फैसला सुनाया है. जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रार्थी के आग्रह पर याचिका वापस लेने की अनुमति दे दी और इसे खारिज कर दिया. इसके साथ ही अदालत ने इस मामले में दिए गए अपने पूर्व के अंतरिम आदेश को भी वापस ले लिया है, जिससे अब न्यास बोर्ड का आदेश प्रभावी हो सकेगा.
प्रार्थी के आग्रह पर कोर्ट ने वापस ली याचिका, पहले के आदेश हटे
मामले की सुनवाई के दौरान प्रार्थी (मां भद्रकाली मंदिर विकास समिति के सदस्य योगेंद्र सिंह) की ओर से अदालत से याचिका वापस लेने का आग्रह किया गया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया. अदालत के इस फैसले से पूर्व में जारी किए गए सभी अंतरिम आदेश स्वतः समाप्त हो गए हैं. इस मामले में प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता अभय कुमार मिश्र ने पैरवी की, जबकि झारखंड राज्य हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड का पक्ष अधिवक्ता भरत कुमार ने मजबूती से कोर्ट के समक्ष रखा.
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क्या था पूरा विवाद और हाईकोर्ट का पिछला आदेश?
उल्लेखनीय है कि झारखंड हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड ने एक आदेश जारी कर मां भद्रकाली मंदिर विकास समिति को भंग कर दिया था और उसकी जगह नई समिति के गठन की प्रक्रिया शुरू की थी. न्यास बोर्ड के इस फैसले को चुनौती देते हुए समिति के सदस्य योगेंद्र सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. इस विवाद के बीच हाईकोर्ट ने अपने पिछले अंतरिम आदेशों के तहत मंदिर की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए कई निर्देश दिए थे. अदालत ने अपने पूर्व के आदेश में संशोधन करते हुए चतरा के प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश की देखरेख में मंदिर विकास समिति का कार्य संचालित करने का निर्देश दिया था. इससे भी पहले कोर्ट ने मंदिर के वित्तीय संचालन और फंड की देखरेख की पूरी जिम्मेदारी चतरा के उपायुक्त (DC) को सौंपी थी. अब याचिका खारिज होने के बाद ये सभी अंतरिम व्यवस्थाएं समाप्त हो गई हैं.
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