Jharkhand Election: 3 बार के विधायक बैरागी उरांव साइकिल और बैलगाड़ी से करते थे चुनाव प्रचार

Jharkhand Election: गुमला विधानसभा से 3 बार विधायक बैरागी उरांव साइकल और बैलगाड़ी से चुनाव प्रचार करते थे. उस वक्त शहर में केवल 2 लोगों के पास चार पहिया वाहन थे.

Jharkhand Election, गुमला : बैरागी उरांव गुमला विधानसभा क्षेत्र से तीन बार चुनाव जीत कर विधायक बने हैं. वर्ष 1943 में जन्मे बैरागी उरांव ने केओ कॉलेज गुमला में राजनीतिशास्त्र के प्रोफेसर रहते हुए चुनाव जीता था. वे 1972, 1980 व 1985 में चुनाव जीत कर तीन बार विधायक बने. श्री उरांव बताते हैं कि 1972 के चुनाव के समय गुमला में चारपहिया गाड़ी शहर में सिर्फ दो लोगों (चंदर साव व घुड़ा भगत) के पास थी. उनके पास जीप थी. वे एक दिन के चुनाव प्रचार में गाड़ी देने के लिए 60 रुपये भाड़ा लेते थे.

गुमला विधानसभा में तीन प्रखंड थे

इस वजह से मैंने साइकिल व बैलगाड़ी से प्रचार करना तय किया. उस समय गुमला विधानसभा में गुमला, कामडारा व बसिया प्रखंड आते थे. कॉलेज में प्रोफेसर होने की वजह से मैं गुमला में ही रहता था. जबकि, मेरा घर चैनपुर प्रखंड में है. गुमला से मैं बसिया व कामडारा प्रखंड के कई दुर्गम गांवों में साइकिल से प्रचार करने जाता. उस दौरान 60 से 70 किमी दूर तक तय कर प्रचार करने निकल जाता था. रात होने पर गांव में ही रुक जाते थे.

मेहमान बनाने के लिए लोग रहते थे आतुर

उस समय प्रचार करने का मजा ही अलग था. जिस गांव में जाते थे, लोग मेहमान बनाने को आतुर रहते थे. उस समय झारखंड पार्टी व जनसंघ भी बड़ी पार्टियां थीं. लेकिन, साइकिल से गांवों में लोगों के बीच पहुंचने पर वह मुझे अपना मान रहे थे. तब विधायक फंड की व्यवस्था नहीं थी. इसके बावजूद प्रशासन से मिलकर मुझे क्षेत्र के विकास के लिए कई काम करने में सफलता मिली.

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2009 में प्रचार करने लोहरदगा आये थे आडवाणी

लोहरदगा के ललित नारायण स्टेडियम में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी वर्ष 2009 में आये थे. उनकी चुनावी सभा में काफी भीड़ उमड़ी थी. लोगों में जबरदस्त उत्साह था. इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किये गये थे. मंच में उनके साथ रघुवर दास, सरयू राय, सुदर्शन भगत, समीर उरांव सहित अन्य नेता मौजूद थे.

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By Durjay paswan

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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