झारखंड के लक्की का स्टार्टअप ‘हैकरएड’ बचा रहा है लोगों को साइबर फ्रॉड से, CM हेमंत भी कर चुके हैं सम्मानित

लक्की की कंपनी नवंबर 2019 से झारखंड पुलिस के साइबर सेल से जुड़कर उसकी मदद कर रही है. इसके तहत वैसे भुक्तभोगी जिनके साथ साइबर फ्रॉड हुआ हो उसके समाधान में जुटी है

By Prabhat Khabar | March 19, 2023 3:20 AM

रांची, अभिषेक रॉय: साइबर सिक्यूरिटी इन दिनों एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. हरदिन आमलोग साइबर फ्रॉड, सेक्सटॉर्शन, डिजिटल ब्लैकमेलिंग के शिकार हो रहे हैं. इनसे बचने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा हैं. पुंदाग रांची के लक्की एरॉन सोरेन भी लोगों को साइबर फ्रॉड से बचाने के लिए स्टार्टअप ‘हैकरएड प्रा लि’ की शुरुआत की है. अक्तूबर 2019 में शुरू हुआ स्टार्टअप विभिन्न कंपनियों को साइबर सुरक्षा से बचाव के उपाय के साथ लोगों को कंसल्टेंसी उपलब्ध करा रही हैं.

साथ ही कंपनी नवंबर 2019 से झारखंड पुलिस के साइबर सेल के साथ जुड़कर उसकी मदद कर रही है. इसके तहत वैसे भुक्तभोगी जिनके साथ साइबर फ्रॉड और फिशिंग अटैक हुआ हो उसके समाधान में कंपनी जुटी है. लक्की कहते हैं कि बीते तीन वर्षों में ऑनलाइन बैंकिंग साइबर फ्रॉड के शिकार दर्जनों लोगों को मूल रकम दिला चुके हैं. वहीं, कंपनी अब युवाओं को हैकाथॉन, एथिकल हैकिंग, कैप्चर दी फ्लैग (सीटीएफ) जैसे मेगा इवेंट के लिए तैयार करने का काम कर रही हैं.

माइक्रोसॉफ्ट और कैसपर्सकी के लिए खोज चुके है बग :

हैकरएड के जरिये लक्की बड़े संस्थानों के लिए ””बग बाउंटी”” यानी वेबसाइट की कमजोरियों को तलाश कर पहचान करने का काम कर रहे हैं. 2018 में माइक्रोसॉफ्ट के लिए बग ढूंढने का काम किया था. इसके लिए उन्हें कंपनी से 1000 डॉलर का पुरस्कार दियाथा. इसी वर्ष साइबर सिक्यूरिटी कंपनी ””कैसपर्सकी”” के लिए बग ढूंढा था.

लक्की ने बताया कि पहले कैसपर्सकी के एक ही सिरियल-की से कई बार सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करना आसान था, जबकि इसकी पहचान करने के बाद कंपनी से इसे इ-मेल के जरिये लिंक कर सिक्यूरिटी को मजबूत किया. इस बग की तलाश के लिए कंपनी की ओर से लक्की को 1500 डॉलर मिले थे. लक्की ने कहा कि इससे आत्मविश्वास बढ़ा. साथ ही कंपनी की शुरुआत के लिए रकम भी जोड़ सकें.

सोशल मीडिया एकाउंट हैक होने से मिली प्रेरणा :

लक्की ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा संत फ्रांसिस स्कूल से, 12वीं संत जेवियर्स कॉलेज और केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई बीआइटी सिंदरी से पूरी कर चुके हैं. उन्होंने बताया कि स्कूल में पढ़ने के दौरान सोशल मीडिया हैंडल हैक हुआ था. इसके बाद से हैकिंग के प्रति रुचि बढ़ी. समय के साथ इस दिशा में जानकारी लेना शुरू किया. कॉलेज में पढ़ाई के दौरान विभिन्न हैकाथॉन में हिस्सा लेकर खुद को बतौर एथिकल हैकर के रूप में विकसित किया.

अब लक्की अपनी कंपनी के जरिये स्कूल और कॉलेज के युवाओं को इसकी जानकारी दे रहे हैं. इसके लिए वर्ष 2020 में सीएम हेमंत सोरेन भी उन्हें सम्मानित कर चुके हैं. लक्की कहते है कि साइबर सिक्यूरिटी के क्षेत्र में प्रोफेशनल एथिकल हैकर की मांग बढ़ रही हैं. हैकरएड अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पेनटेक्सटिंग और ऑटोमोबाइल पेनटेस्टिंग को मजबूत करने में जुटी हुई हैं.

सॉफ्टवेयर टूल्स साइबर फ्रॉड से बचाता है

लक्की कहते हैं कि उनका काम बतौर ‘पेनटेस्टर’ का हैं. यानी ऑनलाइन हैकरों की ओर से वेबसाइट या इनके इस्तेमाल पर मैलवेयर के हमलों के खात्मे के साथ कमजोरियों, खतरों और जोखिमों की खोज करना हैं. इसके लिए कई सॉफ्टवेयर और एंड-टू-एंड बैकअप टूल्स तैयार किया है. इसकी मदद और परीक्षण से हैकर तक लिंक के जरिये पहुंचने, उसकी पहचान उजागर करने और सटीक कार्रवाई करने का काम हो रहा है.

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