Jharkhand Chunav: लोकसभा चुनाव 2024 में हार चुके 12 प्रत्याशी भी आजमा रहे किस्मत

Jharkhand Chunav: लोकसभा चुनाव 2024 में हार का सामना कर चुके कम से के एक दर्जन प्रत्याशी झारखंड विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं. कौन-कहां से लड़ रहा, जानें.

Jharkhand Chunav 2024|रांची, सुनील कुमार झा : लोकसभा चुनाव 2024 में हार का सामना कर चुके 12 प्रत्याशी विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं. इनमें से 5 ऐसे हैं, जिन्होंने पिछले चुनाव में जीत दर्ज की थी. गीता कोड़ा, सीता सोरेन, प्रदीप यादव, समीर उरांव, समीर मोहंती, केएन त्रिपाठी, ममता भुईयां, जेपी पटेल, मथुरा महतो, जयराम महतो, विनोद सिंह और देवेंद्र महतो शामिल हैं.

लोकसभा हारे सबसे अधिक 3 उम्मीदवारों को भाजपा का टिकट

इनमें से तीन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), तीन कांग्रेस, दो झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), एक समाजवादी पार्टी, दो झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) और एक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी लेनिनवादी लिबरेशन (भाकपा माले-लिबरेशन) के प्रत्याशी हैं. इसके अलावा भाजपा ने तीन पूर्व सांसदों को टिकट दिया है. इनमें लोहरदगा के पूर्व सांसद सुदर्शन भगत व दुमका के पूर्व सांसद सुनील सोरेन शामिल हैं. इसके अलावा गिरिडीह के पूर्व सांसद रवींद्र पांडेय को भी भाजपा ने टिकट दिया है.

2019 में जीते ये 5 लोग हार गए थे लोकसभा 2024 का चुनाव

आम चुनाव हारने वाले जो प्रत्याशी झारखंड विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं, उनमें से पांच उम्मीदवारों ने पिछले विधानसभा चुनाव (2019) में जीत दर्ज की थी. इनमें पोड़ैयाहाट से प्रदीप यादव, बहरागोड़ा से समीर मोहंती, मांडू से जेपी पटेल, टुंडी से मथुरा महतो और बगोदर से विनोद सिंह शामिल हैं. वर्ष 2019 में जामा से सीता सोरेन विधायक चुनी गयीं थीं, इस वर्ष सीता सोरेन जामताड़ा से चुनाव लड़ रहीं हैं. गीता कोड़ा, ममता भुईयां, जयराम महतो व देवेंद्रनाथ महतो ने पिछला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था. केएन त्रिपाठी चुनाव हार गये थे.

समीर मोहंती : बहरागोड़ा में भाजपा को मिली थी बढ़त

बहरागोड़ा से झामुमो ने अपने वर्तमान विधायक समीर मोहंती को एक बार फिर से मैदान में उतारा है. समीर मोहंती ने इस वर्ष हुए आम चुनाव में जमशेदपुर से झामुमो के टिकट पर चुनाव लड़ा था. लोकसभा चुनाव में बहरागोड़ा सीट पर भाजपा को बढ़त मिली थी.

गीता कोड़ा : जगन्नाथपुर में झामुमो रहा था आगे

जगन्नाथपुर विधानसभा सीट से गीता कोड़ा भाजपा की प्रत्याशी हैं. गीता कोड़ा ने पश्चिमी सिंहभूम लोकसभा सीट से इस वर्ष भाजपा के टिकट से चुनाव लड़ा था. जगन्नाथपुर सीट पर भाजपा को बढ़त नहीं मिली थी. इस सीट पर झामुमो आगे रहा था.

प्रदीप यादव : पोड़ैयाहाट में कांग्रेस को नहीं मिली थी बढ़त

पोड़ेयाहाट से कांग्रेस ने वर्तमान विधायक प्रदीप यादव को टिकट दिया है. प्रदीप यादव गोड्डा से इस वर्ष के आमचुनाव में पार्टी के प्रत्याशी थे. पोड़ैयाहाट विधानसभा सीट गोड्डा लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है. इस सीट पर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को लीड नहीं मिली थी.

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समीर उरांव : बिशुनपुर में भाजपा रह गयी थी पीछे

भाजपा ने बिशुनपुर से पूर्व राज्यसभा सांसद समीर उरांव को मैदान में उतारा है. समीर लोकसभा चुनाव में लोहरदगा सीट से पार्टी के प्रत्याशी थे. लोकसभा चुनाव में इस सीट पर इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी को बढ़त मिली थी. भाजपा बिशुनपुर सीट पर बढ़त नहीं बना सकी थी.

केएन त्रिपाठी : डाल्टेनगंज में भाजपा को मिली थी बढ़त

डाल्टेनंगज से कांग्रेस ने फिर केएन त्रिपाठी को चुनाव मैदान में उतारा है. यह विधानसभा सीट पलामू लोकसभा के अंतर्गत आती है. यह लोकसभा सीट इंडिया गठबंधन के तहत राजद को मिली थी. गठबंधन के प्रत्याशी को बढ़त नहीं मिली थी. भाजपा को यहां बढ़त मिली थी.

ममता भुईयां : छतरपुर से राजद रह गया था पीछे

पलामू लोकसभा सीट से इस वर्ष राजद ने ममता भुईयां को टिकट दिया था. विधानसभा चुनाव में ममता भुईयां समाजवादी पार्टी के टिकट पर छतरपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रही हैं. लोकसभा चुनाव में छतरपुर में राजद को बढ़त नहीं मिली थी.

जेपी पटेल : मांडू में कांग्रेस प्रत्याशी को नहीं मिल पायी थी बढ़त

मांडू सीट हजारीबाग लोकसभा में आती है. इस सीट से कांग्रेस ने पिछले चुनाव में जीत दर्ज करनेवाले जेपी पटेल को मैदान में उतारा है. जेपी पटेल इस वर्ष लोकसभा चुनाव के पूर्व भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गये थे. कांग्रेस को यहां बढ़त नहीं मिली थी.

मथुरा प्रसाद महतो : टुंडी में झामुमो रहा था आगे

टुंडी विधानसभा सीट से झामुमो ने अपने विधायक मथुरा महतो को फिर से प्रत्याशी बनाया है. मथुरा महतो इस वर्ष लोकसभा चुनाव में गिरिडीह से चुनाव लड़े थे. वह लोकसभा चुनाव तो हार गये, पर उनके विधानसभा क्षेत्र में झामुमाे को बढ़त मिली थी.

विनोद सिंह : बगोदर में भाजपा को मिली थी बढ़त

बगोदर सीट कोडरमा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है. इस वर्ष हुए लोकसभा चुनाव में बगोदर के विधायक विनोद सिंह को भाकपा माले ने अपना प्रत्याशी बनाया था. लोकसभा चुनाव में बगोदर में भाजपा को बढ़त मिली थी. माले ने सीट से फिर विनोद सिंह को प्रत्याशी बनाया है.

सीता सोरेन : जामताड़ा में झामुमो, जामा में भाजपा को मिली बढ़त

जामताड़ा विधानसभा सीट से सीता सोरेन भाजपा की प्रत्याशी हैं. इस वर्ष दुमका से उन्होंने भाजपा से लोकसभा का चुनाव लड़ा था. चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. पिछले विधानसभा चुनाव में सीता सोरेन जामा से विधायक चुनी गयी थीं. लोकसभा चुनाव से पूर्व झामुमो छोड़ कर भाजपा में शामिल हो गयी थी. जामताड़ा व जामा दोनों विधानसभा क्षेत्र दुमका लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आते हैं. आमचुनाव में जामताड़ा से झामुमो को बढ़त मिली थी. जबकि जामा में भाजपा आगे थी.

जयराम महतो : डुमरी में आजसू और झामुमो दोनों रह गये थे पीछे

डुमरी गिरिडीह लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है. इस वर्ष आमचुनाव में इस सीट से आजसू प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी. डुमरी विधानसभा सीट से आजसू व झामुमो दोनों के प्रत्याशी से अधिक वोट निर्दलीय प्रत्याशी जयराम महतो को मिले थे. जयराम महतो डुमरी से विधानसभा का चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं रांची लोकसभा सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले देवेंद्रनाथ महतो सिल्ली विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. लोकसभा चुनाव में सिल्ली विधानसभा में वह दूसरे स्थान पर रहे थे.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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