झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव: महेश तिवारी को हटाने का आदेश रद्द, चुनाव न्यायाधिकरण को सौंपा गया मामला

झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव विवाद में हाई पावर्ड कमेटी ने महेश तिवारी की उम्मीदवारी रद्द करने संबंधी रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए निरस्त कर दिया है. मामले का अंतिम फैसला अब चुनाव न्यायाधिकरण करेगा.


Jharkhand High Court: झारखंड स्टेट बार काउंसिल चुनाव से जुड़े बहुचर्चित विवाद में हाई पावर्ड इलेक्शन सुपरवाइजरी कमेटी ने बड़ा फैसला सुनाया है. पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस सुधांशु धूलिया की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति ने महेश तिवारी की उम्मीदवारी रद्द करने संबंधी रिटर्निंग ऑफिसर के आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए निरस्त कर दिया है.

20 अगस्त को दिया गया था आदेश

हालांकि, समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि तिवारी दोषसिद्धि के बाद सदस्य बने रह सकते हैं या नहीं, इसका अंतिम फैसला अब चुनाव न्यायाधिकरण करेगा. यह आदेश 20 अगस्त 2026 को पारित किया गया. समिति में पूर्व पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रवि शंकर झा और वरिष्ठ अधिवक्ता वी. गिरी भी सदस्य हैं.

क्या है पूरा मामला

महेश तिवारी झारखंड स्टेट बार काउंसिल के सदस्य पद के चुनाव में उम्मीदवार थे. मतगणना के दौरान 30 मार्च 2026 को रांची की अदालत ने उन्हें भारतीय दंड संहिता की धाराओं 323, 341, 354, 504 और 506 के तहत दोषी ठहराया था. इसके बावजूद 21 अप्रैल को उन्होंने निर्वाचित होने के लिए आवश्यक कोटा हासिल कर लिया और उन्हें विजयी घोषित कर दिया गया. लेकिन 24 अप्रैल को मुख्य रिटर्निंग ऑफिसर ने उनकी दोषसिद्धि का हवाला देकर उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी और उनके स्थान पर अगले सबसे अधिक मत पाने वाले प्रयाग महतो को निर्वाचित घोषित कर दिया. तिवारी ने पहले हाई पावर्ड इलेक्शन कमेटी में अपील की, जिसे 18 मई को खारिज कर दिया गया. इसके बाद मामला बार काउंसिल ऑफ इंडिया पहुंचा, जिसने 2 जून को इसे हाई पावर्ड सुपरवाइजरी कमेटी को भेज दिया. बाद में प्रयाग महतो सुप्रीम कोर्ट पहुंचे और सर्वोच्च अदालत ने भी 13 जुलाई को विवाद इसी समिति के पास भेज दिया.

रिटर्निंग ऑफिसर की शक्ति पर अहम टिप्पणी

समिति ने अपने आदेश में कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया नियम, 2023 के तहत रिटर्निंग ऑफिसर नामांकन पत्र स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है, लेकिन एक बार वैध रूप से नामांकन स्वीकार हो जाने और मतगणना शुरू होने के बाद वह किसी उम्मीदवार को बीच में अयोग्य घोषित कर चुनाव से बाहर नहीं कर सकता. समिति ने माना कि महेश तिवारी को हटाने का 24 अप्रैल का आदेश अधिकार क्षेत्र से बाहर था. इसी आधार पर 24 अप्रैल और 18 मई के दोनों आदेश रद्द कर दिए गए.

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अब चुनाव न्यायाधिकरण करेगा फैसला

समिति ने यह भी कहा कि अब चुनाव परिणाम घोषित हो चुके हैं. इसलिए दोषसिद्धि के बाद महेश तिवारी सदस्य बने रह सकते हैं या नहीं, इसका निर्णय केवल चुनाव न्यायाधिकरण ही करेगा. इसके लिए बार काउंसिल ऑफ इंडिया को सभी दस्तावेजों के साथ मामला चुनाव न्यायाधिकरण के समक्ष रखने का निर्देश दिया गया है. साथ ही, समिति ने अंतरिम व्यवस्था जारी रखते हुए निर्देश दिया कि विवादित एक सीट फिलहाल खाली रखी जाएगी और इस पर अंतिम निर्णय चुनाव न्यायाधिकरण के आदेश के बाद ही लागू होगा. मानो भारतीय कानूनी व्यवस्था ने फिर साबित कर दिया कि फैसला भी होगा और पहले यह तय होगा कि फैसला करने का अधिकार किसके पास है.

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By Rana pratap

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