रांची. बिजली के पोल पर झूलते तारों को लेकर हाइकोर्ट से लेकर मुख्यमंत्री तक निर्देश दे चुके हैं. जेबीवीएनएल द्वारा तार काटे जाने के बाद इंटरनेट सेवा बाधित होने पर हाइकोर्ट ने भी नाराजगी जतायी थी और इंटरनेट को आवश्यक सेवा बताया था. इसके बाद अब टेलीकॉम कंपनियां भी तारों को व्यवस्थित करने की दिशा में सक्रिय हुई हैं.
जेबीवीएनएल ने टेलीकॉम और इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों से पूरे राज्य में बिजली के कितने खंभों से तार ले जाये गये हैं, इसकी पूरी विवरणी मांगी है. विवरणी मिलने के बाद खंभों की संख्या के आधार पर कंपनियों से शुल्क की वसूली की जायेगी. जेबीवीएनएल ने एक खंभे से तार ले जाने के लिए सालाना 100 रुपये शुल्क तय किया है. अभी तक पूरे राज्य में करीब 1.03 लाख बिजली के खंभों से तार ले जाने की अनुमति ली गयी है.
संयुक्त टीम करेगी खंभों और तारों का निरीक्षण
टेलीकॉम कंपनियों के सूत्रों के अनुसार, जेबीवीएनएल और विभिन्न इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों के प्रतिनिधि प्रत्येक जिले में संयुक्त रूप से निरीक्षण करेंगे. इस दौरान बिजली के खंभों से गुजर रहे इंटरनेट और टेलीकॉम तारों की स्थिति देखी जायेगी. जहां तार झूलते या अव्यवस्थित मिलेंगे, उन्हें संबंधित टेलीकॉम कंपनियां दुरुस्त करेंगी, ताकि इंटरनेट सेवा बाधित नहीं हो.
वहीं, जेबीवीएनएल अपने खंभों की संख्या का भी सत्यापन करेगा. इससे यह पता चल सकेगा कि कितने खंभों का इस्तेमाल टेलीकॉम कंपनियां कर रही हैं और उसी के अनुसार शुल्क की वसूली की जा सकेगी.
शहर की सुंदरता के लिए भी तारों को किया जायेगा व्यवस्थित
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने शहर की सुंदरता को ध्यान में रखते हुए सड़कों और बिजली के खंभों पर बेतरतीब तरीके से लगे तारों को व्यवस्थित करने का निर्देश दिया था. इसी के तहत अब जेबीवीएनएल और टेलीकॉम कंपनियां मिलकर तारों को व्यवस्थित करने की तैयारी में हैं.
रांची के जीएम डीएन साहू ने कहा कि बिजली के खंभों पर लगे तारों को व्यवस्थित करना जरूरी है. इसके लिए टेलीकॉम कंपनियों को भी कहा गया है. जल्द ही जेबीवीएनएल मुख्यालय स्तर से इस दिशा में आगे की कार्रवाई की जायेगी.
