विदेश से लौट जांच कराने रिम्स पहुंचीं विधायक दीपिका पांडेय ने साझा किया अनुभव, कहा- आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था की प्रशंसा करनी होगी

वि श्व में कोरोना वायरस के खौफ के बीच 20 मार्च को अमेरिका से लौटी गोड्डा जिले के महगामा की विधायक दीपिका पांडेय रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से सीधा रिम्स आयीं और जागरूकता का परिचय देते हुए खुद की जांच करवायी, ताकि यह पता चल सके कि विदेश यात्रा के दौरान कहीं वह कोरोना वायरस की चपेट में तो नहीं आ गयी है. दीपिका पांडेय की रिपोर्ट निगेटिव आयी, लेकिन रिपोर्ट आने के पहले वह परिवार के लोगों से बिना मिले करीब 72 घंटे तक रिम्स के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती रहीं

वि श्व में कोरोना वायरस के खौफ के बीच 20 मार्च को अमेरिका से लौटी गोड्डा जिले के महगामा की विधायक दीपिका पांडेय रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से सीधा रिम्स आयीं और जागरूकता का परिचय देते हुए खुद की जांच करवायी, ताकि यह पता चल सके कि विदेश यात्रा के दौरान कहीं वह कोरोना वायरस की चपेट में तो नहीं आ गयी है. दीपिका पांडेय की रिपोर्ट निगेटिव आयी, लेकिन रिपोर्ट आने के पहले वह परिवार के लोगों से बिना मिले करीब 72 घंटे तक रिम्स के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती रहीं. फिलहाल वह 14 दिन के लिए होम क्वारेंटाइन में हैं. जांच की प्रक्रिया से लेकर आइसोलेशन वार्ड तक उनका अनुभव क्या रहा. इस पर प्रभात खबर के रिपोर्टर राजीव पांडेय ने फोन पर उनसे खास बातचीत की.

Q. रिम्स के आइसोलेशन वार्ड में अाप 72 घंटे रहीं, कैसा गुजरा समय?

अमेरिका से दिल्ली होते हुए मैं 20 मार्च को रांची पहुंची थी. मुझे लगा कि विदेश से आयी हूं, तो अपने और समाज के लिए जांच करा लेनी चाहिए. बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से सीधे रिम्स के आइसोलेशन वार्ड गयी और सैंपल दिया. मुझे आइसोलशन वार्ड के एक कमरे में शिफ्ट कर दिया गया. रिपोर्ट को लेकर थोड़ी भयभीत तो थी, लेकिन मन में आया कि जब कोरोना वायरस की चपेट में आना होगा तो आ ही जाऊंगी. हालांकि मुझे कोई खास सिम्टम नहीं था, इसलिए आश्वस्त थी. रिपोर्ट निगेटिव आयी, तब राहत मिली. अभी भी मुझे 14 दिन के होम कोरेंटाइन में रहने काे कहा गया है. जिसका मैं पालन कर रही हूं.

Q. रिपोर्ट आने तक तीन दिन आपने किस तरह समय बिताया?

मेरे पास एक पुस्तक थी, जिसको पढ़ने में पूरा समय दिया. मोबाइल व इंटरनेट के युग में समय कैसे बीतता है, यह पता नहीं चलता. कभी कोरोना पर विश्व में हो रही हलचल को देखती थी, तो कभी डब्लूएचओ की गाइडलाइन भी पढ़ती थी. आइसोलेशन वार्ड की व्यवस्था तारीफ करने के लायक है. साफ-सफाई का पूरा ख्याल रखा जाता है. तीन से चार बार सफाई की जाती थी. समय-समय पर आकर डॉक्टर सभी लोगोें से पूछते थे. पौष्टिक खाना दिया जाता था, जिससे व्यक्ति का एम्युन सिस्टम मजबूत हो. अपने क्षेत्र के लोगों के संपर्क में रहती थी. कोरोना को लेकर लोगाें को जागरूक करने का काम करती रही.

Q. दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरी थीं, वहां का अनुभव क्या रहा?

मुझे कहना नहीं चाहिए, लेकिन लोगाें को सही तरीका नहीं आता.मैनर नहीं है. तापमान कम हो जाये और थर्मल जांच के दौरान पकड़ में नहीं आये, इसके लिए लोगों ने सारे उपाय किये. अपने व समाज के लोगों की चिंता ही किसी में नहीं दिख रही थी. मैंने खुद कई को बात करते सुना कि कैसे भी उपाय करो और बच निकलो. मुझे लगता है एयरपोर्ट पर वीआइपी के साथ इस वक्त सख्ती करने की जरूरत है. आपने देखा ही एक अभिनेत्री ने क्या किया है. खुद पीड़ित हो ही गयी है, बड़े-बड़े लोगों को बेचैन कर रखा है. सबसे बड़ी बात है गलती भी स्वीकार नहीं कर रही है. मेरे साथ भी सख्ती नहीं की गयी. मैं भी चाहती तो भ्रमित कर घर जा सकती है, लेकिन मैंने ऐसा करना उचित नहीं समझा.

Q. लॉक डाउन के फैसले से कोरोना की रोकथाम में लाभ होगा क्या?

अमेरिका से जब निकली थी, तो वहां की स्थिति ज्यादा बेचैन करनेवाली नहीं थी. भारत में भी मरीजों की संख्या कम थी, लेकिन मास ट्रांसमिशन की आशंका थी. विदेशों में इसके लिए लॉक डाउन व होम कोरेंटाइन किया गया. यह अच्छी बात है कि देश के कई राज्यों मेें लॉक डाउन कर दिया है. सरकार ने भी अच्छा कदम उठाया है. इससे पीड़ितों की संख्या में इजाफा कम होगा. परेशानी तो होगी, लेकिन रिजल्ट अच्छा होगा. मैं अपील करना चाहूंगी कि विदेश से आये हैं, तो खुद जांच कराने के लिए आगे आये.

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लेखक के बारे में

Author: Pritish Sahay

Published by: Prabhat Khabar

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