रांची. इस्कॉन के संस्थापक आचार्य श्रील प्रभुपाद की जन्म जयंती इस्कॉन रांची के भक्तों ने श्रद्धा और भक्ति के साथ मनायी. उनका जन्म नंदोत्सव के दिन कोलकाता के टॉलीगंज में हुआ था. भक्त परिवार में जन्म लेने के कारण बचपन से ही उन्हें माता-पिता से भक्ति का संस्कार मिला.
युवा अवस्था में उनकी मुलाकात अपने गुरु श्रील भक्ति सिद्धांत सरस्वती ठाकुर से हुई. इसके बाद गुरु के निर्देशन में उनका आध्यात्मिक सफर आगे बढ़ा. गुरु की प्रेरणा से उन्होंने 70 वर्ष की आयु में अमेरिका जाकर भगवद्गीता के ज्ञान का प्रचार-प्रसार किया और विश्वभर में कृष्ण भक्ति का संदेश पहुंचाया.
श्रील प्रभुपाद ने करीब 12 वर्षों के प्रचार कार्य के दौरान 108 मंदिरों के साथ गुरुकुल, हॉस्पिटल और गौशालाओं की स्थापना करायी. आज विश्व के 150 देशों में इस्कॉन के मंदिर, गुरुकुल, हॉस्पिटल और गौशालाएं संचालित हो रही हैं. इन संस्थानों में श्रील प्रभुपाद द्वारा दिये गये निर्देशों और सिद्धांतों का पालन किया जा रहा है.
