Indian Railways News: रांची से पटना जाने वालों की हो गयी बल्ले-बल्ले, समय बचेगा, होंगे इतने फायदे

Indian Railways News: झारखंड और बिहार के रेल यात्रियों खासकर रांची और पटना के लोगों के लिए खुशखबरी है. भारत सरकार ने एक रेल प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है, जिसके पूरा होने पर नयी यात्री और मालवाहक ट्रेनें चलेंगी. यात्रियों को रांची से पटना जाने और पटना से रांची आने में 2 घंटे के समय की बचत होगी. इस रूट से झारखंड में कोडरमा, चतरा, हजारीबाग और रामगढ़ जिले की कनेक्टिविटी बढ़ जायेगी.

Indian Railways News: ट्रेन से रांची से पटना और पटना से रांची की यात्रा करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी खुशखबरी है. रांची से पटना के बीच नये ट्रैक पर ट्रेन चलेंगी, जिससे यात्रियों को काफी समय की बचत होगी. कोयला, सीमेंट, कृषि वस्तु, उर्वरक और अन्य खनिजों का तेजी से परिवहन होगा. इससे ऊर्जा उत्पादन और औद्योगिक विकास को भी बल मिलेगा.

रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए केंद्र ने दिये 3063 करोड़

केंद्र सरकार ने झारखंड के कई जिलों के साथ बिहार में रेल कनेक्टिविटी मजबूत करने के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने कोडरमा-बरकाकाना रेल लाइन के दोहरीकरण को पिछले दिनों मंजरी दे दी. 133 किलोमीटर की इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए 3,063 करोड़ रुपए आवंटित की गयी है.

कोडरमा-बरकाकाना रेल लाइन पर होंगे 197 छोटे-बड़े पुल

इस परियोजना के पूरा होने पर रेल मार्ग के दोहरीकरण से नयी यात्री और मालवाहक ट्रेनें चलेंगी. इस रूट से झारखंड में कोडरमा, चतरा, हजारीबाग और रामगढ़ जिले की कनेक्टिविटी बढ़ जायेगी. रेलवे के इस प्रोजेक्ट के तहत 17 बड़े पुल, 180 छोटे पुल, 42 रेलवे ओवरब्रिज और 13 रेलवे अंडर पुल का निर्माण होगा.

कोडरमा, चतरा, हजारीबाग, रामगढ़ से गुजरेगी रेल लाइन

यह रेल लाइन कोडरमा, चतरा, हजारीबाग और रामगढ़ जिले से होकर गुजरेगी. इसका सीधा लाभ 938 गांवों और 15 लाख से अधिक लोगों को मिलेगा. अभी इस सिंगल लाइन वाले रूट पर फिलहाल पटना-रांची-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन चलती है. अभी गोमो, बोकारो स्टील सिटी के रास्ते चलने वाली वंदे भारत ट्रेन को जनशताब्दी एक्सप्रेस की तुलना में रांची से पटना जाने में 2 घंटे कम लगते हैं.

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रांची से कोडरमा की दूरी रह जायेगी 211 किलोमीटर

अभी रांची से कोडरमा (वाया मुरी, बोकारो) की दूरी 240 किलोमीटर है. इस रूट से जनशताब्दी एक्सप्रेस और अन्य ट्रेनें रांची से पटना जाती हैं. रांची-बरकाकाना-हजारीबाग रोड होते हुए अगर ट्रेन चले, तो कोडरमा की दूरी 211 किलोमीटर ही है. इसी लाइन पर रांची-पटना वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन चलती है. वंदे भारत अन्य ट्रेनों की तुलना में घंटे पहले पटना पहुंचा देती है.

अभी सिंगल है रांची-बरकाकाना-हजारीबाग रोड रेल लाइन

इस समय रांची-बरकाकाना-हजारीबाग रोड रेल लाइन सिंगल लाइन है. इसका दोहरीकरण हो जाने के बाद इस ट्रैक पर ट्रेनों के चलने से रांची से कोडरमा तक की दूरी 29 किलोमीटर घट जायेगी. रांची से पटना जाने वाले यात्रियों का 2 घंटे समय बचेगा. माल का परिवहन भी तेज हो जायेगा. औद्योगिक विकास को बल मिलेगा.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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