अवैध पत्थर खनन मामले में झारखंड सरकार को सुप्रीम झटका, सीबीआई दाखिल कर सकेगी चार्जशीट

Illegal Mining in Sahibganj: अवैध रूप से पत्थर खनन किये जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को तगड़ा झटका दिया है. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि सीबीआई की जांच पर रोक नहीं लगायी जायेगी. किसी भी तरह से सीबीआई की जांच असंवैधानिक या गैरकानूनी नहीं है. इसके साथ ही इस मामले में चार्जशीट दाखिल करने का रास्ता साफ हो गया है.

Illegal Mining in Sahibganj: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड में अवैध पत्थर खनन मामले में झारखंड सरकार द्वारा दायर एसएलपी को खारिज कर दिया है. यह एसएलपी राज्य सरकार ने झारखंड में अवैध पत्थर खनन मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के झारखंड हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की थी. इस मामले की सुनवाई जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस आलोक आराधे की पीठ ने की. याचिका पर सुनवाई के बाद पीठ ने झारखंड सरकार की दलील को स्वीकार नहीं किया. इस मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा, राज्य सरकार जांच का विरोध क्यों कर रही है? पीठ ने टिप्पणी की कि झारखंड सरकार पंकज मिश्रा को बचाने की कोशिश क्यों कर रही है? सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब सीबीआई मामले की जांच कर चार्जशीट भी दायर कर सकेगी.

नींबू पहाड़ में अवैध पत्थर खनन की दर्ज हुई थी शिकायत

यह मामला तब सामने आया था, जब साहिबगंज जिले के निवासी बिजय हांसदा ने नींबू पहाड़ में अवैध पत्थर खनन को लेकर पंकज मिश्रा सहित आठ लोगों के खिलाफ एसटी-एससी एक्ट के तहत शिकायत दर्ज करायी थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि इस अवैध खनन में पंकज मिश्रा, खनन विभाग के अधिकारी और खनन माफिया शामिल हैं. हालांकि उनकी प्राथमिकी (एफआइआर) अदालत के हस्तक्षेप के बाद ही दर्ज हुई थी.

Illegal Mining in Sahibganj: बिजय हांसदा ने हाईकोर्ट में दायर की थी यचिका

इस मामले में कार्रवाई नहीं होने पर बिजय हांसदा ने झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. उन्होंने मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की थी. बाद में बिजय हांसदा ने एक हस्तक्षेप याचिका दायर कर अपनी मूल याचिका को वापस लेने की अनुमति मांगी. इस पर जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत ने याचिका को वापस लेने की अनुमति नहीं देकर मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया.

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याचिकाकर्ता के आचरण और आरोपियों की भूमिका की जांच का दिया था निर्देश

तब अदालत ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता के आचरण और आरोपियों की भूमिका दोनों की जांच करे. उक्त आदेश के खिलाफ झारखंड सरकार ने हाईकोर्ट में क्रिमिनल रिट याचिका दायर कर चुनौती दी थी. उसका कहना था कि 18 अगस्त 2023 को दिये गये हाईकोर्ट के आदेश के आधार पर रजिस्टर की गयी प्राथमिकी निरस्त की जाये.

सीबीआई की प्राथमिकी को सरकार ने दी थी चुनौती

सीबीआई द्वारा रजिस्टर की गयी प्राथमिकी दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टैब्लिशमेंट एक्ट-1946 की धारा छह का स्पष्ट उल्लंघन है, क्योंकि प्राथमिकी दर्ज करने और मामले में जांच शुरू करने से पहले सीबीआई द्वारा राज्य सरकार से कोई मंजूरी नहीं ली गयी थी. चूंकि मामला किसी राज्य की सीमा के बाहर और उसके अंदर होनेवाले किसी भी अपराध की जांच वगैरह से जुड़ा है और यह संबंधित राज्य की सहमति के बिना नहीं हो सकती है. दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टैब्लिशमेंट एक्ट-1946 के प्रोविजन को राज्य सरकार की ओर से रोक दिया गया है. इसके बाद भी प्राथमिकी दर्ज हुई, जो सीधे तौर पर फेडरलिज्म और सेपरेशन ऑफ पावर्स के बेसिक स्ट्रक्चर का उल्लंघन है.

सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने खारिज कर दी थी याचिका

सरकार की क्रिमिनल रिट याचिका पर सुनवाई के बाद जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की अदालत ने 16 फरवरी 2024 को उसे खारिज कर दिया था. अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि यह कोर्ट पहले ही इस नतीजे पर पहुंच चुका है कि को-ऑर्डिनेट बेंच द्वारा पहले ही पास किये गये ऑर्डर को देखते हुए, जिसमें शुरुआती जांच उस जांच एजेंसी को सौंप दी गयी है, जो दिल्ली स्पेशल पुलिस इस्टैब्लिशमेंट एक्ट 1946 के तहत आती है, भारत के संविधान के आर्टिकल 226 के तहत आगे के निर्देश की कोई जरूरत नहीं है.

झारखंड हाईकोर्ट को सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती

इस आदेश को झारखंड सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर चुनौती दी थी. वर्ष 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने एसएलपी पर सुनवाई के बाद सीबीआई जांच पर रोक नहीं लगायी. कहा कि सीबीआई जांच करेगी, लेकिन चार्जशीट दायर नहीं करेगी.

ईडी ने भी की थी जांच, कई लोगों की हुई थी गिरफ्तारी

साहिबगंज जिले में लगभग 1500 करोड़ रुपए के अवैध पत्थर खनन घोटाले का आरोप है. वर्ष 2022 में ईडी ने इस रैकेट की जांच शुरू की थी और झामुमो के प्रभावशाली नेता पंकज मिश्रा सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया था.

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By Mithilesh Jha

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