रांची. झारखंड हाईकोर्ट ने महिला पर्यवेक्षिका प्रतियोगिता परीक्षा से जुड़े मामले में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की अपील पर सुनवाई करते हुए एकल पीठ के आदेश पर रोक लगा दी है. चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने जेएसएससी का पक्ष सुनने के बाद यह आदेश दिया.
अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को
खंडपीठ ने मामले में प्रतिवादी आकांक्षा कुमारी समेत 33 अभ्यर्थियों को नोटिस जारी करते हुए अपना पक्ष रखने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई छह अक्टूबर को होगी.
JSSC ने दी थी आदेश को चुनौती
जेएसएससी की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरावाल, अधिवक्ता प्रिंस कुमार और अधिवक्ता जयप्रकाश ने पक्ष रखा. उन्होंने अदालत को बताया कि एकल पीठ ने 15 मई 2026 को जो आदेश पारित किया था, वह सही नहीं है. जेएसएससी की ओर से कहा गया कि वर्ष 2019, 2021 और 2023 की संशोधित नियमावली का गजट नोटिफिकेशन वर्ष 2026 में हुआ था. इसी आधार पर नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ायी गयी थी.
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डिग्री न होने के कारण रद्द हुई थी उम्मीदवारी
जेएसएससी के अनुसार, संबंधित 33 अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी इस आधार पर रद्द की गयी थी कि उनकी स्नातक की डिग्री नियुक्ति विज्ञापन में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप नहीं थी.
अभ्यर्थियों ने दायर की थी रिट याचिका
इसके खिलाफ अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर की थी. एकल पीठ ने सुनवाई के बाद जेएसएससी द्वारा उम्मीदवारी रद्द करने के आदेश को निरस्त कर दिया था और अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया था. इसी आदेश को जेएसएससी ने खंडपीठ में चुनौती दी थी. अब खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाते हुए 33 अभ्यर्थियों से जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई छह अक्टूबर को होगी.
